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ग्रेजुएशन करने वाले 40 % बेरोजगार

by Live India
Unemployment in India

Graduate Unemployment: अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की हालिया रिपोर्ट में हमें चिंताजनक आंकड़े दिखाती है. इसमें बताया गया है कि ग्रेजुएशन करने के बाद भी आज युवा पक्की नौकरी के लिए कितना संघर्ष कर रहा है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट

18 मार्च, 2026

पढ़ाई करने और डिग्री हासिल करने से अच्छी नौकरी मिलती है, जब अच्छी नौकरी मिलती है तो जीवन बेहतर हो जाता है- समाज बचपन से छात्रों को यह सीख देता आ रहा है. लेकिन उसी समाज का एक हिस्सा ऐसा भी है, जिसने खूब पढ़ाई करके डिग्री हासिल की लेकिन फिर भी आज बेरोजगार हैं. अक्सर हमें शिक्षा, कौशल और नौकरी के मुद्दे पर भारी-भरकम आंकड़ें गिनाए जाते हैं, लेकिन सच्चाई तब सामने आती है, जब आप खुद कुछ रिपोर्टस पढ़ते हैं. अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट हमें बताती है कि ग्रेजुएशन करने वाले 40 प्रतिशत लोगों को नौकरी नहीं मिल पाती और बहुत कम ग्रेजुएट्स को एक साल के अंदर पक्की नौकरी मिलती है.

40 प्रतिशत ग्रेजुएट्स बेरोजगार

अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 20 से 29 साल के 63 मिलियन ग्रेजुएट में से ग्यारह मिलियन बेरोजगार हैं, और उनमें से सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा ही ग्रेजुएशन के एक साल के अंदर पक्की सैलरी वाली नौकरी हालिस कर पाता है. ‘स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया’ रिपोर्ट में पाया गया कि सिर्फ 7 परसेंट ग्रेजुएट ही खुद को बेरोजगार बताने के एक साल के अंदर पक्की सैलरी वाली नौकरी पा पाते हैं. इसमें कहा गया है कि ग्रेजुएट बेरोजगारी अभी भी ज्यादा है. 15 से 25 साल के लोगों में लगभग 40 परसेंट और 25 से 29 साल के ग्रुप में 20 परसेंट.

कुछ को ही मिल पाती है पक्की सैलरी

रिपोर्ट में कहा गया है, “ग्रेजुएशन के एक साल के अंदर सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा ही पक्की सैलरी वाली नौकरी पा पाता है. ग्रेजुएट आबादी के बढ़ते साइज की वजह से हाल के सालों में ग्रेजुएट बेरोजगारी की समस्या भी बढ़ गई है.” रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ दशकों में युवाओं की आबादी काफी बढ़ी है और टर्शियरी एनरोलमेंट रेट भी बढ़ा है, जिससे युवा ग्रेजुएट की कुल संख्या में बढ़ोतरी हुई है. इसके साथ ही बड़ी संख्या में ग्रेजुएट बेरोजगार हो गए हैं. 2023 तक 20 से 29 साल की उम्र के 63 मिलियन ग्रेजुएट में से 11 मिलियन बेरोजगार थे.”

आजादी के बाद कितना बदलाव हुआ

रिपोर्ट में कहा गया है कि आजादी के बाद से, भारत ने पहले की कुछ शिक्षा की कमियों को दूर करने में काफी तरक्की की है. “हायर एजुकेशन में ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो भारत के डेवलपमेंट के लेवल के हिसाब से है. जेंडर और जाति के आधार पर शिक्षा तक पहुंच में सामाजिक-आर्थिक रुकावटें कम हुई हैं (हालांकि अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है), और इसके चलते भारत में लेबर मार्केट में आने वाला वर्कफोर्स ज्यादा काबिल है.” हालांकि, इसके साथ ही रोजगार में कोई असरदार बदलाव नहीं हुआ है. युवा ग्रेजुएट के लिए बेरोजगारी दर बहुत ज़्यादा है. शिक्षा तक पहुंच बराबर नहीं है. इसमें कहा गया है, “स्कूल खत्म करने के तुरंत बाद नौकरी मिलने की कोई गारंटी नहीं है, और अगर नौकरी मिल भी जाती है, तो वह हमेशा अच्छी, सुरक्षित, या लंबे समय तक चलने वाली नहीं होती.”

जिम्मेंदारियों के चलते छोड़ी पढ़ाई

रिपोर्ट के अनुसार, पढ़ाई करने वाले युवा पुरुषों का हिस्सा 2017 में 38% था, जो घटकर 2024 के अंत तक 34% रह गया. इसका एक बड़ा कारण यह है कि कई युवाओं को पढ़ाई छोड़कर घर की कमाई में मदद करनी पड़ती है. यही वजह सबसे आम है. 2017 में 58% युवाओं ने यह कारण बताया था, जो 2023 तक बढ़कर 72% हो गया. साथ ही, 2004-05 से 2023 के बीच हर साल करीब 50 लाख ग्रेजुएट तैयार हुए, लेकिन उनमें से सिर्फ लगभग 28 लाख को ही नौकरी मिल पाई, और उससे भी कम लोगों को नियमित सैलरी वाली नौकरी मिली. इसके कारण ग्रेजुएट्स में बेरोजगारी बढ़ी है और उनकी कमाई की रफ्तार भी धीमी हो गई है.

महिला यवाओं को मिल रहे नौकरी के बेहतर मौके

ग्रेजुएट युवा आम तौर पर नॉन-ग्रेजुएट से ज़्यादा कमाते हैं. जब वे नौकरी शुरू करते हैं तो उनकी सैलरी लगभग दोगुनी होती है, और समय के साथ यह अंतर बढ़ता जाता है. पुरुषों के लिए कमाई का यह फायदा पिछले कुछ सालों में काफी हद तक स्थिर रहा है, लेकिन युवा ग्रेजुएट पुरुषों की शुरुआती सैलरी में बढ़ोतरी धीमी हो गई है. इस बीच, पुरुषों और महिलाओं की कमाई के बीच का अंतर काफी कम हो गया है, जिससे पता चलता है कि युवा महिलाओं को अब पहले से बेहतर नौकरी के मौके और सैलरी मिल रही है.

समाचार स्रोत: पीटीआई

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