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टर्म प्लान कैलकुलेटर: आय बढ़ने पर लोग सबसे पहले जश्न मनाते हैं, क्योंकि बेहतर सैलरी से ज्यादा आराम और ज्यादा चॉइस मिलते हैं. आप एक बेहतर घर में जा सकते हैं, होम लोन ले सकते हैं, बच्चे की पढ़ाई को ज़्यादा सीरियसली प्लान कर सकते हैं, माता-पिता को सपोर्ट कर सकते हैं, अपनी लाइफस्टाइल को अपग्रेड कर सकते हैं और खर्चों को थोड़ा और बढ़ा सकते हैं. कुल मिलाकर कहें तो आय बढ़ने पर आपकी जिंदगी थोड़ी आसान हो जाती है. लेकिन इन सब के बीच में लोग अपने टर्म प्लान की जरूरतों को रिव्यू करना भूल जाते हैं.
जब आपकी आय बढ़ती है, तो उस आय के आस-पास बनी फाइनेंशियल लाइफ भी बड़ी हो जाती है. आप पर निर्भर लोग सिर्फ आपकी पुरानी सैलरी पर ही डिपेंड नहीं होते. वे अब नई सैलरी से बनी लाइफस्टाइल, गोल और लायबिलिटी पर भी डिपेंड हो जाते हैं. जो इंश्योरेंस कवर पांच साल पहले ठीक लग रहा था, वह अभी भी एक्टिव हो सकता है, लेकिन वह अब कम पड़ सकता है. एक टर्म प्लान आपके परिवार को तब लाइफ कवर देने के लिए होता है, जब आपको आय नहीं मिलती है. इसलिए सैलरी बढ़ने पर अपने टर्म प्लान को भी रिव्यू करना जरूरी है.
ज्यादा सैलरी, ज्यादा खर्चा
लाइफ इंश्योरेंस का अंदाजा लगाने का एक आम तरीका इनकम रिप्लेसमेंट अप्रोच है. आइडिया काफी सिंपल है. अगर आपका परिवार आपकी कमाई पर निर्भर है, तो कवर ऐसा होना चाहिए, जो भविष्य की आय के एक अच्छे-खासे हिस्से को रिप्लेस कर सके. जैसे-जैसे आपकी सालाना आय बढ़ती है, आपके परिवार के खर्चे भी बढ़ जाते हैं. ऐसे में एक टर्म प्लान कैलकुलेटर आय, उम्र, लायबिलिटीज और जरूरी सपोर्ट को ध्यान में रखकर इसका एक साफ अंदाजा लगाने में मदद कर सकता है.
मान लीजिए आपकी सालाना आय ₹6 लाख थी और अब बढ़कर ₹15 लाख हो गई है. जाहिर है अब आपके परिवार के खर्चे पहले से ज्यादा होंगे. ऐसे में पुराना लाइफ कवर शायद काफी न रहे. इसी वजह से फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स हर सैलरी हाइक के बाद अपने टर्म प्लान को रिव्यू करने की सलाह देते हैं.

कब टर्म कवर बदलने की जरूरत पड़ सकती है?
- सिर्फ सैलरी में बढ़ोतरी ही नहीं, बल्कि जिंदगी के कई दूसरे बड़े बदलाव भी आपकी इंश्योरेंस जरूरतों को बदल सकते हैं.
- आपकी सैलरी बढ़ने से भविष्य के लिए ज्यादा इनकम रिप्लेसमेंट की जरूरत पड़ सकती है.
- होम लोन लेने से परिवार पर कर्ज का बोझ बढ़ जाता है, इसलिए ज्यादा कवर की जरूरत पड़ सकती है.
- बच्चा होने से उसकी पढ़ाई, सेहत और भविष्य के खर्चे भी बढ़ जाते हैं.
- अगर आपके माता-पिता आप पर निर्भर हो जाते हैं, तो आपकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है.
हर परिवार की अलग जरूरत
हर इंसान की आर्थिक हालत अलग होती है, इसलिए एक ही कवर सबके लिए सही नहीं हो सकता. कुछ मामलों में, बड़े निवेश की वजह से एक्स्ट्रा कवर की जरूरत कम हो सकती है, क्योंकि आपके पास पहले से ही काफी संपत्ति मौजूद होती है. आपकी सैलरी का सिर्फ 10 या 15 गुना वाला नियम हमेशा सही नहीं होता. अक्सर कहा जाता है कि टर्म इंश्योरेंस आपकी सालाना आय का 10 से 15 गुना होना चाहिए. यह एक अच्छी शुरुआत हो सकती है, लेकिन यह हर परिवार के लिए जरूरी नहीं है.
उदाहरण के लिए, दो परिवारों के बारे में सोचें. पहले परिवार में कमाने वाला एक ही सदस्य है, होम लोन है और दो छोटे बच्चे हैं. दूसरे परिवार में पति-पत्नी दोनों कमाते हैं, उन पर कोई लोन नहीं है और कोई वित्तीय निर्भरता नहीं है. भले ही दोनों की सालाना आय एक जैसी हो, लेकिन उन्हें अलग-अलग इंश्योरेंस अमाउंट की जरूरत होगी. इसलिए, सिर्फ एक आम नियम पर भरोसा करने के बजाय अपनी असल जरूरतों का अंदाजा लगाना ज्यादा समझदारी वाला कदम है.
सैलरी बढ़ी और बढ़ गए खर्चे
जैसे-जैसे आय बढ़ती है, लोग अपने परिवारों को बेहतर जिंदगी देना चाहते हैं. इसमें कई जरूरी खर्चे शामिल हो सकते हैं, जैसें-
- बेहतर स्कूल और कॉलेज की फीस
- बड़ा घर या ज्यादा EMI
- माता-पिता के मेडिकल और देखभाल का खर्च
- बेहतर हेल्थकेयर सुविधाएं
- घरेलू मदद
- ट्रैवल और परिवार की दूसरी जरूरतें
- भविष्य के लिए बचत
ये सभी खर्चे गलत नहीं हैं. असल में ये एक बेहतर जिंदगी का हिस्सा हैं, लेकिन जैसे-जैसे ये खर्चे बढ़ते हैं, परिवार की पैसे की जरूरतें भी बढ़ती हैं. इसलिए, पुराना इंश्योरेंस कवर समय के साथ कम पड़ सकता है.
टर्म प्लान कैलकुलेटर कैसे मदद करता है?
अगर आपको पक्का नहीं है कि कितना लाइफ कवर काफी है, तो टर्म प्लान कैलकुलेटर एक अच्छी शुरुआत हो सकती है. आपको कुछ जरूरी जानकारी भरनी होगी, जैसे- अभी की सालाना आय, उम्र, मौजूदा लाइफ कवर, होम लोन या दूसरे कर्ज, आपके परिवार में कितने लोग आप पर निर्भर हैं, आपकी बचत, इन्वेस्टमेंट और आपको कितने साल के लिए पॉलिसी चाहिए. इस जानकारी के आधार पर कैलकुलेटर यह अंदाजा लगाता है कि आपको कितना लाइफ कवर खरीदना चाहिए और कितना प्रीमियम हो सकता है. ध्यान रखें कि कैलकुलेट की गई वैल्यू सटीक नहीं होती, लेकिन यह आपको सही दिशा दिखा सकती है.

समीक्षा करते समय किन बातों का ध्यान रखें?
अगर आप अपने टर्म प्लान का समीक्षा कर रहे हैं, तो हमेशा कुछ जरूरी बातों को ध्यान में रखें. सबसे पहले अपनी अभी की आय डालें. बहुत से लोग अपनी पिछली आय के आधार पर कवरेज बनाए रखते हैं, भले ही उनकी कमाई काफी बढ़ गई हो. इसके बाद, अपने सभी बड़े कर्ज जोड़ें. इनमें होम लोन, एजुकेशन लोन या बिजनेस लोन शामिल हो सकते हैं. अब सोचें कि आपके परिवार में कितने लोग आप पर पैसे के मामले में निर्भर हैं और उन्हें कितने सालों तक पैसे की मदद की जरूरत पड़ सकती है.
इसके बाद, अपनी अभी की बचत, निवेश और मौजूदा लाइफ इंश्योरेंस पर विचार करें. अगर आपके पास काफी संपत्ति हैं, तो ज्यादा कवरेज की जरूरत कम हो सकती है. आखिर में होने वाले प्रीमियम को देखें और तय करें कि बढ़ा हुआ कवरेज आपके बजट में आराम से फिट बैठता है या नहीं. आय बढ़ने से बेहतर कवरेज पाना और प्रीमियम देना भी आसान हो जाता है.
आपको अपना टर्म प्लान कब चेक करना चाहिए?
कुछ ऐसे मौके होते हैं जब अपने टर्म प्लान को रिव्यू करना लगभग जरूरी माना जाता है.
- प्रमोशन मिलने या सैलरी में अच्छी बढ़ोतरी होने पर
- शादी के बाद
- बच्चे के जन्म पर
- नया घर खरीदना और होम लोन लेना
- अगर आपके जीवनसाथी की नौकरी चली जाए या वे नौकरी छोड़ दें
- अगर आपके माता-पिता आप पर आर्थिक रूप से निर्भर हो जाएं
- बड़ा निवेश या जमीन खरीदना
इन हालातों में आपकी आर्थिक जिम्मेदारियां बदल जाती हैं, इसलिए अपने जीवन बीमा को फिर से देखना सही रहता है. आखिरी बात यह है कि टर्म इंश्योरेंस का मकसद सिर्फ पॉलिसी खरीदना नहीं है, बल्कि आपके परिवार की आर्थिक सुरक्षा पक्का करना है. आपकी आय, खर्चे, जिम्मेदारियां और भविष्य के प्लान समय के साथ बदलते रहते हैं. इसलिए कभी-कभी पुराना कवर काफी नहीं रह जाता, जबकि कुछ मामलों में वही कवर आज भी सही हो सकता है.
पूरी तस्वीर तभी साफ होगी, जब आप समय-समय पर अपने टर्म प्लान का समीक्षा करेंगे. एक टर्म प्लान कैलकुलेटर इस प्रोसेस को आसान बना सकता है. अपनी अभी की आय, कर्ज, परिवार की जरूरतों, इन्वेस्टमेंट और भविष्य के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर कवर का मूल्यांकन करें. याद रखें, जैसे-जैसे आपकी जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, आपकी फाइनेंशियल सिक्योरिटी उतनी ही मजबूत होनी चाहिए. सही समय पर उठाया गया एक छोड़ा सा कदम आपके परिवार को भविष्य में बड़ी आर्थिक दिक्कतों से बचा सकता है.
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समाचार स्रोत: पीटीआई
