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सीता नवमी पर करें ये खास उपाय, जानें तिथि

by Live India
सीता नवमी पर करें ये खास उपाय, जानें तिथि

Sita Navami Upay: सीता नवमी के दिन विधि-विधान से पूजा करने से और कुछ खास उपाय करने से माता सीता का आशीर्वाद मिलता है. जानें कब है सीता नवमी और इस दिन क्या उपाय करने चाहिए.

9 अप्रैल, 2026

भगवान राम के भक्तों को सीता नवमी का भी इंतजार रहता है. हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को सीता नवमी मनाई जाती है. इस दिन माता सीता ने धरती पर अवतार लिया था. सीता नवमी के दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत रखने से वैवाहिक जीवन की समस्याएं दूर हो जाती हैं और परिवार में सुख-शांति आती है. माना जाता है कि इस दिन कुछ खास उपाय करने से माता सीता का आशीर्वाद मिलता है. चलिए जानते हैं सीता नवमी कब है, इस दिन क्या उपाय करने चाहिए और सीता नवमी की कथा क्या है.

कब है सीता नवमी

इस वैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 24 अप्रैल को रात 7 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 25 अप्रैल को शाम 6 बजकर 27 मिनट पर खत्म होगी. उदय तिथि के अनुसार, सूर्योदय के समय विद्यमान तिथि को ही पर्व मनाया जाता है. 25 अप्रैल को सूर्योदय के समय तिथि विद्यमान रहेगी यानी 25 अप्रैल, शनिवार के दिन सीता नवमी मनाई जाएगी.

सीता नवमी पर करें ये उपाय

जानकी स्तोत्र का करें पाठ– सीता नवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, इसके बाद साफ वस्त्र पहनें. अब एक आसन पर बैठकर भक्ति और शांत मन से जानकी स्तोत्र का पाठ करें. सीता नवमी पर जानकी स्तोत्र का पाठ करना बहुत फलदायी माना जाता है. ऐसा करने से माता सीता का आशीर्वाद मिलता है और जीवन के दुखों से मुक्ति मिलती है.

– इस दिन आप पीले वस्त्र पहनें. माता सीता और भगवान राम को भी पीले वस्त्र और पीले फूल चढ़ाएं. ये उपाय करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और आर्थिक स्थिति भी बेहतर होगी.

माता को सिंदूर लगाएं– माता सीता और भगवान राम की साथ वाली मूर्ति या तस्वीर की ही पूजा करें, ऐसा करने से वैवाहिक जीवन खुशहाल होता है. पूजा के दौरान माता के माथे पर सात बार सिंदूर लगाएं, इसके बाद उस सिंदूर को अपने माथे पर भी लगाएं.

श्रृंगार की चीजें दान करें- सीता नवमी पर महिलाएं जानकी देवी को श्रृंगार का सामान चढ़ा सकती हैं. इसके बाद, माता की पूजा सही तरीके से करें. आप श्रृंगार किसी जरूरतमंद महिला को दान भी कर सकती हैं. पर्व के दिन दान-पुण्य करना चाहिए.

माता सीता की कथा

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, एक बार मिथिला राज्य में भयंकर सूखा पड़ गया था. बारिश न होने से राजा जनक बहुत परेशान थे. एक ऋषि ने उन्हें यज्ञ करने और अपने खेत जोतने की सलाह दी. राजा जनक ने ऋषि की बात मानकर सबसे पहले यज्ञ किया और इसके बाद खेत में हल चलाना शुरू किया. हल चलाते समय, उनका हल जमीन के नीचे किसी चीज से टकराया. राजा जनक ने वहां से मिट्टी हटाई तो देखा कि सोने के कलश में एक सुंदर कन्या है. जैसे ही राजा जनक ने कन्या को उठाया, अचानक तेज बारिश होने लगी. जनक ने इस दिव्य कन्या का नाम सीता रखा और उसे अपनी बेटी मान लिया. सीता नवमी पर सीता के जन्म की कहानी सुनने और कहने से माता का आशीर्वाद मिलता है.

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