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आम दिवस 2026: भारत में आम सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि बचपन की अनगिनत यादों का हिस्सा है. गर्मियों की छुट्टियां, दादी-नानी का घर, पेड़ों से तोड़े गए ताजे आम और घर में बनने वाले आम के व्यंजन आज भी लोगों के चेहरे पर मुस्कान ले आते हैं. यही वजह है कि मैंगो डे हर साल ‘फलों के राजा’ के लिए लोगों के प्यार और उससे जुड़ी खूबसूरत यादों का जश्न मनाने का खास मौका बन जाता है. इस खास मौके पर आम से जुड़ी ऐसी 10 यादें लेकर आए हैं, जो लगभग हर भारतीय के बचपन का हिस्सा रही हैं.
गर्मियों की छुट्टियां
गर्मियों की छुट्टियों का मतलब होता था दादी-नानी के घर जाना और वहां पेड़ों से तोड़े गए ताजे आम खाना. परिवार के साथ बैठकर आम खाना और कहानियां सुनना आज भी सबसे प्यारी यादों में शामिल है.

आम के पेड़
कई बच्चों के लिए आम खरीदने से पहले उसे पेड़ से तोड़ने का मजा ही अलग था. हरे पत्तों के बीच छिपे पके आम ढूंढना किसी छोटे से खजाने को ढूंढ़ने जैसा लगता था.
कच्चा आम
हल्की खटास वाला कच्चा आम और उस पर नमक के साथ लाल मिर्च का स्वाद शायद ही कोई भूल पाए. गर्मियों की छुट्टियों में ये छोटा और चटपटा स्नैक बच्चों और बड़ों, दोनों का पसंदीदा हुआ करता था.
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आम पन्ना
भीषण गर्मी में घर का बना आम पन्ना राहत देने वाली सबसे खास ड्रिंक मानी जाती थी. कच्चे आम, मसालों और पुदीने से तैयार ये ड्रिंक आज भी गर्मियों की पहचान है.
अमरस
कई भारतीय परिवारों में आम का मौसम आमरस और गर्मागर्म पूरी के बिना अधूरा माना जाता है. छुट्टियों के दौरान पूरा परिवार साथ बैठकर इस स्वाद का आनंद लेता था.
आम का अचार
गर्मियों की शुरुआत होते ही घरों में आम का अचार बनने की तैयारियां शुरू हो जाती थीं. बड़े-बड़े मर्तबानों में अचार डालते हुए घर की महिलाओं को देखना और उसकी खुशबू पूरे घर में फैल जाना बचपन की खूबसूरत याद है.
टिफिन में आम
स्कूल के दिनों में टिफिन में रखे आम के टुकड़े चेहरे पर प्यारी मुस्कान ला देते थे. उन टुकड़ों को दोस्तों के साथ बांटना दोस्ती को और भी खास बना देता था. कई बार एक आम की फांक पूरे ग्रुप के बीच खुशी बांट देती थी.

ठंडा मैंगो जूस
क्रिकेट, कबड्डी या साइकिल चलाने के बाद ठंडा मैंगो जूस पीना किसी इनाम से कम नहीं लगता था. ये छोटी सी खुशी गर्मियों को और भी यादगार बना देती थी.
आम के ठेले
गर्मियां आते ही सड़कों और बाजारों में रंग बिरंगे आमों से सजे ठेले दिखाई देने लगते थे. परिवार के साथ बाजार जाकर पसंदीदा आम चुनना भी मौसम का खास हिस्सा होता था. फिर घर जाकर बड़े प्यार से पका हुआ आम काटा जाता था. तब बच्चे बेसब्री से अपनी बारी का इंतजार करते थे.
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