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UP को दहलाने की साजिश नाकाम

by Live India
UP को दहलाने की साजिश नाकाम

UP ATS: यूपी एटीएस ने समय रहते प्रदेश में बड़े धमाकों की साजिश को नाकाम कर दिया. कई शहरों में दहशत फैलाने की तैयारी थी. आतंकियों के निशाने पर संवेदनशील ठिकाने थे.

  • लखनऊ से भरत सेठी की रिपोर्ट

यूपी एटीएस: यूपी एटीएस ने समय रहते प्रदेश में बड़े धमाकों की साजिश को नाकाम कर दिया. कई शहरों में दहशत फैलाने की तैयारी थी. आतंकियों के निशाने पर संवेदनशील ठिकाने थे. जांच में सामने आया है कि आरोपी पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के संपर्क में थे और सोशल मीडिया के जरिए टारगेट, रेकी और हमले के निर्देश ले रहे थे. इस पूरे नेटवर्क की शुरुआत बिजनौर में वायरल हुए एक वीडियो से हुई, जिसने धीरे-धीरे एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का खुलासा कर दिया. एटीएस ने मेरठ निवासी शाकिब उर्फ साकिब को गिरोह का सरगना बताते हुए विकास गहलावत, लोकेश उर्फ पपला पंडित उर्फ बाबू उर्फ संजू और अरबाब को गिरफ्तार किया है.

पाकिस्तान से आ रहा था पैसा

एजेंसियों के मुताबिक इनकी योजना सफल होती तो कई शहरों में बड़े पैमाने पर अफरातफरी फैल सकती थी. इनकी फंडिंग पाकिस्तान से हो रही थी. क्यूआर कोड के जरिए पाकिस्तान से पैसा आ रहा था. NIA कोर्ट ने चारों आरोपियों को 5 दिन की रिमांड पर भेज दिया है. इस पूरे मामले की शुरुआत पिछले साल नवंबर से हुई, जब बिजनौर निवासी मैजुल साउथ अफ्रीका में रहते हुए इंस्टाग्राम वीडियो कॉल के जरिए चार लोगों से जुड़ा था. बातचीत के दौरान एक युवक के पास AK-47 और हैंड ग्रेनेड जैसी वस्तुएं दिखाई दीं, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

चार आतंकी गिरफ्तार

23 नवंबर 2025 को नजीबाबाद थाने में इस मामले में रिपोर्ट दर्ज हुई और जांच तत्कालीन थाना प्रभारी को सौंपी गई. पूछताछ के दौरान आरोपियों ने हथियारों को खिलौना और परफ्यूम की बोतल बताकर मामला शांत करा दिया, जिसके बाद फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई. लेकिन इसी घटना ने आगे चलकर बड़े नेटवर्क की परतें खोल दीं. जांच आगे बढ़ी तो 4 मार्च को बिजनौर में एक पिकअप वैन में आगजनी की घटना सामने आई. 12 मार्च को दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, जिनसे पूछताछ में बड़े मॉड्यूल का सुराग मिला. 23 मार्च को एजेंसियां सक्रिय हुईं और मोबाइल सर्विलांस से कई संदिग्ध संपर्क सामने आए. इसके बाद 2 अप्रैल को ATS ने साकिब उर्फ डेविल, विकास गहलावत उर्फ रौनक, लोकेश उर्फ बाबू और अरबाब को गिरफ्तार किया. उनके पास से केमिकल से भरा कैन, 7 मोबाइल फोन, 24 पंपलेट और आधार कार्ड बरामद हुए.

पाक हैंडलर्स के संपर्क में थे सभी

पूछताछ में सामने आया कि साकिब इस गिरोह का सरगना है और पाकिस्तानी हैंडलर अबू बकर से संपर्क उसी ने कराया था. यूपी एटीएस की जांच में सामने आया कि यह गिरोह संगठित मॉड्यूल के रूप में काम कर रहा था. आरोपी टेलीग्राम, सिग्नल और इंस्टाग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के जरिए पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स से संपर्क में थे. ये रेलवे सिग्नल बॉक्स उड़ाने, गैस सिलेंडर से भरे ट्रकों में आग लगाने और भीड़भाड़ वाले इलाकों में धमाके जैसी साजिशों पर काम कर रहे थे. आरोपियों ने कुछ जगहों पर छोटी आगजनी की घटनाओं को अंजाम देकर उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग पाकिस्तान भेजी, ताकि अपनी ‘काबिलियत’ साबित कर सकें और आगे बड़े हमले के निर्देश हासिल कर सकें.

रेलवे सिग्नल सिस्टम को उड़ाने की थी योजना

पूछताछ में सामने आया कि ये सभी 19 से 27 वर्ष की उम्र के युवक तकनीकी रूप से सक्रिय थे और इंटरनेट के जरिए टाइम बम बनाने, विस्फोटक तैयार करने और सटीक निशाना लगाने की जानकारी जुटा रहे थे. जांच एजेंसी को इनकी गूगल सर्च हिस्ट्री में संवेदनशील सर्च मिले हैं. आरोपियों ने लखनऊ रेलवे स्टेशन के आसपास रेलवे सिग्नल सिस्टम को नुकसान पहुंचाने की योजना भी बनाई थी, जिससे रेल संचालन बाधित हो और व्यापक अफरातफरी फैले. तलाशी के दौरान ज्वलनशील पदार्थ का एक केन, 7 स्मार्टफोन और 24 पंपलेट बरामद किए गए हैं. जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपियों ने छोटे-मोटे धमाकों और आगजनी को ‘रिहर्सल’ की तरह इस्तेमाल किया. एक वायरल वीडियो में एक युवक एके-47 जैसी राइफल के साथ दिखाई दिया, जिसे भी कथित तौर पर हैंडलर्स को भेजा गया था.

जितनी ज्यादा दहशत, उतनी ज्यादा फंडिंग

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि पाकिस्तान में बैठे आकाओं ने कहा था कि जितनी ज्यादा दहशत फैलाओगे, उतनी ज्यादा फंडिंग मिलेगी. एटीएस अब इस पूरे मॉड्यूल के अन्य सदस्यों और विदेशी कनेक्शन की जांच में जुटी है. पूरे मामले पर एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश ने बताया कि चारों संदिग्धों को कड़ी सुरक्षा के बीच एनआईए कोर्ट में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उन्हें पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है. एटीएस अब इनसे पूछताछ कर पूरे नेटवर्क, फंडिंग चैनल और पाकिस्तान से जुड़े संपर्कों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है.एटीएस के इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं. शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह मॉड्यूल कई शहरों में सक्रिय था और बड़े हमले की तैयारी में जुटा हुआ था. अब एजेंसियां इस साजिश से जुड़े अन्य संभावित सहयोगियों की तलाश में भी जुट गई हैं.

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