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Share Market: लगता है शेयर मार्केट इन्वेस्टर्स का संडे बिगाड़कर ही मानेगी. दरअसल, शुक्रवार को शेयर मार्केट ने खुलते ही लोगों को बड़ा झटका दे दिया. ऐसे में आप भी जान लें बाज़ार का हाल.
13 मार्च, 2026
अगर आप आज सुबह अपनी चाय की चुस्की के साथ अपना पोर्टफोलियो देखने बैठे हैं, तो शायद चाय का स्वाद थोड़ा कड़वा लग सकता है. दरअसल, भारतीय शेयर मार्केट में आज फिर से मातम का माहौल है. सेंसेक्स और निफ्टी लगातार तीसरे दिन लाल निशान में गोते लगा रहे हैं. आलम ये है कि बाजार खुलते ही इन्वेस्टर्स के करोड़ों रुपये स्वाहा हो गए. ऐसे में अगर आप भी यही सोच रहे हैं कि आखिर दलाल स्ट्रीट पर ये खलबली क्यों मची है और इसका आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा, तो जवाब हम लाए हैं.
बाजार का हाल
शुक्रवार की सुबह भारतीय मार्केट के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रही. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स करीब 600 अंक टूटकर 75,434 पर आ गया. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 182 अंकों की गिरावट के साथ 23,457 के लेवल पर फिसल गया. शेयर मार्केट की हालत का अंदाजा इस बात से लगाइए कि हर तीन गिरने वाले शेयर्स के मुकाबले सिर्फ दो शेयर ही बढ़त बना पा रहे थे. यानी चारों तरफ बिकवाली का ही शोर है.
कच्चा तेल बना विलेन
शेयर मार्केट की इस पूरी गिरावट के पीछे सबसे बड़ा हाथ कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल का है. ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया भर की धड़कनें बढ़ा दी हैं. ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई के कड़े बयानों ने आग में घी डालने का काम किया है. उन्होंने क्लियर कर दिया है कि ईरान पीछे नहीं हटने वाला और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज, जहां से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, उसे हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाएगा. यही वजह है कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के लेवल को छू रही हैं. वैसे भी, जब तेल महंगा होता है, तो भारत जैसे देशों के लिए मुसीबत बढ़ जाती है, क्योंकि हम अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल इम्पोर्ट करते हैं. इससे महंगाई बढ़ने का डर सताने लगता है, जो सीधे तौर पर शेयर बाजार के सेंटिमेंट को बिगाड़ता है.
ग्लोबल मार्केट का हाल
भारतीय बाजार अकेला नहीं रो रहा है, बल्कि पूरी दुनिया का यही हाल है. अमेरिकी मार्केट यानी वॉल स्ट्रीट पर कल भारी गिरावट देखी गई. डाओ जोंस 700 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि नैस्डैक और एसएंडपी 500 में भी 1.5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट रही. अमेरिका की इस मंदी का असर आज सुबह एशियाई बाजारों पर भी दिखा. जापान का निक्केई 1 प्रतिशत से ज्यादा गिरा, तो साउथ कोरिया का कॉस्पी भी डेढ़ प्रतिशत के करीब लुढ़क गया. जब दुनिया के बड़े बाजारों में हलचल होती है, तो फॉरेन इन्वेस्टर्स यानी FII अपना पैसा सेफ निकालने लगते हैं, जिसका खामियाजा रीटेल इन्वेस्टर्स को भुगतना पड़ता है.
किसने बचाई लाज
आज शेयर मार्केट में सबसे ज्यादा मार आईटी और बैंकिंग सेक्टर पर पड़ी है. एचडीएफसी बैंक करीब 1.7 प्रतिशत टूटकर सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वाला शेयर बना. इसके अलावा एलएंडटी, टाटा स्टील, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसे दिग्गजों में भी 1 से 1.6 प्रतिशत की गिरावट देखी गई. हालांकि, इस अंधेरे में कुछ चिराग जल भी रहे थे. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का फायदा रिलायंस इंडस्ट्रीज, कोल इंडिया और एनटीपीसी जैसे एनर्जी शेयरों को मिला. ये शेयर हरे निशान में ट्रेड कर रहे थे, जिससे बाजार को थोड़ा सहारा मिला.
रुपये की हालत
बाजार की इस उठापटक के बीच भारतीय रुपया भी कमजोर पड़ गया है. ये डॉलर के मुकाबले 92.35 के लेवल पर खुला, जो पिछली क्लोज़िंग से काफी नीचे है. इसके अलावा, इंडिया विक्स, जिसे हम ‘फियर गेज’ का पैमाना कहते हैं, उसमें भी बढ़त देखी गई है. इसका मतलब है कि इन्वेस्टर्स डर में हैं. ऐसे में मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले कुछ दिन काफी उतार-चढ़ाव वाले हो सकते हैं. सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि मिडिल ईस्ट में वॉर क्या मोड़ लेती है. अगर कच्चा तेल और महंगा होता है, तो शेयर मार्केट में और गिरावट देखी जा सकती है. फिलहाल इन्वेस्टर्स के लिए यही सलाह है कि वो जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला न लें.
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