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Hindu New Year: चैत्र नवरात्रि के पहले दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है. हिंदू कैलैंडर के अनुसार आज से साल 2083 शुरु हो गया है. यहां जानें हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र नवरात्रि से क्यों होती है.
19 मार्च, 2026
आज से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है. आज हर जगह का माहौल भक्तिमय है. इसी के साथ आज का दिन इसलिए भी खास है, क्योंकि चैत्र नवरात्रि के पहले दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है. यानी आज से हिंदुओं के लिए साल 2083 शुरू हो गया है. आपके मन में यह सवाल जरूर उठा होगा कि हिंदू नववर्ष इतना आगे कैसे है. दरअसल, हिंदुओं के कैलेंडर को विक्रम संवत कहा जाता है. हिंदू कैलेंडर के महीने और तारीख की गणना दुनियाभर में माने जाने वाले ग्रेगोरियन कैलेंडर से काफी अलग है और यह 57 साल आगे है. आज हम आपको बताएंगे कि हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र नवरात्रि से क्यों होती है और हिंदू कैलेंडर ग्रेगोरियन कैलेंडर से अलग कैसे है.
नवरात्रि से क्यों शुरु होता है नया साल

चैत्र नवरात्रि को हिंदू नए साल की शुरुआत माना जाता है क्योंकि यह प्रकृति में एक नए चक्र की शुरुआत का प्रतीक है। वसंत ऋतु में पेड़-पौधों में नई कलियां आती हैं, मौसम बदलते हैं, और इसे सृजन और नए जीवन का समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी समय भगवान ब्रह्मा ने ब्रह्मांड की रचना शुरू की थी, इसलिए चैत्र महीने का पहला दिन यानी शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नए साल की शुरुआत माना जाता है। नवरात्रि के दौरान देवी शक्ति की पूजा भी इस नई शुरुआत को आध्यात्मिक महत्व देती है।
अलग क्यों है हिंदू कैलेंडर
हिंदू कैलेंडर और ग्रेगोरियन कैलेंडर के बीच सबसे बड़ा अंतर दोनों की कैलकुलेशन के तरीके में है। हिंदू कैलेंडर लूनिसोलर सिस्टम पर आधारित है, जिसमें महीनों की गणना चांद के अनुसार की जाती है और मौसमों को सूरज से बैलेंस किया जाता है। वहीं, ग्रेगोरियन कैलेंडर पूरी तरह से सोलर सिस्टम पर आधारित है, जिसमें साल की गणना पृथ्वी के सूरज के चारों ओर घूमने के आधार पर की जाती है। इसलिए हिंदुओं का नया मार्च-अप्रैल में आता है और ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से 1 जनवरी को नया साल मनाया जाता है.
विक्रमादित्य ने शुरु किया था कैलेंडर

इसके अलावा, विक्रम संवत ऐतिहासिक रूप से राजा विक्रमादित्य की जीत परआधारित है. माना जाता है कि सम्राट विक्रमादित्य ने शकों पर विजय प्राप्त करने के बाद विक्रम संवत कैलेंडर की शुरुआत की थी. यह ईसा मसीह के जन्म से 57 साल पहले ही शरु हो गया था, इसलिए हिंदुओं का नया साल ग्रेगोरियन से आगे है. इस तरह, हिंदू कैलेंडर न केवल समय की गणना करता है, बल्कि प्रकृति, मौसम और धार्मिक परंपराओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है.
