3
Delhi Politics : राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाए जाने के बाद दिल्ली की सियासत में भूचाल आ गया है. एक तरफ जहां चड्ढा ने कहा कि खामोश नहीं किया है, हराया नहीं.
दिल्ली की राजनीति: राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाने पर शुक्रवार को प्रतिक्रिया दी है और अब दिल्ली की राजनीति में घमासान मच गया. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया और कहा कि मुझे खामोश किया गया, लेकिन में हारा नहीं हूं. जैसे ही ये वीडियो सामने आया राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई कि क्या राघव अब आम आदमी पार्टी के साथ बने रहेंगे या फिर पार्टी से किनारा कर लेंगे. इस पर AAP ने उन पर संसद में केंद्र के खिलाफ मुद्दे उठाने से कतराने और इसके बजाय ‘नरम PR’ में लगे रहने का आरोप लगाया.
खामोशी को हार न समझें : चड्ढा
राघव ने दिन की शुरुआत में एक्स पर एक वीडियो पोस्ट करके कहा कि उनकी अपनी ही पार्टी ने उन्हें संसद में बोलने से रोकने की कोशिश की थी. उन्होंने कहा कि मैं उन लोगों से कहना चाहूंगा कि जिन्होंने मेरा संसद में बोलने का अधिकार छीन लिया है, लेकिन वे मेरी खामोशी को मेरी हार न समझें. उन्होंने आगे कहा कि मैं एक ऐसी नदी हूं जो समय आने पर बाढ़ का रूप ले सकती है. राज्यसभा सदस्य ने कहा कि जब भी उन्हें मौका मिला, उन्होंने संसद में जनता से जुड़े मुद्दे उठाए जिनको ज्यादातर नजरअंदाज कर दिया जाता है. साथ ही पूछा कि क्या लोगों की समस्याओं को उठाना कोई अपराध है? चड्ढा ने कहा कि मैंने संसद के पटल पर हवाई अड्डों पर महंगा खाना, फूड डिलीवरी राइडर्स को होने वाली समस्याएं, खाने में मिलावट, टोल प्लाजा के शुल्क, मोबाइल डेटा की समय सीमा समाप्त होना, मध्यम वर्ग पर लगने वाले टैक्स और अन्य मुद्दे उठाए.
कई गंभीर मुद्दों पर सवाल नहीं उठाए
इस वीडियो के बाद पार्टी के नेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि हाल के महीनों में सरकार उन लोगों पर सख्ती बरत रही है जो उसकी नीतियों पर सवाल खड़ा कर रहे हैं. आलोचकों के सोशल मीडिया अकाउंट सस्पेंड होने और FIR जैसी कार्रवाईयों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने दावा किया कि सरकार को संसद में सॉफ्ट पीआर या हवाई अड्डे की कैंटीन में समोसे के बारे में बात करने की कोई परवाह नहीं है, जबकि इससे कहीं ज्यादा बड़े मुद्दे दांव पर लगे हैं.
राघव विदेश में जाकर छिप गए
उन्होंने कहा कि विपक्ष ने संसद में वॉकआउट किया, तो राघव चड्ढा विदेश में जाकर छिप गए. भारद्वाज ने यह भी कहा कि आपने पंजाब के भी मुद्दे नहीं उठाए जहां से आप चुनकर आए हैं. साथ ही दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया तो आप विदेश में जाकर छिप गए. आपको बताते चलें कि चड्ढा ने हवाई अड्डों पर खाने-पीने की चीजों की ज्यादा कीमतों को लेकर संसद में सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद उड़ान यात्री कैफे में 20 रुपये का समोसा और 10 रुपये की चाय मिलने लगी. सौरभ ने यह भी बताया कि जहां एक तरफ विपक्षी पार्टियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर महाभियोग चलाने का प्रस्ताव पेश किया था, उस पर दस्तखत नहीं किए और विपक्ष के कुछ वॉकआउट में भी हिस्सा नहीं लिया.
कैंटीन में समोसे का मुद्दा उठाया
इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पार्टी में संसदीय बोर्ड के नेता समय-समय पर बदलते रहते हैं और यह सामान्य प्रक्रिया है. उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि साल 2014 से 2019 के बीच उन्होंने भी डॉ. धर्मवीर गांधी की जगह ली थी. मान ने कहा कि पश्चिम बंगाल में मतदाताओं के नाम गलत तरीके हटाने का मुद्दा हो या गुजरात में AAP के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का, लेकिन राघव चड्ढा ने इन मुद्दों की बजाय संसद की कैंटीन में समोसे महंगे होने और पिज्जा की डिलीवरी में देरी का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि वह कम्प्रोमाइज्ड हैं.
यह भी पढ़ें- तमिलनाडु चुनाव के लिए BJP ने जारी की उम्मीदवारों की लिस्ट, 27 नामों का किया ऐलान; देखें सूची
समाचार स्रोत: पीटीआई
