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18 मई, 2026
नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी: बॉलीवुड में हर साल कई चेहरे आते हैं, लेकिन कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो अपनी एक्टिंग से अलग पहचान बना लेते हैं. इंडियन सिनेमा के इतिहास में राज कपूर से लेकर दिलीप कुमार और गुरुदत्त से लेकर धर्मेंद्र तक, कई बेहतरीन स्टार हुए हैं. बाद की जेनेरेशन में भी एक से बढ़कर एक स्टार हुए और अब भी हैं. उन्हीं लाजवाब एक्टर्स की लिस्ट में शामिल है नवाजुद्दीन सिद्दीकी का नाम. बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के सिर्फ अपने टैलेंट और मेहनत के दम पर उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में जगह बनाई. छोटे-छोटे रोल से शुरुआत करने वाले नवाज आज बॉलीवुड ही नहीं, बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर भी अपनी एक्टिंग का लोहा मनवा चुके हैं. 19 मई, 1974 को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के बुधाना कस्बे में पैदा हुए नवाजुद्दीन सिद्दीकी एक जमींदार मुस्लिम फैमिली से हैं. वो 8 भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं. उनका बचपन उत्तराखंड में बीता. सिंपल परिवार में पले-बढ़े नवाज ने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वो दुनियाभर में अपनी एक्टिंग से लोगों के दिलों में बस जाएंगे. लेकिन उस सक्सेस के पीछे का स्ट्रगल बहुत कुछ कहता है.

दिल्ली ने बदली किस्मत
हरिद्वार की गुरुकुल कांगड़ी यूनिवर्सिटी से केमिस्ट्री में बैचलर ऑफ साइंस की पढ़ाई करने के बाद नवाजुद्दीन गुजरात के वडोदरा पहुंचे. वहां उन्होंने एक केमिस्ट के तौर पर काम किया. लेकिन नौकरी में उनका मन नहीं लगा और वो दिल्ली आ गए. दिल्ली आने के बाद उनकी लाइफ ने नया मोड़ लिया. यहां नवाज ने एक प्ले देखा, जिसके बाद वो एक्टिंग की दुनिया की तरफ खिंचे चले गए. एक्टर बनने का सपना लेकर उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा यानी एनएसडी में एडमिशन लेने का फैसला किया. एडमिशन पाने के लिए नवाज ने दोस्तों के साथ कई थिएटर प्ले किए. आखिरकार उन्हें एनएसडी में एंट्री मिल गई. यहीं से उनकी एक्टिंग जर्नी की असली शुरुआत हो गई.
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खुद को समझने लगे मनहूस
‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से पहचान बनाने वाले नवाज ने काफी कम पैसों में गुजारा किया. ऐसा नहीं है कि मुंबई आते ही उन्हें फिल्मों में काम मिलना शुरू हो गया था. घर का किराया और खाने का इंतज़ाम करने के लिए नवाज ने मुंबई में चौकीदार की नौकरी तक की. इसी दौरान वो थिएटर में लगातार काम करते रहे ताकि अपनी एक्टिंग को बेहतर बना सकें. शुरुआत में उनके अंदर काफी जुनून और कॉन्फिडेंस था. लेकिन बार-बार रिजेक्शन की वजह से धीरे-धीरे उनका खुद पर से भरोसा कमजोर पड़ने लगा. नवाजुद्दीन सिद्दीकी को लगने लगा था कि शायद उन्होंने जो सीखा, उसमें ही कोई कमी है. इतना ही नहीं एक टाइम ऐसा भी आया जब वो खुद को मनहूस तक कहने लगे थे. इसके पीछे भी वजह थी. दरअसल, लगभग 10 साल तक हर बड़ा मौका आखिरी टाइम में उनके हाथ से निकल जाता था. ये रिजेक्शन नवाज को अंदर ही अंदर तोड़ रहा था.
तीनों टाइम खाए Parle-G
कभी किसी फिल्म में काम मिलने की खबर आती, तो नवाजुद्दीन सिद्दीकी खुशी-खुशी अपने दोस्तों और फैमिली को प्रोजेक्ट के बारे में बता देते थे. लेकिन शूटिंग शुरू होने से पहले ही उन्हें फिल्म से हटा दिया जाता था. इतना ही नहीं, कई बार तो नवाज को इस बात की जानकारी भी नहीं दी जाती थी कि उन्हें प्रोजेक्ट से बाहर कर दिया गया है. ऐसे हालात में वो सड़क पर खड़े होकर रो पड़ते थे. मजबूरी देखिए कि ऐसे टाइम में भी वो इस बात का ध्यान रखते थे कि कोई उन्हें रोते हुए देख न ले. स्ट्रगल करते-करते नवाजुद्दीन की लाइफ में वो टाइम भी था जब उन्होंने सिर्फ Parle-G बिस्कुट खाकर दिन गुजारे. पूरा दिन सिर्फ यही बिस्कुट, यानी सुबह, दोपहर और रात, तीनों वक्त उनका खाना यही बिस्कुट हुआ करता था. आज भी जब नवाजुद्दीन Parle-G खाते हैं, तो उन्हें दिल्ली और मुंबई में अपने स्ट्रगल वाले दिन याद आ जाते हैं. उस बिस्कुट का स्वाद अब भी उन्हें दर्द और गरीबी की याद दिलाता है.

सीनियर से मांगी मदद
1999 में एनएसडी से ग्रेजुएशन करने के बाद नवाजुद्दीन सिद्दीकी मुंबई पहुंचे. लेकिन यहां आकर फिल्मों में काम मिलना आसान नहीं था. शुरुआत में उन्हें फिल्मों में सिर्फ छोटे-मोटे रोल ही मिले. आमिर खान की फिल्म ‘सरफरोश’ में उन्होंने छोटा सा रोल किया. इसके बाद ‘शूल’, ‘जंगल’ और ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ जैसी बड़ी फिल्मों में भी वो नजर आए, लेकिन नवाज को पहचान नहीं मिली. छोटे-मोटे रोल करते हुए नवाज ने मुंबई में काफी स्ट्रगल किया. कई साल तक उनके पास काम नहीं था. वो चार लोगों के साथ एक छोटे से फ्लैट में रहते थे और एक्टिंग वर्कशॉप लेकर अपना खर्च चलाते थे. एक टाइम ऐसा भी आया जब उनके पास किराया देने तक के पैसे नहीं थे. तब उन्होंने अपने एनएसडी सीनियर से मदद मांगी. सीनियर ने उन्हें अपने घर में रहने दिया, लेकिन बदले में नवाज को खाना बनाना पड़ता था.
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कॉलर पकड़कर निकाला बाहर
आज नवाजुद्दीन सिद्दीकी बॉलीवुड के सबसे दमदार और वर्सटाईल एक्टर्स में गिने जाते हैं, लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर बिल्कुल आसान नहीं था. छोटे-छोटे रोल से शुरुआत करने वाले नवाजुद्दीन ने अपनी लाइफ में कई मुश्किलें झेली हैं. एक इंटरव्यू में एक्टर ने अपने स्ट्रगल के दिनों को याद करते हुए कई चौंकाने वाले खुलासे किए थे. नवाजुद्दीन ने बताया कि स्ट्रगल के दिनों में उन्हें सेट पर कई बार बुरा बर्ताव झेलना पड़ा. ऐसा एक-दो बार नहीं बल्कि हजारों बार हुआ. जब वो स्पॉट बॉय से पानी मांगते थे तो कई बार उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता था. ऐसे में वो खुद जाकर पानी लेते थे. उन्होंने बताया कि कई प्रोडक्शन हाउस खाने के टाइम आर्टिस्ट और क्रू को अलग-अलग रखते थे. जूनियर आर्टिस्ट्स के लिए अलग अरेंजमेंट होता था, सपोर्टिंग एक्टर्स अलग खाते थे और लीड एक्टर्स के लिए अलग जगह होती थी. हालांकि, नवाजुद्दीन ने यशराज फिल्म्स की तारीफ भी की. उन्होंने कहा कि वहां सभी लोग साथ बैठकर खाना खाते थे. इसी इंटरव्यू में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने एक दिलचस्प किस्सा भी शेयर किया. उन्होंने बताया कि कई बार वो लीड एक्टर्स के साथ बैठकर खाना खाने की कोशिश करते थे, लेकिन उन्हें कॉलर से पकड़कर बाहर निकाल दिया जाता था. नवाज को उस टाइम बहुत गुस्सा आता था, क्योंकि उनका मानना था कि हर आर्टिस्ट को रिस्पेक्ट मिलनी चाहिए, फिर चाहे वो छोटा हो या बड़ा.

काम के नहीं मिलते थे पैसे
नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने इंटरव्यू में ये भी बताया कि कभी-कभी कुछ प्रोडक्शन हाउस उन्हें अंदर बैठने की इजाजत दे देते थे. हालांकि, ज्यादातर जगहों पर उन्हें अलग कर दिया जाता था. नवाज का कहना है कि उन्होंने इंडस्ट्री का सबसे मुश्किल दौर देखा है और आज सक्सेस की ऊंचाई भी देख रहे हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने कई फिल्मों में छोटे रोल किए, लेकिन उन्हें काम के पैसे तक नहीं मिले. मनोज बाजपेयी और रवीना टंडन स्टारर फिल्म ‘शूल’ में काम करने के लिए उन्हें 2500 रुपये मिलने थे, लेकिन वो रकम कभी नहीं मिली. हालांकि, उस अमांउट की भरपाई नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अलग तरीके से की. वो कई महीनों तक उस ऑफिस में जाते रहे, जहां उन्हें फ्री में खाना मिल जाता था. स्ट्रगल के उन दिनों में उनके लिए भरपेट खाना मिलना ही उनके लिए बड़ी मदद थी.
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फिल्मफेयर अवॉर्ड
फिल्म ‘द लंचबॉक्स’ के लिए नवाजुद्दीन सिद्दीकी को फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला. इंडिया में लोगों का दिल जीतने वाले नवाज की एक्टिंग को इंटरनेशनल लेवल पर भी काफी पसंद किया गया. उन्होंने ब्रिटिश सीरीज ‘मैकमाफिया’ और भारत की पॉपुलर वेब सीरीज ‘सेक्रेड गेम्स’ में काम किया, जिसे एमी अवॉर्ड के लिए भी नॉमिनेट किया गया था. नवाजुद्दीन सिद्दीकी की खासियत ये है कि वो हर कैरेक्टर में खुद को पूरी तरह ढाल लेते हैं. चाहे गैंगस्टर का रोल हो, जर्नलिस्ट का, पुलिस वाले का या चोर का, वो हर रोल को इतना असली बना देते हैं कि ऑडियन्स पूरी तरह से उससे जुड़ जाती है. खैर, एक टाइम था जब नवाजुद्दीन सिद्दीकी के पास किराया देने और खाने के लिए पैसे नहीं थे, लेकिन आज उनकी गिनती बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन एक्टर्स में होती है. आज वो एक फिल्म में काम करने के लिए करोड़ों रुपये की फीस लेते हैं और मुंबई में अपने खुद के आलीशान बंगले में लग्जरी लाइफ जीते हैं. सिर्फ फिल्में ही नहीं बल्कि वेब सीरीज के लिए भी वो मेकर्स और ऑडियन्स दोनों की पसंद हैं.
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