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बिहार क्रिकेटर: कहते हैं कि क्रिकेट का जन्म इंग्लैंड में हुआ है लेकिन वह पला-बढ़ा भारत में ही है. भारत के लोग क्रिकेट को खेलना और देखना पसंद करते हैं. यही वजह है कि क्रिकेट जगत में भारतीय टीम का जलवा रहा है. वह वनडे और टेस्ट क्रिकेट की रैंकिंग में भी टॉप पर अपनी जगह बनाई है. देश के विभिन्न राज्यों से मेहनत के दम पर क्रिकेट जगत में अपनी जगह बनाने वाले युवा क्रिकेटर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी अपना परचम लहराने का काम कर रहे हैं. भारतीय टीम में ऐसे कई खिलाड़ी हैं जो पिछड़े राज्य से आए हैं और क्रिकेट जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है. ऐसे ही हम बिहार के उन खिलाड़ियों के बारे में चर्चा करने जा रहे हैं जिन्होंने टीम इंडिया के लिए शानदार पारियां खेली कि प्रतिद्वंद्वी देशों की टीम को चौंका दिया. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के अलावा प्लेयर इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में धमाल मचा रहे हैं, जिसमें सबसे युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी का नाम टॉप पर है. सूर्यवंशी जब मैदान पर बल्ला लेकर उतरते हैं तो वह यह नहीं देखते हैं कि सामने वाले गेंदबाज का कद कितना ऊंचा है.
कैप्टन कूल मतलब ‘धोनी’
झारखंड के रहने वाले कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी को भी बिहार से जुड़ा हुआ क्रिकेटर कहा जाता है. इसकी वजह है कि साल 2000 से पहले तक झारखंड बिहार का ही हिस्सा था और उसके बाद अलग होकर नया राज्य बना. महेंद्र सिंह धोनी भारतीय टीम को तीन-तीन आईसीसी ट्रॉफी जिताने वाले पहले कप्तान हैं. उनकी कप्तानी में टी-20 विश्व कप 2007, ODI वर्ल्ड कप 2011 और चैंपियंस ट्रॉफी 2013 में भारतीय टीम ने जीती है. साथ ही उनकी कप्तानी में चेन्नई सुपर किंग्स ने भी पांच बार आईपीएल का खिताब जीतने में कामयाब हुई है. वह भारत के सबसे सफल कप्तान माने जाते हैं और उनकी पहचान एक फिनशर के रूप में भी है. इसके अलावा उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 17 हजार रन भी पूरी किए हैं और धीमी शुरुआत के बाद तूफानी अंदाज में बल्लेबाजी करने का उनका रिकॉर्ड रहा है. बता दें की धोनी का जन्म 7 जुलाई, 1981 को रांची में हुआ था और वह उस वक्त बिहार का हिस्सा था. साथ ही उन्होंने अपनी शुरुआती कोचिंग रांची में ही ली थी और उन्होंने DAV जवाहर विद्या मंदिर में पढ़ाई की थी जहां पर उन्हें स्पोर्ट्स टीचर से क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित हुए. इसके बाद धोनी ने क्रिकेट क्लबों और कोचिंग कैंपों में विकेटकीपिंग के साथ बल्लेबाजी की कोचिंग ली. साथ ही आगे जाकर उन्होंने अंडर-19 क्रिकेट खेले फिर पूरे विश्व ने देखा कि माही ने क्या-क्या कमाल किया.

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T-20 क्रिकेट में ईशान किशन बने स्टार
बिहार की राजधानी पटना से संबंध रखने वाले भारतीय टीम के स्टार बल्लेबाज ईशान किशन ने अपनी अलग पहचान बनाई है. उन्होंने भारतीय क्रिकेट में तूफानी अंदाज में पारी खेलकर लोगों को चौंकाया है और आईपीएल में भी उन्होंने इसी तरह का प्रदर्शन करके दिखाया है. ईशान ने 27 ODI मुकाबले खेले हैं जिनमें 42.40 की औसत से 933 रन बनाए हैं. साथ ही उनका वनडे क्रिकेट में हाई स्कोर 210 रन रहा है. इसके अलावा 45 टी-20 मैच खेले हैं जहां 30.18 की औसत से 1328 बनाए हैं और इस दौरान उनका हाईएस्ट स्कोर 103 रन रहा है. इसके अलावा उनके आईपीएल करियर पर एक नजर दौड़ाए तो उन्होंने अभी तक132 मुकाबले खेले हैं और उन्होंने इस दौरान 3488 रन बनाए हैं. अंतरराष्ट्रीय जगत के अलावा उन्होंने आईपीएल में अपना प्रभाव बनाया है और इस बार वह सनराइजर्स हैदराबाद का हिस्सा है. ईशान ने आईपीएल 2026 ने अभी तक 13 मैच खेले हैं और 490 से अधिक रन बनाए हैं. इन पारियों में उनके 5 अर्धशतक भी शामिल हैं. बता दें कि ईशान का जन्म 18 जुलाई 1998 को पटना में हुआ. उनके पिता एक पेशेवर बिल्डर हैं. ईशान किशन बचपन से ही क्रिकेट के प्रति बहुत उत्साही थे और यही वजह है कि उन्होंने कम उम्र में ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया.

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मुकेश ने गेंदबाजी में बनाया करियर
बिहार के गोपलगंज के रहने वाले मुकेश कुमार ने अपना करियर गेंदबाजी के रूप में स्थापित किया है. उन्होंने भारतीय टीम में तीनों फॉर्मेट के लिए डेब्यू कर लिया है. वह अपनी शानदार गेंदबाजी और लाइन-लेंथ के लिए मशहूर है. आईपीएल 2026 में वह दिल्ली कैपिटल्स का हिस्सा है और उन्होंने अभी तक शानदार गेंदबाजी की है. साथ ही डेथ ओवरों में अपनी लेन-लाइंथ के दौरान बल्लेबाजों को सबसे ज्यादा परेशान किया. उन्होंने दिल्ली की तरफ से अभी तक 10 मैच खेले हैं जिसमें 6 विकेट चटकाए हैं. हालांकि, विकेट के लिए लिहाज से वह ज्यादा प्रभावशाली गेंदबाज नहीं बन पाए लेकिन फिर भी पावरप्ले और डेथ ओवरों में उन्होंने बल्लेबाजों को काफी परेशान किया है. इसी बीच मुकेश ने मुंबई इंडियंस को चार ओवर में 26 रन देकर 2 विकेट चटकाए. वहीं, दिल्ली कैपिटल्स की तरफ से मुकेश कुमार भारतीय पेसर के रूप में खेले हैं. उनके साथ मिचेल स्टार्क और टी. राजन जैसे गेंदबाज भी रहे. बता दें कि मुकेश कुमार का जन्म 12 अक्टूबर 1993 में गोपालगंज में हुआ है. उनका परिवार साधारण पृष्ठभूमि वाला है. मुकेश के पिता कोलकाता में टैक्सी चलाते थे और यही वजह है कि उनका नाता बिहार-बंगाल दोनों जगहों से रहा. मुकेश ने शुरुआती क्रिकेट की ट्रेनिंग कोलकाता भी ली. इसके बाद उन्होंने स्थानीय क्लब क्रिकेट और अकादमियों में अभ्यास किया. खासकर मुकेश ने क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल के अंतर्गत होने वाले क्लब टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन किया.

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तूफानी बल्लेबाजी बनी सूर्यवंशी की पहचान
इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में अपनी तूफानी बल्लेबाजी से सुर्खियों बंटोरने वाले वैभव सूर्यवंशी रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं. इस सीजन में सभी अनुभवी बल्लेबाजों के मुकाबले सूर्यवंशी के चर्चे रहे. इस सीजन में उनकी बल्लेबाज ने कोहराम मचा दिया है और वह सामने वाले गेंदबाज को नहीं देख रहे हैं कि वह किस स्तर का है. उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर के गेंदबाजों को मैदान पर दौड़ाने का काम किया है. वैभव ने अभी तक इस सीजन में 500 रन बनाए हैं और ऑरेंज कैप की रेस में सबसे ऊपर चल रहे हैं. इसके अलावा टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे ज्यादा 50 छक्के लगाकर उन्होंने विश्व रिकॉर्ड बना दिया है. लखनऊ सुपर जाएंट्स के खिलाफ उन्होंने 38 गेंदों में 93 रनों की तूफानी पारी खेली और 10 गगन चुंबी छक्के भी लगाए. साथ ही वह पावरप्ले में सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में डेविड वार्नर के बाद दूसरे सबसे बड़े बल्लेबाज हैं. इसके अलावा वैभव ने अंडर-19 में भी शानदार प्रदर्शन किया था. बता दें कि वैभव सूर्यवंशी का जन्म 27 मार्च 2011 को समस्तीपुर में हुआ. उनके पिता संजीव सूर्यवंशी किसान परिवार से जुड़े हैं और छोटे पन से ही परिवार ने उनकी क्रिकेट के प्रति रुचि को आगे बढ़ाया. वैभव ने चार साल की उम्र से ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था और शुरुआती समय में उनके पिता ने ही प्रैक्टिस करवाई थी.

क्रिकेटर और कमेंट्री में बेमिसाल सबा करीम
भारत के पूर्व विकेटकीपर और बल्लेबाज रहे सबा करीम इन दिनों कमेंट्री में अपने करियर लगातार आगे बढ़ा रहे हैं. एक समय था जब सबा करीम भी भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा थे. उन्होंने भारतीय टीम की तरफ से एक टेस्ट मैच खेला है और उसमें सिर्फ 15 रन ही बनाए थे. हालांकि, वह टेस्ट क्रिकेट में कुछ खास नहीं कर पाए. लेकिन उन्होंने 34 एक दिवसीय मैच खेले हैं जिसमें उन्होंने 15.7 की औसत से 362 रन बनाए हैं. क्रिकेट जगत में लंबा करियर नहीं रहने के बाद उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक भूमिकाएं निभाईं हैं. बता दें कि सबा करीम का जन्म 14 नवंबर 1967 को पटना में हुआ. उन्होंने शुरुआती शिक्षा सेंट ज़ेवियर्स हाई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद सबा ने अपनी क्रिकेट की ट्रेनिंग पटना ली और उसके बाद उन्होंने बहुत कम उम्र में बिहार क्रिकेट टीम के लिए घरेलू क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया. साथ ही सबा ने वह बंगाल क्रिकेट टीम के लिए घरेलू क्रिकेट खेला है. साथ ही प्रथम श्रेणी क्रिकेट के लिहाज से उनका औसत 56 रन रहा, जो विकेटकीपिंग के लिहाज से काफी शानदार माना जाता है.

बिहार में क्रिकेट के प्रति रुचि रखने वाले क्रिकेटर्स ने अपनी मेहनत के दम पर अपनी पहचान बनाई है. इस राज्य के लिए सबसे आइकन पर्सनैलिटी महेंद्र सिंह धोनी है जिन्होंने बहुत गरीबी में अपनी क्रिकेट की ट्रेनिंग की और उसके बाद वह क्रिकेट जगत में शीर्ष स्थान पर पहुंच गए. धोनी अपनी कप्तानी के लिए जाने जाते हैं उन्होंने पिच के पीछे रहते हुए कई स्टंप लिए हैं और जब कभी वह DRS ले लिया करते थे तो उसे थर्ड अंपायर भी फेल नहीं कर सकता था. यही कारण है कि DRS को कई दफा धोनी रिव्यू सिस्टम भी कहा जाता है. इसके बाद ईशान किशन और वैभव सूर्ववंशी ने क्रिकेट की दुनिया में अपनी धाक जमाई है. खासकर आईपीएल में तो दोनों खिलाड़ियों ने गर्दा उड़ा रखा है और अपनी-अपनी टीम की जीत में कई बार अहम भूमिका निभाई है. खास बात यह है कि दोनों ही बल्लेबाज विस्फोटक बल्लेबाजी करते हैं. वैभव और ईशान जब भी मैदान पर खेलने के लिए आते हैं तो वह यह सोचते हैं कि एक गेंद को बाउंड्री के पार पहुंचाना है. वह अगर पावरप्ले तक भी टिक जाते हैं तो स्कोर बोर्ड इतनी स्पीड से चलता है कि कोई बुलेट ट्रेन पटरी पर दौड़ रही हो.
