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- Yogesh Rathore की रिपोर्ट
जल संकट: इंदौर में भीषण गर्मी के बीच पानी का संकट बढ़ता जा रहा है. पानी की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने के चलते लोगों को परशानियों का सामना करना पड़ रहा है. शहर के वार्ड क्रमांक 75 में पालदा चौराहे पर कांग्रेस पार्षद कुणाल सोलंकी के नेतृत्व में रहवासियों ने चक्काजाम कर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने नियमित पानी सप्लाई, पर्याप्त टैंकर व्यवस्था और नर्मदा लाइन से जलापूर्ति की मांग की . पालदा क्षेत्र में रविवार को पार्षद कुणाल सोलंकी के साथ लोगों ने सड़क पर प्रदर्शन किया. इस दौरान अचानक लोग उग्र हो गए और उन्होंने वाहनों को रोकना शुरू कर दिया और चक्काजाम कर दिया. जिससे बड़ी संख्या में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं.
मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारी
चक्काजाम को समाप्त करने के लिए पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे, लेकिन रहवासियों का कहना था कि घरों में पानी नहीं है, हमारी बातें नहीं सुनी जा रही हैं तभी हमें प्रदर्शन का रास्ता चुनना पड़ा. दरअसल इंदौर शहर में पानी की किल्लत को लेकर जनता का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है. वार्ड 75 के लोगों ने आरोप लगाया है कि कई दिनों से पर्याप्त टैंकर की मांग की जा रही थी, लेकिन प्रशासन और जल प्रदाय विभाग ने कोई स्थायी समाधान नहीं किया जिससे जनता में आक्रोश बढ़ गया और उन्होंने सड़क पर आकर प्रदर्शन किया. स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि पूरे बड़े वार्ड में केवल कुछ गलियों तक ही नर्मदा जल पहुंच पा रहा है जबकि बाकी इलाकों में लोग पानी के लिए परेशान हैं.
प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी
स्थानीय पार्षद का कहना है कि शहर का बजट हजारों करोड़ का होने के बावजूद आम जनता को मूलभूत सुविधा तक नहीं मिल पा रही. विरोध कर रहे लोगों ने प्रशासन पर राजनीतिक भेदभाव के भी आरोप लगाए. उनका कहना था कि जिन वार्डों में सत्ताधारी दल के पार्षद हैं वहां पर्याप्त टैंकर भेजे जा रहे हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों की अनदेखी की जा रही है. इसी मुद्दे को लेकर लोगों ने चक्काजाम कर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
बड़े आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि अब छोटे अधिकारियों से बात नहीं होगी, बल्कि वरिष्ठ अधिकारी मौके पर आकर समस्या का समाधान करें. उनका कहना था कि पानी संकट को लेकर केवल वादे किए जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं हुआ. लोगों ने चेतावनी दी कि यदि पेयजल की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो इससे भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी.
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