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Atishi Video Controversy : दिल्ली विधानसभा में प्रतिपक्ष नेता आतिशी के एक वीडियो का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब दिल्ली की असेंबली ने आतिशी से जुड़े वीडियो मामले में डॉक्यूमेंट्स जमा करने के लिए कहा है.
14 फ़रवरी 2026
आतिशी वीडियो विवाद: दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने पंजाब सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव और महानिदेशक (डीजीपी) से अवमानना से जुड़े मामले पर जवाब देने के लिए कहा है. दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी के एक वीडियो क्लिप मामले को लेकर डॉक्यूमेंट्स फिर से मांगे हैं, जिसमें सिख गुरुओं के खिलाफ कथित टिप्पणी की गई थी. अब दिल्ली विधानसभा ने लेटर लिखकर पंजाब के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम), डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस और दूसरे अधिकारियों से 20 फरवरी तक जवाब मांगा है. इसके अलावा फोरेंसिक लैब, सोशल मीडिया एक्सपर्ट और पुलिस की टेक्निकल सेल की रिपोर्ट भी मांगी है.
असेंबली में की गई थी कथित टिप्पणी
यह मामला उस वक्त ज्वलंत हुआ जब जनवरी में दिल्ली असेंबली के विंटर सेशन में आतिशी ने एक कथित टिप्पणी की थी. इस पर BJP नेताओं ने आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी (AAP) नेता की टिप्पणी सिख गुरुओं के खिलाफ अपमानजनक थी और उन्होंने सोशल मीडिया पर असेंबली रिकॉर्डिंग का एक क्लिप शेयर किया था. इसी बीच पंजाब पुलिस ने एक फोरेंसिक लैब रिपोर्ट के आधार पर वीडियो क्लिप शेयर करने के खिलाफ केस दर्ज किया, जिसमें दावा किया गया था कि यह डॉक्टर्ड थी. यह मामला दिल्ली विधानसभा की प्रिविलेज कमेटी को भेजा गया. इसके बाद स्पीकर विजेंद्र गुप्ता कहने पर वीडियो क्लिप को एक और फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया.
शेयर किए गए वीडियो में हुई छेड़छाड़
इस फोरेंसिक लैब रिपोर्ट में दावा किया गया कि BJP नेताओं द्वारा शेयर किए गए वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई. वहीं, प्रिविलेज कमेटी को दिए अपने बयान में आतिशी ने अपने खिलाफ लगे आरोपों से इनकार किया है और असेंबली की रिकॉर्डिंग की मांग की है. दूसरी तरफ असेंबली सेक्रेटरिएट ने पंजाब के अधिकारियों को लिखे अपरने लेटर में कहा कि उनके जवाब और डॉक्यूमेंट्स तय समय के अंदर प्रिविलेज कमेटी के विचार के लिए रूल्स और प्रोसीजर के अनुसार जमा करने होंगे. अगर ऐसा नहीं होता है तो इसको प्रिविलेज का उल्लंघन और अवमानना माना जा सकता है.
दिल्ली विधानसभा ने पहले ही पंजाब के अधिकारियों से 12 फरवरी तक जवाब और डॉक्यूमेंट्स की कॉपी मांगी थी. असेंबली ने अपने पत्र में लिखा था कि न तो आपके कमेंट्स और न ही जानकारी सेक्रेटेरिएट की तरफ से मिली है. चेयरपर्सन ने आपको यह बताने का निर्देश दिया है कि प्रिविलेज के मामले में उस व्यक्ति के लिए होते हैं जिसे वे एड्रेस किए गए हैं और जवाब में कमेंट्स उसी व्यक्ति को समिति को जमा करने होंगे. इसमें आगे कहा गया है कि इन्हें डिपार्टमेंटल कॉरेस्पोंडेंस नहीं माना जाएगा और किसी भी देरी को माफ नहीं किया जाएगा.
समाचार स्रोत: पीटीआई
