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India-EU Trade Agreement: भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ऐतिहासिक बताया है.
भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता: प्रधानमंत्री मोदी ने शिखर वार्ता के लिए ईयू प्रमुख और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष की मेजबानी की. भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ऐतिहासिक बताया है. वॉन डेर लेयेन ने कहा कि एक सफल भारत दुनिया को अधिक स्थिर, समृद्ध एवं सुरक्षित बनाता है. नई दिल्ली में बहुप्रतीक्षित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता एक अत्यधिक महत्वपूर्ण समझौता है जिसे ‘मदर ऑफ ऑल द डील्स’ कहा जा रहा है. इससे दोनों देशों के बीच संबंधों की समग्र दिशा में महत्वपूर्ण विस्तार होने की उम्मीद है क्योंकि यह विविध क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खोलेगा.भारत और यूरोपीय संघ 2004 से रणनीतिक साझेदार रहे हैं. अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी (एसडीपी) दोनों पक्षों के बीच रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने में सहायक होगी. उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि इस समझौते के जरिए दो अरब लोगों के लिए एक विशाल मुक्त व्यापार क्षेत्र का निर्माण हुआ है, जिससे दोनों पक्षों को लाभ होगा. मंगलवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोप और अमेरिका के बीच संबंधों में आई नई दरारों के बीच शिखर वार्ता के लिए यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा का स्वागत किया.
दोनों देशों के बीच खुलेंगे नए अवसर
यूरोपीय आयोग ईयू की स्वतंत्र कार्यकारी शाखा के रूप में कार्य करता है. आयोग कानूनों का प्रस्ताव करने और दैनिक कामकाज के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है. यूरोपीय परिषद एक अलग शीर्ष स्तरीय संस्था है जिसमें यूरोपीय संघ के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होते हैं और यह समग्र राजनीतिक दिशा निर्धारित करती है. बैठक से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि व्यापार समझौते से विनिर्माण क्षेत्र को भारी बढ़ावा मिलेगा क्योंकि मुक्त व्यापार समझौता भारत में निवेश करने के लिए प्रत्येक निवेशक और व्यवसायी के आत्मविश्वास को बढ़ाएगा. कहा कि बहुप्रतीक्षित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता, जिसे ‘सभी समझौतों की जननी’ कहा जा रहा है, से दोनों देशों के बीच संबंधों की समग्र दिशा में महत्वपूर्ण विस्तार होने की उम्मीद है, क्योंकि यह विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खोलेगा. यूरोपीय संघ और भारत ने मुक्त व्यापार समझौते के लिए पहली बार 2007 में बातचीत शुरू की थी, लेकिन महत्वाकांक्षाओं में अंतर के कारण 2013 में वार्ता स्थगित कर दी गई थी. जून 2022 में वार्ता फिर से शुरू की गई.
समृद्धि की दिशा में एक बड़ा कदम
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि वाशिंगटन की व्यापार और सुरक्षा नीतियों के कारण दुनिया में नए भू-राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिल रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय दृष्टिकोण से यह व्यापार समझौता संतुलित और दूरदर्शी है, जो यूरोपीय संघ के साथ भारत के बेहतर आर्थिक एकीकरण में सहायक होगा. इसके अलावा, यह दोनों अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देगा. यूरोपीय संघ वस्तुओं के मामले में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए यूरोपीय संघ के साथ भारत का कुल वस्तु व्यापार लगभग 136 अरब अमेरिकी डॉलर का था, जिसमें निर्यात लगभग 76 अरब अमेरिकी डॉलर और आयात 60 अरब अमेरिकी डॉलर था. अधिकारियों ने बताया कि शिखर सम्मेलन का मुख्य फोकस व्यापार, रक्षा एवं सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने पर होगा. इस समझौते को वैश्विक स्थिरता और समृद्धि की दिशा में एक बड़ा कदम बताया जा रहा है.
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