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Delhi High Court: देश की राजधानी में बिगड़ती वायु गुणवत्ता को देखते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने एयर प्यूरीफायर पर TAX छूट देने के लिए अधिकारियों द्वारा कोई कदम न उठाने पर नाराजगी भी जताई.
24 दिसंबर 2025
दिल्ली उच्च न्यायालय: देश की राजधानी में बिगड़ती वायु गुणवत्ता को देखते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है. दिल्ली हाई कोर्ट ने जीएसटी परिषद को निर्देश दिया है कि खराब वायु गुणवत्ता को देखते हुए एयर प्यूरीफायर पर GST कम करे या फिर खत्म करे. कोर्ट ने एयर प्यूरीफायर पर TAX छूट देने के लिए अधिकारियों द्वारा कोई कदम न उठाने पर नाराजगी भी जताई. अदालत राजधानी की खराब वायु गुणवत्ता को लेकर दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को जीएसटी परिषद को जल्द से जल्द बैठक करने और राजधानी में बिगड़ती वायु गुणवत्ता को देखते हुए एयर प्यूरीफायर पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को कम करने या समाप्त करने पर विचार करने का निर्देश दिया.
चिकित्सा उपकरण की श्रेणी में रखने की मांग
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने मामले की सुनवाई 26 दिसंबर को निर्धारित की है ताकि संबंधित अधिकारियों के वकील अदालत को परिषद की बैठक की तारीख बता सकें. इससे पहले उच्च न्यायालय ने इस आपातकालीन स्थिति में, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बहुत खराब है, एयर प्यूरीफायर पर कर छूट देने के लिए अधिकारियों द्वारा कोई कदम न उठाने पर नाराजगी व्यक्त की. अदालत एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें केंद्र सरकार को एयर प्यूरीफायर को चिकित्सा उपकरण की श्रेणी में रखने और वस्तु एवं सेवा कर (GST) को घटाकर पांच प्रतिशत के स्तर पर लाने का निर्देश देने की मांग की गई थी.
वर्तमान में एयर प्यूरीफायर पर 18 % GST
वर्तमान में एयर प्यूरीफायर पर 18 प्रतिशत कर लगता है. अधिवक्ता कपिल मदन द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि दिल्ली में गंभीर वायु प्रदूषण से उत्पन्न अत्यंत आपातकालीन स्थिति को देखते हुए प्यूरीफायर को विलासिता की वस्तु नहीं माना जा सकता. याचिका में तर्क दिया गया है कि स्वच्छ हवा तक पहुंच स्वास्थ्य और जीवन के लिए अपरिहार्य हो गई है. याचिका में कहा गया है कि एयर प्यूरीफायर पर उच्चतम स्तर का GST लगने से यह आम लोगों की खरीद से बाहर है. याचिका में तर्क दिया गया है कि यह न्यूनतम सुरक्षित इनडोर हवा सुनिश्चित करने के लिए अपरिहार्य उपकरण है. महंगा होने के कारण लोगों के लिए ऐसे उपकरणों को खरीदना काफी मुश्किल होता है.
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