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बगलामुखी मंदिर में दान पर बवाल

by Live India
Baglamukhi Temple Donation

Baglamukhi Temple Donation: अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान चोरी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि मध्य प्रदेश के आगर मालवा से एक और बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है. विश्वप्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर आते हैं, अब वहां के चढ़ावे और दान को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. मंदिर के रजत सौंदर्यीकरण के नाम पर आए नकद, सोने और चांदी के दान में भारी वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे हैं. मामला इतना गंभीर हो चुका है कि खुद जिला प्रशासन को दखल देना पड़ा है.

तीन स्तरीय जांच समिती का गठन

आरोप है कि मंदिर के शासकीय प्रबंधन को दरकिनार करके एक गैर-शासकीय समिति ने श्रद्धालुओं से सीधे नकद, सोना और चांदी का दान लिया. इतना ही नहीं, इस चढ़ावे को सरकारी खातों के बजाय निजी बैंक खातों में जमा करने और उसके उपयोग में भारी गड़बड़ी की बात सामने आई है. मामला सामने आते ही आगर मालवा की कलेक्टर प्रीति यादव ने तत्परता दिखाते हुए एक त्रि-स्तरीय संयुक्त जांच दल का गठन कर दिया है. जिला पंचायत सीईओ बीएस सोलंकी को इस जांच दल का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि जिला कोषालय अधिकारी मनीष सोलंकी और नलखेड़ा नगर परिषद की सीएमओ मिनी अग्रवाल को सदस्य नियुक्त किया गया है.

जांच समिति को मिले स्पष्ट निर्देश

  • क्या मंदिर परिसर में अधिकृत व्यवस्था से अलग समानांतर दान संग्रह चल रहा था.
  • श्रद्धालुओं से मिले नकद, सोने और चांदी का वास्तविक रिकॉर्ड कहां है.
  • संबंधित निजी और सरकारी बैंक खातों और अभिलेखों की क्या स्थिति है.
  • इस पूरे मामले में किस अधिकारी, कर्मचारी या मंदिर प्रबंधन की जवाबदेही बनती है.
  • इस समिति को मात्र 7 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपनी है.

विपक्ष ने घेरा

अब यह मामला सिर्फ प्रशासनिक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इस पर मध्य प्रदेश की सियासत भी पूरी तरह गरमा गई है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को लेकर सूबे की भाजपा सरकार पर करारा हमला बोला है. सिंघार ने ट्वीट कर सरकार को घेरते हुए कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे पर डकैती और महाकाल के घर में जमीनों पर कब्जे के बाद, अब मां बगलामुखी मंदिर में भी भक्तों को ठगने के आरोप लग रहे हैं. उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि हिंदू आस्था चुनावी मंचों पर नहीं, बल्कि मंदिरों की ईमानदार और पारदर्शी व्यवस्था से सुरक्षित होती है.

वित्तीय जानकारी सावर्जनिक करने की मांग

उमंग सिंघार ने मांग की है कि मां बगलामुखी के भक्तों की आस्था से जुड़े हर रुपये और हर आभूषण का हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए और दोषियों पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए. अब गेंद प्रशासन के पाले में है. जांच दल तत्काल मंदिर परिसर का निरीक्षण कर दस्तावेज खंगालने और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करने में जुट गया है. 7 दिनों के भीतर आने वाली यह जांच रिपोर्ट तय करेगी कि मां बगलामुखी के दरबार में आस्था के नाम पर कितनी बड़ी हेराफेरी हुई है और इसके पीछे असली चेहरे कौन से हैं.

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समाचार स्रोत: पीटीआई

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