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जानें परमा एकादशी की तिथि और पूजा विधि

by Live India
कल है पद्मिनी एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त

Parma Ekadashi Significance: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का खास महत्व है. हर महीने में 2 एकादशी आती हैं यानी साल भर में कुल 24 एकादशी आती हैं. हर एकादशी का अपना धार्मिक महत्व होता है, लेकिन परमा एकादशी का खास महत्व होता है, क्योंकि यह हर तीन साल में एक बार आती है. परमा एकादशी अधिकमास (मलमास) के कृष्ण में पड़ने वाली पुण्यदायी एकादशी है. माना जाता है कि इस दिन श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने से घर में दरिद्रता का अंत हो जाता है. मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ और व्रत करने से अश्वमेध यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है. जानें परमा एकादशी का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि.

Parma Ekadashi

परमा एकादशी का शुभ मुहूर्त

अक्सर लोगों को एकादशी की तिथि की जानकारी नहीं होती है. परमा एकादशी की तिथि मंगलवार, 10 जून 2026 को रात 12 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगी और बुधवार,11 जून, 2026 को रात 10 बजकर 36 मिनट पर खत्म होगी. उदया तिथि के अनुसार, एकादशी का व्रत 11 जून, 2026 को रखा जाएगा. इस दिन शुभ मुहूर्त में पूजा-पाठ करना फलदायी होता है. यहां जानें परमा एकादशी का शुभ मुहूर्त.

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:02 से 04:42 बजे तक

प्रात:काल पूजा मुहूर्त: सुबह 05:23 बजे से सुबह 07:07 बजे तक

अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:53 से दोपहर 12:49 बजे तक

व्रत पारण का समय: 12 जून को सुबह 05:23 से 08:10 बजे तक

परमा एकादशी का महत्व

परमा एकादशी अधिकमास में आती है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है. ‘परम’ शब्द का मतलब होता है- सर्वोच्च या श्रेष्ठ. यानी यह एकादशी सबसे श्रेष्ठ है. इस दिन सच्चे मन से व्रत रखने और भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से आपके पापों का नाश होता है. मान्यता है कि जो व्यक्ति आर्थिक तंगी से जूझ रहा है, उसे यह व्रत जरूर करना चाहिए. इससे घर में लक्ष्मी आती है. माना जाता है कि सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने भी इसी व्रत को करके अपना खोया हुआ राजपाठ और परिवार वापस प्राप्त किया था.

Parma Ekadashi

परमा एकादशी व्रत रखने की विधि

एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और पूजा करने का संकल्प लेना चाहिए. साफ कपड़े पहनकर चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं. उस पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. भगवान की मूर्ति का गंगाजल, पंचामृत या कच्चे दूध से अभिषेक करें. भगवान को पीले फूल, पीला चंदन, धूप, बिना टूटे चावल और खासकर तुलसी के पत्ते चढ़ाएं. पीले फल, मिठाई या सात्विक खीर चढ़ाएं. ध्यान रखें कि भगवान को चढ़ाए जाने वाले हर भोग में तुलसी के पत्ते जरूर होने चाहिए. इस दिन विष्णु सहस्रनाम या गीता के 11वें अध्याय का पाठ करना सुख-समृद्धि के लिए फलदायी माना जाता है. शाम को तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं और उसकी परिक्रमा करें.

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