Home Latest News & Updates लखनऊ में सिलेंडर की कमी, हाहाकार

लखनऊ में सिलेंडर की कमी, हाहाकार

by Live India
मिडिल-ईस्ट तनाव: लखनऊ में सुबह 4 बजे से कतार फिर भी हाथ खाली, रसोई से बाजार तक हाहाकार, सिलेंडर की कमी से दुकानों पर लटके ताले

Gas Cylinder Shortage: मिडिल-ईस्ट तनाव का असर यूपी की राजधानी लखनऊ में दिखने लगा है. गैस सिलेंडर की किल्लत ने आम आदमी की रसोई से लेकर शहर के बाजार तक हाहाकार मचा दिया है.

  • लखनऊ से भरत सेठी की रिपोर्ट

गैस सिलेंडर की कमी: मिडिल-ईस्ट तनाव का असर यूपी की राजधानी लखनऊ में दिखने लगा है. गैस सिलेंडर की किल्लत ने आम आदमी की रसोई से लेकर शहर के बाजार तक हाहाकार मचा दिया है. एक तरफ घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर दोनों की आपूर्ति प्रभावित है, तो दूसरी तरफ रसोई गैस की कीमत आसमान छू रही हैं. हालात ऐसे हो गए हैं कि न सिर्फ घरों के चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं बल्कि लखनऊ के मशहूर खान-पान का स्वाद भी फीका पड़ गया है. कबाब-पराठे, छोले-भटूरे, खस्ता-पूरी जैसी मशहूर डिशों की दुकानों में ताले लटकने लगे हैं. सिलेंडर की कमी के चलते अब बाजार में भट्टी की मांग अचानक बढ़ गई है. जो भट्टी पहले 500 रुपये में मिलती थी, उसकी कीमत अब 3 से साढ़े 3 हजार रुपये तक पहुंच गई है. कई होटल और ढाबों में गैस खत्म होने के बाद अब भट्टी से खाना बनाया जा रहा है.

कई दिनों से लगा रहे एजेंसी के चक्कर

लखनऊ में गैस सिलेंडर की किल्लत ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. शहर के कई गैस एजेंसी केंद्रों पर सुबह से ही लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं. कई लोग सुबह चार बजे से लाइन में लग रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सिलेंडर मिलने की कोई गारंटी नहीं है. लोगों का कहना है कि चार-चार और पांच-पांच दिन से लगातार एजेंसी के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है. वहीं दूसरी तरफ गैस कंपनी के कर्मचारियों का दावा है कि स्थिति सामान्य है और सभी उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराई जा रही है. लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है और लोगों का गुस्सा साफ तौर पर देखा जा सकता है. गैस सिलेंडर की कमी का सीधा असर अब बाजार में भी देखने को मिल रहा है. दुकानदारों का कहना है कि सिलेंडर की कमी के कारण अचानक भट्टी की मांग कई गुना बढ़ गई है.

दुकानों पर लटके ताले

दुकानदारों के मुताबिक पहले जहां रोजाना करीब 20 से 30 ऑर्डर आते थे और अब ढाई सौ तीन सौ भट्टियों के ऑर्डर आ रहे है, अब मांग इतनी ज्यादा हो गई है कि उन्हें ऑर्डर लेना भी बंद करना पड़ रहा है. कई दुकानों पर भट्टी देने के लिए 6 से 7 दिन की वेटिंग चल रही है. भट्टी खरीदने पहुंचे ग्राहकों का कहना है कि गैस न मिलने की वजह से होटल और ढाबे बंद होने की कगार पर हैं. परिवार चलाने की मजबूरी के चलते वे किसी भी तरह भट्टी खरीदने की कोशिश कर रहे हैं. गैस सिलेंडर की किल्लत का सबसे बड़ा असर अब लखनऊ के होटल और ढाबों पर पड़ रहा है. कई जगहों पर रसोई के अंदर गैस चूल्हों की जगह अब बाहर भट्टी जलती नजर आ रही है. चारबाग स्थित शुद्ध शाकाहारी लक्ष्मी होटल के बाहर भट्टी पर खाना बनता दिखाई दिया.

लखनऊ के कबाब-पराठे पर संकट

होटल मालिक का कहना है कि बाजार में गैस सिलेंडर ब्लैक में 5 से 6 हजार रुपये तक मिल रहा है, जो उनके लिए खरीद पाना संभव नहीं है. मजबूरी में भट्टी का सहारा लेना पड़ रहा है ताकि किसी तरह होटल का काम चल सके और कर्मचारियों को भी रोजी-रोटी मिलती रहे.लखनऊ के चारबाग इलाके में ही करीब 1200 से 1500 छोटे-बड़े होटल और ढाबे संचालित होते हैं. लेकिन गैस सिलेंडर की किल्लत के कारण इनमें से लगभग आधे होटल बंद हो चुके हैं. कई होटल संचालक अपने कारीगरों को काम न होने के बावजूद बैठाकर पैसा देने को मजबूर हैं. वहीं कई दुकानों पर ताले लटक गए हैं. लखनऊ की पहचान रहे कबाब-पराठे, खस्ता-पूरी और छोले-भटूरे की खुशबू अब धीरे-धीरे गायब होती नजर आ रही है. फिलहाल राजधानी लखनऊ में गैस सिलेंडर का संकट गहराता जा रहा है. घरों की रसोई से लेकर शहर के मशहूर होटल और नाश्ते की दुकानों तक हर जगह गैस की कमी का असर दिखाई दे रहा है.

Related Articles