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Middle East Tensions : मिडिल ईस्ट में भारी तनाव के बीच विदेश मंत्री ने राज्यसभा को हर घटना से अवगत कराया. उन्होंने कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता है कि भारतीय की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए.
मध्य पूर्व तनाव: ईरान और इजरायल के बीच जारी जंग के कारण मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है. इसको लेकर भारत में भी काफी हंगामा मचा हुआ है और इसी बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि हिंद महासागर में ईरान के तीन जहाज मौजूद थे, जिसमें एक को हमने शरण दी. उन्होंने यह भी बताया कि हमने दो भारतीय नाविकों को खो दिया है और एक लापता है. इसके अलावा संकट को लेकर जयशंकर ने बताया कि 14 जनवरी को दूसरी एडवाइजरी जारी की गई थी, जिसमें भारतीयों को खाड़ी देशों में यात्रा से बचने की सलाह दी गई. साथ ही मुंबई के शिपिंग महानिदेशालय ने भी 14 जनवरी को भारतीय नाविकों के लिए अपनी एडवाइजरी जारी की जिसमें उनसे एम्बेसी की एडवाइजरी मानने और जहाजों की गैर-जरूरी आवाजाही से बचने के लिए कहा गया था.
स्टूडेंट्स को किया गया शिफ्ट
भारतीय दूतावास ने तेहरान में कई भारतीय छात्रों को बाहर की जगहों पर शिफ्ट करने में मदद की. साथ ही ईरान में व्यापार के सिलसिले में आए इंडियन नागरिकों को आर्मोनिया पार करके भारत में लौटने में मदद की गई. जयशंकर ने कहा कि तेहरान में हमारा दूतावास पूरी तरह से काम कर रहा है और इस वक्त सक्रिय है. विदेश मंत्री ने कहा कि हम भारतीय समुदाय को हर संभव मदद करने की कोशिश कर रहे हैं और निकालने के लिए भी दूसरे रास्तों की तलाश कर रहे हैं.
कई इलाके में स्थिति हुई खराब
विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि हालात की गंभीरता को देखते हुए 1 मार्च को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट कमिटी ऑफ सिक्योरिटी (CCS) की मीटिंग हुई. इस दौरान ईरान में एयरस्ट्राइक और उसके बाद कई खाड़ी देशों में हुए हमलों के बारे में जानकारी दी गई. CCS इस इलाके में भारतीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंतित थी. उन्होंने यह भी कहा कि विवाद लगातार बढ़ रहा है और इस इलाके में स्थिति काफी खराब हो गई है. हमने देखा है कि असल में यह विवाद दूसरे देशों में भी फैल गया है और तबाही और आतंक बढ़ रहा है. पूरे इलाके में आम जिंदगी और आर्थिक गतिविधियां साफ तौर पर प्रभावित हुई हैं और कुछ मामलों में रुक गई हैं.
सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा
भारत का मानना है कि बातचीत और डिप्लोमेसी के माध्यम से सभी विवादों को सुलझाया जाना चाहिए. दुनिया में शांति और सुरक्षा पर बुरा असर देखने को मिल रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दामों में भी भारी वृद्धि हुई है और इसका असर घरेलू स्तर पर भी देखने को मिलना लगा है. जयशंकर ने कहा कि सुरक्षा पर असर डालने वाली यह घटना बहुत परेशान करने वाली है और यह विवाद भारत के लिए भी खास चिंता का विषय है. उन्होंने आगे कहा कि हम एक पड़ोसी इलाका हैं और यह साफ है कि वेस्ट एशिया स्थिर और शांतिपूर्ण बना रहे, जिसमें हमारी हिस्सेदारी है. खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं.
इंफ्रास्ट्रक्चर को हुआ भारी नुकसान
राज्यसभा को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि मैं इस सदन को पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों से अवगत कराना चाहता हूं, जो हम सभी के लिए गहरी चिंता का कारण हैं. जैसा कि माननीय सदस्य जानते हैं, संघर्ष का यह दौर 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था. इसमें न केवल एक तरफ इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका और दूसरी तरफ ईरान के बीच लड़ाई हुई है, बल्कि कई खाड़ी देशों पर हमले भी हुए हैं. ईरान में लीडरशिप लेवल पर कई लोग मारे गए हैं और इस क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर भी नष्ट हुआ है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि हम अब भी मानते हैं कि तनाव कम करने और अंदरूनी मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी को आगे बढ़ाया जाना चाहिए.
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समाचार स्रोत: पीटीआई
