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नीतीश ने बिहार को दी सुरंग की सौगात

by Live India
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Bihar Politics: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जाएंगे मगर अभी बिहार की गद्दी छोड़ने में थोड़ा वक्त बचा है. मुख्यमंत्री एक्शन मोड में हैं और विकास कार्यों को लेकर पूरी तरह से संजीदा हैं.

8 मार्च 2026

बिहार की राजनीति: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जाएंगे मगर अभी बिहार की गद्दी छोड़ने में थोड़ा वक्त बचा है. मुख्यमंत्री एक्शन मोड में हैं और विकास कार्यों को लेकर पूरी तरह से संजीदा हैं. रविवार को जहां एक ओर नीतीश के पुत्र निशांत कुमार की ज़द यू में औपचारिक शुरुआत हुई तो वहीं नीतीश कुमार ने पटना में अपने सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया. इस मौके पर निशांत ने पिता के किए गए कार्यों की चर्चा की तो पिता नीतीश कुमार ने विकास की एक और नयी इबारत लिखी. ज़द यू प्रदेश कार्यालय में हजारों की संख्या में पहुंचे कार्यकर्ता और नेता मुख्यमंत्री के पुत्र की पार्टी में अगवानी करने से कतई पीछे नहीं थे, होड़ सी लगी रहीं. एक तरफ पुत्र ने एक नयी पारी की शुरुआत की तो पिता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 542 करोड़ की लागत से बिहार संग्रहालय और पटना संग्रहालय को जोड़नेवाली सुरंग का शिलापट्ट अनावरण किया.

सुरंग निर्माण की ली जानकारी

मुख्यमंत्री ने निर्माण करने वाली मशीन का बटन दबाकर कार्य की शुरूआत करायी. इस दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को सुरंग के निर्माण कार्य की प्रक्रिया तथा इसे पूर्ण करने के संबंध में विस्तृत जानकारी दी. नेहरू पथ के समीप हड़ताली मोड़ स्थित निर्माणाधीन म्यूज़ियम सब-वे टनल के बन जाने से बिहार संग्रहालय और पटना संग्रहालय में लगे प्रदर्शनी का लोग आसानी से एक जगह से दूसरी जगह जाकर अवलोकन कर सकेंगे. सुरंग का निर्माण एक चुनौती है. पटना शहर के बीचोबीच मुख्य मार्ग पर बन रहे इस टनल के निर्माण को लेकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि टनल का निर्माण इस प्रकार कराएं जिससे नेहरू पथ पर आवागमन में किसी प्रकार की कठिनाई न हो.

नीतीश ने बिहार से जुड़े रहने का दिया संदेश

मुख्यमंत्री ने बिहार संग्रहालय और पटना संग्रहालय को जोड़ने वाली सुरंग के दोनों छोर का भी स्थलीय निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए यानी नीतीश कुमार जब तक मुख्यमंत्री हैं अपने दायित्व निर्वहन में सबसे आगे दिखते रहे हैं. खास बात ये है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार की जनता को ये संदेश भी देना चाह रहे हैं कि दिल्ली जाने का निर्णय तो ले लिया है मगर मन बिहार के विकास के साथ ही जुड़ा रहेगा. निशांत को अपने समर्थकों को ये विश्वास दिलाना है कि पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए उनकी छत्रछाया में पार्टी को और ऊंचाई तक पहुंचाना है. चुनौती कड़ी है मगर अब पार्टी और नेता के पास कोई विकल्प भी नहीं है.

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