Home Latest News & Updates चंपत राय के बहाने संगठन के भीतर मतभेद उजागर

चंपत राय के बहाने संगठन के भीतर मतभेद उजागर

by Live India
विहिप में आंतरिक दरार: चंपत राय के बहाने संगठन के भीतर मतभेद उजागर, दूसरा पक्ष खुलकर बचाव में उतरा

राम मंदिर: अयोध्या के राम मंदिर में दान-पात्र और चढ़ावे में कथित गबन का मामला अब सिर्फ कानूनी जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके बहाने विश्व हिंदू परिषद के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं. एक ओर चंपत राय के खिलाफ जांच की मांग उठ रही है, तो दूसरी ओर विहिप और संत समाज का एक वर्ग खुलकर उनके बचाव में उतर आया है. ऐसे में सवाल यह है कि क्या यह विवाद सिर्फ वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित रहेगा या फिर संगठन के भीतर भी इसका असर दिखाई देगा? आठ लोगों की गिरफ्तारी के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया. इस्तीफे की पुष्टि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र (ट्रस्ट) ने भी की.

चंपत राय को कटघरे में खड़ा करने पर उठे सवाल

हालांकि, चंपत राय के समर्थन में भी आवाजें तेज हो रही हैं. संत समाज और विहिप से जुड़े कई लोग कह रहे हैं कि एफआईआर में चंपत राय का नाम नहीं है और बिना किसी ठोस साक्ष्य के उन्हें कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है. उनका कहना है कि यदि किसी कर्मचारी या सहयोगी ने व्यक्तिगत लाभ के लिए गड़बड़ी की है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए, लेकिन जांच पूरी होने से पहले चंपत राय की छवि पर सवाल उठाना न्यायसंगत नहीं है.

आरोप को साजिश का हिस्सा बताया

विश्व हिंदू परिषद के महासचिव सुरेंद्र गुप्ता ने कहा कि विहीप के एक वर्ग का दावा है कि यह गबन सिर्फ और सिर्फ ट्रस्ट से जुड़े लोगों की आयोग्यता और अकर्मण्यता का प्रतीक है. विहीप महासचिव का तो दावा है कि जिस व्यक्ति पर राम मंदिर आंदोलन, राम मंदिर के निर्माण और चंदा इकट्ठा करने तक कि प्रकिया में कोई आरोप नहीं लगा , उस पर इस तरह का बेबुनियाद आरोप लगाना एक बड़ी साज़िश का हिस्सा है. ऐसे में जो लोग बिना तत्थों के आधार पर एक बुजुर्ग व्यक्ति पर आरोप लगया जा रहा है.

किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा: आलोक कुमार

वहीं, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने साफ किया है कि जांच निष्पक्ष होगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा. उनका कहना है कि कानून अपना काम करेगा और जांच के दायरे में जो भी आएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी. यानी विहिप ने एक तरफ चंपत राय के खिलाफ बिना जांच आरोप लगाने का विरोध किया है, तो दूसरी ओर यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जांच से कोई भी व्यक्ति ऊपर नहीं है. राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. ऐसे में दान और चढ़ावे से जुड़े इस विवाद की निष्पक्ष जांच न सिर्फ कानूनी बल्कि नैतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

अब सभी की निगाहें एसआईटी की जांच पर टिकी हैं, क्योंकि यही तय करेगी कि यह मामला कुछ कर्मचारियों तक सीमित था या इसकी जिम्मेदारी की परिधि और आगे तक जाती है. फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि राम मंदिर के इस विवाद ने विहिप के भीतर अलग-अलग राय को सार्वजनिक कर दिया है.

SIT को अब तक क्या पता चला?

  • SIT को मंदिर में दान से जुड़ी प्रक्रियाओं के पालन में बड़ी खामियां मिली हैं.
  • कैश गिनते समय सुरक्षा गार्ड हमेशा मौजूद नहीं रहते थे.
  • गिनती वाले कमरे में आने-जाने वाले कर्मचारियों की ठीक से तलाशी नहीं ली जाती थी.
  • CCTV फुटेज को 180 दिनों तक सुरक्षित रखने की ज़रूरत के बावजूद, इसे सिर्फ़ 45 दिनों तक ही रखा जाता था.
  • एक पूर्व ड्राइवर के पास कई दान पेटियों की चाबियां होना कथित तौर पर तय प्रक्रियाओं के खिलाफ़ था.
  • खबरों के मुताबिक, कर्मचारी कैश छिपाने से रोकने के लिए बनाए गए तय ड्रेस कोड का पालन नहीं कर रहे थे.

अभी तक क्या पता नहीं चल पाया है?

  • कथित तौर पर गबन की गई कुल रकम.
  • वह पूरा तरीका जिससे कथित तौर पर दान की रकम को दूसरी जगह भेजा गया.
  • क्या मंदिर ट्रस्ट के ऊंचे ओहदे वाले अधिकारी इसमें शामिल थे. ऐसी कोई जानकारी अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पहली FIR दर्ज, टिन्नू यादव और अनुकल्प मिश्रा समेत 8 पर केस

Related Articles