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जानें कलश स्थापना का सही नियम

by Live India
जानें कलश स्थापना का सही नियम

Navratri Kalash Sthapna Niyam: नवरात्रि के दौरान हर घर का माहौल भक्तिमय हो जाता है. नवरात्रि के पहले दिन घर में कलश की स्थापना की जाती है. यहां पढ़ें कलश स्थापना के जरूरी नियम क्या हैं.

18 मार्च, 2026

चैत्र नवरात्रि 19 मार्च, 2026 यानी कल से शुरू होने जाएंगे और यह 27 मार्च को खत्म होंगे. नवरात्रि में हर घर का माहौल भक्तिमय हो जाता है. ये नौ दिन देवी दुर्गा की पूजा के लिए विशेष महत्व रखते हैं. नवरात्रि के पहले दिन सबसे महत्वपूर्ण कलश स्थापना की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह केवल एक परंपरा नहीं है, बल्कि अपने घर में दिव्य ऊर्जा को आमंत्रित करने का एक शक्तिशाली माध्यम है. हालांकि, लोग अक्सर कलश स्थापतना करते समय छोटी-मोटी गलतियां कर देते हैं, जिससे पूजा का फल नहीं मिल पाता है. यहां आपको कलश स्थापना की सही विधि बताई गई है.

कलश के अंदर रखें ये चीजें

कलश की स्थापना के दौरान उसके अंदर रखी जाने वाली चीजों का अत्यधिक महत्व होता है. सबसे पहले, कलश को शुद्ध जल या पवित्र गंगाजल से भरा जाना चाहिए, जिसे पवित्रता और स्वयं जीवन का प्रतीक माना जाता है. इसके बाद, कलश के अंदर एक सिक्का रखना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह धन और समृद्धि का प्रतीक है. एक सुपारी स्थिरता और दृढ़ता का प्रतीक होती है, जबकि हल्दी की गांठ को पूजा में शुभ माना जाता है. इसके अलावा अक्षत (साबुत चावल) और दूर्वा घास को भी कलश के अंदर डाला जाता है.

कलश को ऐसे सजाएं

कलश को सजाने की प्रक्रिया भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. कलश के कंठ (ऊपरी भाग) पर कलावा बांधा जाता है, जो सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है. इसके बाद, कलश के मुख के चारों ओर आम के पांच या सात पत्ते लगाए जाते हैं. इसके बाद एक नारियल को लाल कपड़े या चुनरी में लपेटकर कलश के ऊपर रख दें. नारियल को देवी लक्ष्मी का ही एक रूप माना जाता है. इसलिए, इसे माता के प्रति श्रद्धा और भक्ति के साथ स्थापित किया जाता है. इन सभी चीजों का सही ढंग से उपयोग करने से पूजा की पवित्रता को बढ़ाता है.

किस दिशा में स्थापित करें कलश

इसके अलावा, कलश स्थापना के नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है. कलश को हमेशा जवार् (मिट्टी में बोए गए जौ) के बीच में रखा जाना चाहिए, जो प्रगति और नई शुरुआत का प्रतीक है. नारियल का नुकीला सिरा अपनी ओर होना चाहिए, ताकि सकारात्मक ऊर्जा घर के भीतर ही बनी रहे. साथ ही, कलश के नीचे मिट्टी और जौ रखना शुभ माना जाता है. इसके अलावा कलश को घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करना चाहिए, क्योंकि इस स्थान को देवी-देवताओं का निवास स्थान माना जाता है. जब कलश की स्थापना सही रीति-रिवाजों से की जाती है, तो यह न केवल घर में सुख, शांति और समृद्धि लाता है, बल्कि पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भी भर देता है.

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