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Mata Sita Saree माता सीता ने एक साड़ी में कैसे गुजारे 14 साल

by Live India
Mata Sita Saree माता सीता ने एक साड़ी में कैसे गुजारे 14 साल

Mata Sita Saree: क्या वनवास के दौरान माता सीता की साड़ी मैली नहीं हुई या कभी फटी नहीं. आज हम आपको इस सवाल का जवाब देंगे.

12 फरवरी, 2026

रामायण आज भी अपनी शिक्षा से लोगों को प्रेरित करती है. रामायण की कथा में हर मोड़ पर एक नया रहस्य, नई कहानी और चमत्कार हमें हैरान कर देता है. ऐसा ही एक रहस्य है माता सीता की साड़ी का. आपके मन में भी यह सवाल जरूर आया होगा कि 14 साल का वनवास माता सीता ने एक साड़ी में कैसे गुजारा. क्या वनवास के दौरान उनकी साड़ी मैली नहीं हुई या कभी फटी नहीं. आज हम आपको इस सवाल का जवाब देंगे.

किसने दी थी साड़ी

दरअसल, माता सीता को यह साड़ी ऋषि अत्रि की पत्नी माता अनसुइया ने दी थी, इसलिए यह कोई आम वस्त्र नहीं था. माता कैकेयी से वनवास मिलने के बाद भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण सबसे पहले दंडकारण्य पहुंचे थे. यहां उन्होंने ऋषि अत्रि के आश्रम में आराम किया. ऋषि अत्रि की पत्नी माता अनसुइया के पास भी पतिव्रता होने के कारण दिव्य शक्तियां थी. उन्होंने सीता जी को विदा करते हुए कुछ जरूरी वस्तुएं भेंट की थी, जिसमें से एक पीले रंग की चमत्कारी साड़ी भी थी.

साड़ी की विशेषताएं

माता अनसुइया की भेंट की हुई साड़ी साधारण नहीं थी, इसकी कुछ विशेषताएं थी. साड़ी की सबसे बड़ी खूबी थी कि वह कभी मैली नहीं होती थी. इस पर धूल, मिट्टी या पसीने का कोई असर नहीं पड़ता था और न ही कोई दाग धब्बा लगता था.

इसके अलावा साड़ी कभी फटती भी नहीं थी, क्योंकि वह अक्षय वस्त्र से बनी थी. अक्षय वस्त्र वह होता है जो कभी फटता नहीं है. इसलिए 14 साल वन में रहने के बाद भी माता सीता की साड़ी हमेशा नई की तरह बनी रही.

माता सीता की साड़ी की तीसरी खासियत यह थी कि उसे स्वयं अग्निदेव द्वारा बनाई गई थी, इसलिए अग्नि भी उसे नुकसान नहीं पहुंचा सकती थी. माता अनसुइया ने भविष्य की कठिन परिस्थितियों को देखते हुए ही उन्हें वह दिव्य साड़ी भेंट की थी. इसलिए अग्निपरीक्षा के दौरान भी माता सीता की साड़ी जली नहीं थी.

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