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Aamir Khan Best Movies: बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान आज अपना 61वां जन्मदिन मना रहे हैं. इस खास मौके पर उनकी ऐसी फिल्मों की लिस्ट लेकर आए हैं, जो ज्यादातर लोगों की वॉचलिस्ट में हमेशा रहती हैं.
14 मार्च, 2026
भारतीय सिनेमा में जब भी ‘परफेक्शन’ की बात होती है, तो सबकी जुबां पर एक ही नाम आता है और वो है, आमिर खान. आज यानी 14 मार्च को ‘मिस्टर परफेक्शनिस्ट’ अपना 61वां जन्मदिन मना रहे हैं. 30 सालों से ज्यादा लंबे करियर में आमिर ने न सिर्फ फिल्में दीं, बल्कि हर बार सिनेमा की रूप ही बदलकर रख दिया. वो सिर्फ एक एक्टर नहीं, बल्कि एक ऐसे विजनरी हैं जिन्होंने बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड्स के साथ-साथ दर्शकों की सोच को भी चैलेंज किया. कभी चॉकलेटी बॉय बनकर लड़कियों का दिल जीतना, तो कभी 50 की उम्र में पहलवान पापा बनकर बेटियों को गोल्ड जिताना. ये कहना गलत नहीं है कि आमिर की एक्टिंग रेंज का कोई मुकाबला नहीं है. ऐसे में आज हम आपके लिए आमिर की उन फिल्मों की लिस्ट लाए हैं, जिन्होंने बॉलीवुड के इतिहास में नए चैप्टर लिखे हैं.

कयामत से कयामत तक
80 के दशक में जब बॉलीवुड मार-धाड़ और खून-खराबे वाली फिल्मों से भरा पड़ा था, तब एक मासूम चेहरे वाले लड़के ने ‘पापा कहते हैं’ गाते हुए बॉलीवुड में एंट्री ली. हम बात कर रहे हैं आमिर खान की पहली फिल्म कयामत से कयामत तक की, जो साल 1988 में रिलीज़ हुई थी. इस फिल्म ने न सिर्फ आमिर को रातों-रात सुपरस्टार बनाया, बल्कि बॉलीवुड में रोमांटिक म्यूजिकल फिल्मों का दौर भी वापस ला दिया. राज और रश्मि की इस लव स्टोरी ने यंगस्टर्स को प्यार करने का एक नया अंदाज सिखाया.

लगान
साल 2001 में रिलीज़ हुई आमिर खान की ‘लगान’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि इमोशन थी. क्रिकेट और आजादी की लड़ाई के इस बेहतरीन कॉम्बिनेशन ने पूरी दुनिया को भारत की तरफ देखने पर मजबूर कर दिया. आशुतोष गोवारिकर के डायरेक्शन और आमिर की एक्टिंग ने इस फिल्म को ऑस्कर की दहलीज तक पहुंचाया. इसने साबित कर दिया कि अगर कहानी में दम हो, तो एक सिंपल स्टोरी भी ग्लोबल लेवल पर धूम मचा सकती है.

दिल चाहता है
जिस साल लगान रिलीज़ हुई, उसी साल आमिर खान एक और बिल्कुल अलग अवतार में नजर आए. उनकी फिल्म ‘दिल चाहता है’ ने बॉलीवुड में अर्बन यानी शहर में रहने वाले यंग दोस्तों की कहानी और उनकी प्रोब्लम्स को पर्दे पर उतारने का तरीका बदल दिया. आकाश का कैरेक्टर निभाते हुए आमिर ने दिखाया कि दोस्ती और प्यार में सीरियस होने के साथ-साथ मस्ती भी जरूरी है. इस फिल्म ने इंडियन सिनेमा को एक नई और कूल विजुअल लैंग्वेज दी.

रंग दे बसंती
साल 2006 में रिलीज़ हुई फिल्म रंग दे बसंती एक मास्टरपीस थी जिसने इतिहास को आज के दौर से जोड़ा. ‘रंग दे बसंती’ ने यंगस्टर्स के अंदर छिपी देशभक्ति को झकझोर दिया. इस फिल्म के बाद रीयल में भी कई कैंडल मार्च और विरोध प्रदर्शनों में वही जज्बा देखा गया जो फिल्म के कैरेक्टर्स में था. राकेश ओमप्रकाश मेहरा के डायरेक्शन में बनी आमिर खान की ये फिल्म सिनेमा की उस ताकत का सबूत थी जो सोसाइटी में बदलाव ला सकती है.

तारे ज़मीन पर
बतौर डायरेक्टर आमिर खान की पहली फिल्म तारे ज़मीन पर साल 2007 में रिलीज़ हुई थी. ये मूवी बहुत ही सेंसिटिव मुद्दे ‘डिस्लेक्सिया’ पर बेस्ड थी. आमिर की फिल्म ने ‘डिस्लेक्सिया’ को हाइलाइट किया. ईशान अवस्थी और उसके टीचर निकुंभ की कहानी ने हर माता-पिता और टीचर को अपनी परवरिश और एजुकेशन सिस्टम पर सवाल उठाने पर मजबूर कर दिया. आमिर की इस फिल्म ने सिखाया कि हर बच्चा वाकई में खास होता है.

3 इडियट्स
एजुकेशन सिस्टम पर बनी आमिर खान की ब्लॉकबस्टर मूवी 3 इडियट्स साल 2009 में रिलीज़ हुई थी. तब से लेकर आज तक, ये फिल्म हर किसी की फेवरेट्स में शामिल है. सालों पहले आमिर की इस फिल्म ने एक नई कहानी लिखी. रेंचो बनकर उन्होंने पूरी पीढ़ी को समझाया कि सक्सेस के पीछे नहीं, बल्कि काबिलियत के पीछे भागो. इस फिल्म ने न सिर्फ भारत में बल्कि चीन जैसे देशों में भी रिकॉर्ड तोड़ कमाई की.

दंगल
आमिर खान ने साल 2016 में रिलीज़ हुई फिल्म दंगल में जिस तरह का फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन दिखाया, उसने सबको हैरान कर दिया. एक बूढ़े और हैवी बॉडी वाले पहलवान पिता के किरदार में उन्होंने जान फूंक दी. ‘मारी छोरियां छोरों से कम हैं के’ डायलॉग आज भी लोगों की जुबां पर रहते हैं. इस फिल्म ने चीन के बॉक्स ऑफिस पर जो इतिहास रचा, वो आज भी एक मिसाल है.

गजनी
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