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होर्मुज से सुरक्षित निकले दो भारतीय टैंकर

by Live India
होर्मुज से सुरक्षित निकले दो भारतीय टैंकर

West Asia Crisis: पश्चिम एशिया संकट के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से दो भारतीय एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन सानवी’ और ‘ग्रीन आशा’ सुरक्षित पार कर चुके हैं.

पश्चिम एशिया संकट: पश्चिम एशिया संकट के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से दो भारतीय एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन सानवी’ और ‘ग्रीन आशा’ सुरक्षित पार कर चुके हैं. इसे मोदी सरकार की बड़ी कूटनीतिक जीत बताई जा रही है. जहाजरानी मंत्रालय ने बताया कि 46,650 टन एलपीजी लेकर ‘ग्रीन सानवी’ 7 अप्रैल को और ‘ग्रीन आशा’ 9 अप्रैल को भारतीय बंदरगाह पहुंचेंगे. उम्मीद जताई जा रही है कि इन टैंकरों के भारत पहुंचने से LPG संकट से राहत मिल सकती है. हालांकि, वर्तमान में 16 अन्य भारतीय जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं, जिनमें कुल 433 नाविक सवार हैं. सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है.

अब भी फंसे हैं 16 जहाज

अधिकारियों का कहना है कि युद्ध के बावजूद भारतीय समुद्री अभियान सुरक्षित और निर्बाध रूप से जारी रखने के प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी में अब भी फंसे 16 जहाजों में से एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) से भरा हुआ है, दो एलपीजी टैंकर हैं (एक भरा हुआ और एक खाली), छह कच्चे मालवाहक जहाज हैं (पांच भरे हुए, एक खाली), तीन कंटेनर जहाज हैं, एक ड्रेजर है, एक रासायनिक माल ले जा रहा है और दो थोक वाहक हैं. ईरान द्वारा जहाजों को जलडमरूमध्य पार करने के लिए शुल्क वसूलने की रिपोर्टों के बारे में पूछे जाने पर जहाजरानी मंत्रालय के अधिकारी मंगल ने कहा कि हमें इस तरह के भुगतान की कोई जानकारी नहीं है.

दूर होगी एलपीजी की कमी

उन्होंने कहा कि देश अपनी रसोई गैस की 60 प्रतिशत जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है. इस आगमन से एलपीजी की कमी को कम करने में मदद मिलेगी. भारत में पिछले साल 33.15 मिलियन टन एलपीजी की खपत हुई, जिसमें मांग का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात का था. इनमें से 90 प्रतिशत आयात पश्चिम एशिया से हुआ. ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले और तेहरान के व्यापक जवाबी कार्रवाई ने जलडमरूमध्य के माध्यम से शिपिंग को लगभग रोक दिया है. हालांकि, ईरान ने कहा है कि सहयोगी देश के जहाज ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय के बाद जलमार्ग को पार कर सकते हैं.

अब तक कई जहाजों के आने से राहत

पिछले सप्ताह दो एलपीजी वाहक बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम लगभग 94,000 टन का संयुक्त एलपीजी कार्गो लेकर इस क्षेत्र से सुरक्षित रूप से गुजरे. जहां BW TYR 31 मार्च को मुंबई पहुंचा, वहीं BW ELM 1 अप्रैल को न्यू मैंगलोर पहुंचा. इससे पहले चार भारतीय ध्वज वाले एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य से गुजरे थे. पाइन गैस और जग वसंत 92,612 टन एलपीजी लेकर 26 मार्च से 28 मार्च के बीच भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचे. एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी लगभग 92,712 टन एलपीजी लेकर 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह और 17 मार्च को राज्य के कांडला बंदरगाह पर पहुंचे थे.

युद्ध शुरू होने पर फंसे थे 28 भारतीय जहाज

मूल रूप से पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने पर होर्मुज के जलडमरूमध्य में 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज थे. इनमें से 24 जलडमरूमध्य के पश्चिम की ओर और चार पूर्व की ओर थे. पश्चिम की ओर से आठ और पूर्व की ओर से दो जहाज सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे हैं. आठ एलपीजी टैंकरों के अलावा भारतीय ध्वज वाले तेल टैंकर जग लाडकी, संयुक्त अरब अमीरात से 80,886 टन कच्चे तेल के साथ 18 मार्च को मुंद्रा पहुंचे. एक अन्य टैंकर जग प्रकाश, जो ओमान से अफ्रीका तक गैसोलीन ले जा रहा था, पहले सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार कर चुका था और तंजानिया के रास्ते में है.

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समाचार स्रोत: पीटीआई

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