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Middle East War Update: मिडल ईस्ट में कई हफ्तों से चल रही जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है. हर कोई यही सवाल कर रहा है कि आखिर ये तूफान कब रुकेगा?
03 अप्रैल, 2026
पूरी दुनिया की नजरें इस वक्त मिडल ईस्ट पर टिकी हैं, जहां शांति की कोई किरण फिलहाल नजर नहीं आ रही है. शुक्रवार की सुबह हमलों की नई लहर के साथ हुई, जिसने साफ कर दिया है कि ये लड़ाई अभी लंबी खिंचने वाली है. एक तरफ ईरान, कुवैत और बहरीन से हमलों की खबरें आ रही हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका और इजराइल के तेवर भी अलग ही लेवल पर बने हुए हैं.
इस बीच ईरान में फारसी नववर्ष यानी नौरोज के जश्न के बीच मातम पसर गया है. ईरान का दावा है कि एक अमेरिकी हमले में उसके सबसे ऊंचे पुल (B1 ब्रिज) को निशाना बनाया गया, जिससे 8 लोगों की मौत हो गई और करीब 95 लोग घायल हो गए. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इसे ‘नैतिक हार’ करार दिया है. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पुल के गिरने का वीडियो शेयर करते हुए इसे अपनी बड़ी कामयाबी बताया है. ट्रंप का कहना है कि ईरान अब पहले जैसा खतरा नहीं रहा, लेकिन ईरान के मिलिट्री ऑफिसर्स ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि उनके पास हथियारों का सीक्रेट स्टोर अभी भी सेफ है.
दुनिया की दुखती रग
इस वॉर का सबसे बड़ा असर समंदर के उस रास्ते पर पड़ा है जिसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कहते हैं. ये रास्ता दुनिया की एनर्जी सप्लाई की लाइफलाइन है. ईरान ने इस पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, जिससे ग्लोबल मार्केट में तेल और गैस की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है. पिछले साल के मुकाबले इस रास्ते से होने वाला ट्रैफिक 94% तक गिर गया है. ब्रिटेन ने करीब 35 देशों के साथ मिलकर इस रास्ते को फिर से सेफ करने पर चर्चा की है, लेकिन फिलहाल कोई भी देश वॉर के बीच बलपूर्वक इस रास्ते को खोलने का जोखिम नहीं उठाना चाहता. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने तो मिलिट्री ऑपरेशन के जरिए इसे खोलने को अनरीयल बता दिया.
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अमेरिकी पहरा
अमेरिकी नौसेना ने अपने सबसे बड़े विमानवाहक पोत ‘यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड’ को क्रोएशिया से रवाना कर दिया है. ये पोत जून 2025 से तैनात है और अमेरिकी इतिहास के सबसे लंबे मिशनों में से एक पर है. अगर ये मिडल ईस्ट की तरफ बढ़ता है, तो इसे लाल सागर में यमन के हूतियों के हमलों का सामना करना पड़ सकता है. इसके अलावा, ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ और ‘यूएसएस जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश’ भी इस जगह अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं.
आपकी जेब पर असर
इस लड़ाई का सीधा असर अब आपकी और हमारी जेब पर दिखने लगा है. ट्रंप के भाषण के बाद अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 111.54 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो फरवरी के मुकाबले लगभग 50% ज्यादा है. तेल महंगा होने का मतलब है पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ना, जिससे न सिर्फ ट्रेवल महंगा होगा बल्कि खाने-पीने की चीजों और बाकी जरूरी सामानों की कीमतों में भी भारी उछाल आ सकता है. वहीं, शेयर मार्केट में पहले से ही इस लड़ाई का असर दिख रहा है.
नुकसान का आंकड़ा
मिडिल ईस्ट वॉर की कीमत इंसानी जानों से चुकानी पड़ रही है. अब तक ईरान में 1,900 से ज्यादा और लेबनान में 1,300 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं. इजराइल में भी सैनिकों और नागरिकों की मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है. लेबनान में तो 10 लाख से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं. दुनिया भर के डिप्लोमैट इस कोशिश में हैं कि किसी तरह ये आग थमे, लेकिन फिलहाल तो बारूद की गंध और बढ़ती महंगाई ही फ्यूचर की तस्वीर पेश कर रही है.
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