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संत रविदास के आदर्शों से बनेगा विकसित भारत

by Live India
संत रविदास के आदर्शों से बनेगा विकसित भारत, सामाजिक सद्भाव और समानता का संदेश आज भी प्रेरणादायी

Ravidas Jayanti: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि संत रविदास की सेवा, सामाजिक सद्भाव और समानता का संदेश आज भी समाज को प्रेरित करता है.

Ravidas Jayanti: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि संत रविदास की सेवा, सामाजिक सद्भाव और समानता का संदेश आज भी समाज को प्रेरित करता है. मुख्यमंत्री योगी ने संत रविदास की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और लोगों से संत के आदर्शों को अपनाकर एक सामंजस्यपूर्ण और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि संत रविदास का कर्म द्वारा सेवा, सामाजिक सद्भाव और समानता का संदेश आज भी समाज को प्रेरित करता है. मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास, सबका विश्वास’ की भावना गुरु रविदास जी की शिक्षाओं में निहित है. उन्होंने लोगों से उनके विचारों को अपनाने और एक सामंजस्यपूर्ण और विकसित भारत के निर्माण में भागीदार बनने का आग्रह किया. इस अवसर पर लखनऊ में एक सभा को संबोधित करते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि 649 वर्ष पूर्व संत रविदास जी काशी में अवतरित हुए थे. उन्होंने कहा कि इतनी शताब्दियों के बाद भी समाज उनके दिव्य प्रकाश से प्रकाशित होता रहता है और ‘एक भारत, महान भारत’ के निर्माण की यात्रा में आगे बढ़ता रहता है.

संत ने कर्म साधना में भक्ति को भक्ति में बदल दिया: योगी

उन्होंने कहा कि जब सतगुरु रविदास जी महाराज इस पवित्र पृथ्वी पर अवतरित हुए, तब गुलामी का युग था. विदेशी आक्रमणकारियों के कारण देश भय और आतंक से ग्रस्त था. फिर भी, उस समय भी उन्होंने आध्यात्मिक साधना की पवित्रता को कायम रखा और भक्ति को कर्म साधना में परिवर्तित किया. उन्होंने कहा कि उन्होंने वैष्णव परंपरा के अनुसार प्रत्येक नागरिक को सिखाया कि पूजा और जीवन कर्म की प्रधानता, मन की पवित्रता और जन कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता पर केंद्रित होना चाहिए. उनका स्पष्ट संदेश था कि प्रत्येक व्यक्ति को समाज के कल्याण के लिए स्वयं को समर्पित करना चाहिए. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भी विभिन्न सरकारों ने उनके आदर्शों की उपेक्षा की, लेकिन जब 2014 में मोदी सरकार का गठन हुआ, तो उसने इन्हीं शिक्षाओं से प्रेरित होकर निर्णायक कदम उठाए. उन्होंने कहा कि प्रत्येक गरीब परिवार के लिए बैंक खाते खोले गए ताकि सरकारी लाभ सीधे हस्तांतरित किए जा सकें. हर घर में शौचालय बनवाए गए. आवास उपलब्ध कराया गया ताकि प्रत्येक गरीब व्यक्ति सम्मान के साथ जीवन यापन कर सके. एलपीजी कनेक्शन दिए गए ताकि रसोईघर धुआं रहित हो सकें. यह सब संत रविदास जी महाराज की प्रेरणा को दर्शाता है.

सरकार करा रही धार्मिक स्थलों का विकास

उन्होंने याद दिलाया कि 2017 से पहले वाराणसी में संत रविदास के पवित्र जन्मस्थान तक कोई अच्छी सड़क नहीं थी, जबकि आज लगभग दो लाख श्रद्धालु वाहनों से पहुंचते हैं. उन्होंने आगे बताया कि एक बड़ा भूमि विवाद अदालतों के माध्यम से सुलझाया गया, उससे प्राप्त राशि का उपयोग गरीबों के कल्याण के लिए किया गया और कार्यक्रमों के आयोजन के लिए संत रविदास जी महाराज के नाम पर भूमि खरीदी गई. उनका जन्मस्थान अब एक भव्य आध्यात्मिक धाम का रूप ले चुका है. यह केवल एक नारा नहीं था. आदित्यनाथ ने कहा कि यह हकीकत बन गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य भर में, जहां कहीं भी सनातन धर्म से जुड़े पवित्र स्थल हैं – चाहे वह महर्षि वाल्मीकि का लालपुर हो, संत तुलसीदास जी का राजपुर हो, चित्रकूट हो, विंध्यवासिनी धाम हो, अयोध्या धाम हो, नैमिषारण्य हो, सूक्तिर्थ हो, मथुरा-वृंदावन हो या भगवान बुद्ध से जुड़ा बौद्ध क्षेत्र हो – सरकार बिना किसी भेदभाव के ऐसे स्थलों पर विकास कार्य कर रही है. समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने भी संत रविदास को श्रद्धांजलि अर्पित की.

संत रविदास ने भेदभाव के खिलाफ उठाई थी आवाज

मायावती ने एक पोस्ट में देश और दुनिया भर में संत रविदास के लाखों अनुयायियों को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें सामाजिक परिवर्तन के महान संतों में से एक बताया. उनके प्रसिद्ध कथन ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि संत रविदास ने सच्चे सुख और समाज एवं राष्ट्र के कल्याण के मार्ग के रूप में मन की पवित्रता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि संत रविदास का संदेश सामाजिक सेवा और मानव कल्याण के लिए था, न कि संकीर्ण राजनीतिक या चुनावी हितों के लिए. उन्होंने कहा कि उनकी शिक्षाओं का पालन करने से गरीबों, शोषितों और पीड़ितों के जीवन में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है. मध्यकालीन कवि-संत और समाज सुधारक संत रविदास को दलित समुदाय सहित देश भर में बड़ी संख्या में अनुयायी पूजते हैं. अपने दोहों और उपदेशों के माध्यम से उन्होंने जाति आधारित भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई.

समाचार स्रोत: प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई)

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