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Budget 2026: आज 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश का बजट पेश करेंगी, जो भारत की अर्थव्यवस्था का रोडमैप है.
1 फरवरी, 2026
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को अपना लगातार नौवां बजट पेश करेंगी, जिससे देश की दशा और दिशा तय होगी. बजट में ग्रोथ की गति को बनाए रखने, वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और ऐसे सुधारों को शामिल करने के उपायों की घोषणा होने की उम्मीद है, जो अमेरिकी टैरिफ सहित वैश्विक व्यापार टकराव से भारतीय अर्थव्यवस्था को बचा सकें. अप्रैल 2026 से मार्च 2027 वित्तीय वर्ष (2026-27) के लिए बजट रविवार को पेश किया जाएगा, जो स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार होगा.
अमेरिकी टैरिफ से कैसे मिलेगी मदद
सीतारमण की बड़े पैमाने पर इनकम टैक्स और GST कटौती, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च और RBI की ब्याज दर में कटौती ने अब तक भारतीय अर्थव्यवस्था को अमेरिकी टैरिफ का सामना करने में मदद की है. लेकिन अब, उन्हें इस गति को बनाए रखने के लिए उपाय करने होंगे. FY27 बजट में सरकार पर खपत बढ़ाने, रोजगार सृजन में तेजी लाने और पूंजीगत खर्च बढ़ाने का दबाव है, जबकि राजकोषीय घाटे को नीचे की ओर बनाए रखना है.
अर्थशास्त्रियों ने कहा कि सीतारमण को भविष्य में निवेशकों का विश्वास बहाल करने का कठिन काम भी करना है, क्योंकि अमेरिका के साथ भारत की व्यापार वार्ता को लेकर अनिश्चितता ने वित्तीय बाजारों को अस्थिर कर दिया है, जिससे विदेशी निवेशक भारतीय इक्विटी बेच रहे हैं और रुपये को रिकॉर्ड निचले स्तर पर धकेल रहे हैं.
नियम हो सकते हैं सरल
सरकार घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए नियमों को सरल बनाने और संरचनात्मक सुधारों को आगे बढ़ाने पर ध्यान दे सकती है. पैसे की कमी के बावजूद, उनसे खर्च में कटौती की उम्मीद नहीं है और वह चुनाव वाले राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम के लिए नए कदम शामिल कर सकती हैं. इसके अलावा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, कृषि और सोशल वेलफेयर जैसे अलग-अलग सेक्टर की अपनी खास जरूरतें होती हैं. वहीं बजट से आम आदमी को भी खास उम्मीदें होती हैं. इसलिए यह देखना जरूरी होगा कि बजट में किन सेक्टर पर कितना ध्यान दिया जाता है और सरकार डेवलपमेंट को नई गति देने के लिए क्या कोशिश करती है.
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