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जोमैटो CEO दीपिंदर गोयल कनपटी पर क्यों लगाते हैं ये डिवाइस

by Live India
जोमैटो CEO दीपिंदर गोयल कनपटी पर क्यों लगाते हैं ये डिवाइस

What is Temple Device: जोमैटो के सीईओ दीपेंदर गोयल अपने कान के पास एक छोटा सा डिवाइस लगाते हैं, जिसकी अब सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है.

6 जनवरी, 2026

मंदिर उपकरण क्या है: जोमैटो के सीईओ दीपेंदर गोयल ने हाल ही में यूट्यूबर राज शमानी के साथ पॉडकास्ट किया था. उनका पॉडकास्ट सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हुआ, जिसकी वजह थी दीपेंदर के कान पर लगा एक छोटा सा डिवाइस. पूरे पॉडकास्ट में दीपेंदर ने अपने कान के पास टेंपल नाम का छोटा सा सफेद डिवाइस लगा रखा था, जिसकी अब सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है. हर कोई जानना चाहता है कि आखिर यह चीज है क्या. यह कैसे काम करती है और दीपेंदर ने इसे क्यों लगाया था. दीपेंदर के मुताबिक, यह डिवाइस आपके दिमाग पर नजर रखती है, चलिए जानते हैं कैसे.

क्या है टेंपल डिवाइस

दीपेंदर ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में इस डिवाइस के बारे में जानकारी दी है. दीपेंद्र गोयल ने अपनी कंपनी, इटरनल एंड कंटीन्यूअस रिसर्च के ज़रिए इस डिवाइस की रिसर्च और डेवलपमेंट में $25 मिलियन का इन्वेस्ट किया है. यह छोटा सा डिवाइस सेंसर की तरह काम करता है और इसे कनपटी के पास पहना जाता है. दीपेंदर का कहना है, इसका मुख्य काम दिमाग में ब्लड फ्लो को लगातार मापना है. गोयल मानते हैं कि ग्रेविटी दिमाग में ब्लड सप्लाई पर असर डालती है. जैसे जैसे हम बूढ़े होते हैं, हमारे दिमाग तक ब्लड सही तरह से नहीं पहुंच पाता, जिससे याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता पर असर पड़ सकता है. यह डिवाइस दिमाग में ब्लड फ्लो के बारे में सटीक जानकारी देने देता है.

डॉक्टरों ने उठाए सवाल

दीपेंद्र गोयल का यह डिवाइस अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. लोग इस डिवाइस या चिप के बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं. इस बीच, कई डॉक्टरों और एक्सपर्ट्स ने इस डिवाइस पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि ऐसे किसी भी डिवाइस का इस्तेमाल करने से पहले रिसर्च और वैज्ञानिक सबूत जरूरी हैं. कुछ डॉक्टरों का मानना ​​है कि यह डिवाइस सिर्फ ऊपरी सिग्नल का पता लगा सकता है और MRI की तरह सीधे दिमाग में ब्लड फ्लो को मापने में सक्षम नहीं है.

एम्स डॉक्टर ने बताया ‘अमीरों का खिलौना’

एम्स दिल्ली के रडियोलॉजिस्ट डॉ. सुव्रंकार दत्ता ने एक्स पर लिखा, “एक डॉक्टर-साइंटिस्ट और भारत में आर्टेरियल स्टिफ़नेस और पल्स वेव वेलोसिटी (2017) पर शुरुआती रिसर्च करने वालों में से एक के तौर पर, मैं आपको यकीन दिला सकता हूं कि इस डिवाइस की अभी साइंटिफिक तौर पर कोई अहमियत नहीं है और अपने मेहनत से कमाए पैसे ऐसे फैंसी खिलौनों पर बर्बाद न करें जिन पर अरबपति पैसे बर्बाद कर सकते हैं. अगर आप उनमें से एक हैं, तो आगे बढ़ें.”

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