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मार्च में गुड़गांव देश का सबसे प्रदूषित शहर

by Live India
मार्च में गुड़गांव देश का सबसे प्रदूषित शहर

Air Pollution: मार्च महीने में गुड़गांव भारत का सबसे प्रदूषित शहर रहा. चिंताजनक बात यह है कि देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से चार अकेले हरियाणा से हैं.

वायु प्रदूषण: मार्च महीने में गुड़गांव भारत का सबसे प्रदूषित शहर रहा. चिंताजनक बात यह है कि देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से चार अकेले हरियाणा (गुड़गांव, बहादुरगढ़, फरीदाबाद और मानेसर) से हैं. जबकि पूरे वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए गाजियाबाद को सबसे प्रदूषित शहर घोषित किया गया है. मार्च की टॉप-10 सूची में सिंगरौली, मंडीदीप, भिवाड़ी, नोएडा और नंदेसरी जैसे शहर भी शामिल हैं. यह चौंकाने वाला खुलासा सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कई शहरों में प्रदूषण का स्तर काफी अधिक बना हुआ है, जिससे लोगों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो रही हैं.

प्रदूषित शहरों में से चार हरियाणा के

मार्च में गुड़गांव भारत का सबसे प्रदूषित शहर था, जिसका मासिक औसत PM2.5 116 μg/m3 था. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के शीर्ष 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से चार हरियाणा के थे. इसके बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के दो-दो शहर और राजस्थान व गुजरात का एक-एक शहर था. भारत के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के सात वर्षों के कार्यान्वयन के बाद आए हालिया विश्लेषण ने देश के विभिन्न शहरों में वायु गुणवत्ता की एक मिश्रित तस्वीर पेश की है.

सुधार में उत्तर प्रदेश सबसे आगे

रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2017-18 को आधार मानकर किए गए मूल्यांकन में पाया गया कि केवल कुछ चुनिंदा शहर ही PM10 में कटौती के लक्ष्यों को पूरा कर पाए हैं. सुधार के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा है, जहां के नौ शहरों ने PM10 के स्तर में 40 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की है. उत्तराखंड के देहरादून ने देश भर में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है, जहां प्रदूषण के स्तर में रिकॉर्ड 75 प्रतिशत की गिरावट देखी गई. इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों के कुछ शहरों ने भी सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं. राजधानी दिल्ली में इस अवधि के दौरान 17 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. वहीं दूसरी ओर, कई शहरों में स्थिति और खराब हुई है.

स्वास्थ्य पर गंभीर संकट के संकेत

ओडिशा के पांच शहरों सहित मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में प्रदूषण के स्तर में वृद्धि देखी गई है. विशाखापत्तनम में सबसे चिंताजनक स्थिति रही, जहां PM10 के स्तर में 73 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह विश्लेषण स्पष्ट करता है कि जहां कुछ क्षेत्रों में प्रभावी कदम उठाए गए हैं, वहीं कई औद्योगिक केंद्रों में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए अभी और कड़े प्रयासों की आवश्यकता है. सीआरईए के विश्लेषक मनोज कुमार ने कहा कि कई शहर अभी भी संशोधित NCAP लक्ष्यों को पूरा करने से दूर हैं. कुछ शहरों में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ रहा है, जो एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता का विषय है.

समाचार स्रोत: पीटीआई

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