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ओडिशा समाचार: ओडिशा के सबसे ज्यादा चर्चित नबरंगपुर हत्याकांड मामले में कोर्ट का फैसला आ गया है. पुरानी रंजिश और अंधविश्वास के चलते हुई क्रूर वारदात में 10 साल बाद सजा सुनाई गई है. नबरंगपुर ज़िले में 2016 में दो गुटों के बीच झड़प हो गई थी और इस घटना में तीन लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद पुलिस ने अपनी जांच के दौरान 19 लोगों को गिरफ्तार किया और फिर उन्हें कोर्ट में पेश कर दिया. वहीं, अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सुनीता पटनायक ने गवाहों और दस्तावेजी सबूतों की जांच करने के बाद सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई.
खेती को लेकर शुरू हुआ था विवाद
यह घटना 16 जुलाई, 2016 को उमरकोट ब्लॉक के बाउंसबेड़ा गांव में सरकारी जमीन पर खेती को लेकर विवाद शुरू हुआ था. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, बाउंसबेड़ा गांव का बलराम हरिजन पास के तेलगांव में सरकारी जमीन के एक टुकड़े पर खेती कर रहा था. आदिवासी ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और वन विभाग से वहां पौधे लगाने का आग्रह किया. आरोप है कि बलराम ने पौधों को उखाड़ दिया, जिसके बाद इलाके में तनाव फैल गया. वहीं, आदिवासी ग्रामीणों का एक ग्रुप बलराम का सामना करने के लिए उसके घर पर चला गया. कहा जा रहा है कि इस दौरान कहासुनी के बाद बलराम ने गुरुबारू भात्रा पर चाकू से हमला कर दिया, जबकि एक अन्य आरोपी गणपति हरिजन ने फागुनू भात्रा का गला रेत दिया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई.
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बलराम की भीड़ ने कर दी हत्या
वहीं, अभियोजन पक्ष ने बताया कि गुरुबारू के गंभीर चोटें भी आई थीं और मृत्यु से पहले अपना बयान दर्ज करने के बाद अस्पताल में दम तोड़ दिया. घटना के बाद कथित तौर पर सैकड़ों आदिवासी ग्रामीणों ने बलराम के घर को घेर लिया. पत्थर फेंके गए और घर में आग लगा दी. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, जब बलराम छत के रास्ते से भागने की कोशिश कर रहा था उस वक्त भीड़ ने कथित तौर पर उन्हें पकड़ लिया और पीट-पीटकर हत्या कर दी.
फैसले के दौरान कोर्ट की बढ़ाई सुरक्षा
सरकारी वकील अशोक कुमार पाढ़ी ने बताया कि पुलिस ने दो अलग-अलग मामला दर्ज कर लिया गया. उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से चल रहे मुकदमे के बाद कोर्ट 19 लोगों को दोषी ठहरा दिया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई. बता दें कि सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपों को खारिज करने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त माना. वहीं, फैसले के दौरान कोर्ट में सुरक्षा को बढ़ा दिया गया था, क्योंकि मामला काफी संवेदनशील था. साथ ही इस फैसले को राज्य में कानून व्यवस्था के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है.
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समाचार स्रोत: पीटीआई
