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National Herald Case: दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर सुनवाई 20 अप्रैल तक के लिए टाल दी है.
नेशनल हेराल्ड केस: दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार (9 मार्च) को नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर सुनवाई 20 अप्रैल तक के लिए टाल दी है. ED ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया गया था. न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने स्पष्ट किया कि अदालत सोमवार को मामले की सुनवाई करने में असमर्थ है. ED की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अगली सुनवाई के लिए जल्द की तारीख मांगी थी. इससे पहले 22 दिसंबर 2025 को हाई कोर्ट ने गांधी परिवार, सैम पित्रोदा और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. विवाद का मुख्य बिंदु ट्रायल कोर्ट का वह फैसला है जिसमें कहा गया था कि बिना FIR के ED की शिकायत पर संज्ञान लेना कानूनन मान्य नहीं है.
मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप
ED का तर्क है कि निजी शिकायत पर आधारित मामले में भी कार्रवाई की जा सकती है. ईडी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ-साथ दिवंगत कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस के साथ-साथ सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और एक निजी कंपनी यंग इंडियन पर साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया है. यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) से संबंधित लगभग 2,000 करोड़ रुपये की संपत्ति हासिल की, जो नेशनल हेराल्ड अखबार प्रकाशित करती है. ईडी ने आरोप लगाया कि गांधी परिवार के पास यंग इंडियन के अधिकांश 76 प्रतिशत शेयर थे, जिन्होंने 90 करोड़ रुपये के ऋण के बदले में धोखाधड़ी से AJL की संपत्ति हड़प ली.
ED ने कोर्ट में बताई अपराध की गंभीरता
19 फरवरी को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ईडी के लिए पेश हुए और तर्क दिया कि मामला कानून के साफ-सुथरे प्रश्न से संबंधित है और ट्रायल कोर्ट द्वारा संज्ञान लेने से इनकार करने के लिए दिए गए कारण अस्पष्ट थे. उन्होंने कहा कि मामले में तथ्यों पर नहीं बल्कि कानून के आधार पर बहस की जानी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि एजेंसी की जांच एक निजी शिकायत से शुरू हुई, न कि एफआईआर से. दिल्ली हाईकोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नेशनल हेराल्ड मामले में गांधी परिवार के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच जारी रखने की अपील की है. निचली अदालत ने यह कहते हुए संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था कि ED की कार्रवाई सुब्रमण्यम स्वामी की निजी शिकायत पर आधारित है, न कि CBI या पुलिस की FIR पर. ED ने तर्क दिया कि कोर्ट का यह फैसला मनी लॉन्ड्रिंग करने वालों को ‘हॉल पास’ देने जैसा है. एजेंसी ने तर्क दिया कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए इसे केवल तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि जांच किसी निजी व्यक्ति की शिकायत से शुरू हुई थी.
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