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FIFA World Cup 2026 में हो रही इन खिलाड़ियों की चर्चा

by Live India
FIFA World Cup 2026

फीफा विश्व कप 2026: फीफा विश्व कप 2026 का रोमांच इन दिनों सिर चढ़कर बोल रहा है. कई देशों की फुटबॉल टीमों के प्रेमियों की नजर टीवी और मोबाइल की स्क्रिन पर टिकी हुई है. इसी बीच फीफा विश्व कप 2026 में 68 साल पुराना रिकॉर्ड का चकनाचूर हो गया. इस टूर्नामेंट में 33 मैचों में 100 गोल हो गए. इसी बीच हैरान करने वाली बात हुई कि भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों का भारत की वरिष्ठ खिलाड़ियों की टीम का इस कप में खेलना का सपना टूट गया. हालांकि, इस टूर्नामेंट में भारतीय मूल के खिलाड़ी दूसरी टीमों से जुड़कर मैदान पर उतर रहे हैं और भारतीय फैंस की भी उन पर निगाह हैं. बता दें कि 11 जून से शुरू हुआ यह फीफा विश्व कप 2026 के सह-आयोजक मेक्सिको, अमेरिका और कनाडा हैं. साथ ही इस कप में दुनिया भर की 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं.

20 साल बाद भारतीय मूल के चार खिलाड़ी

भारतीय टीम का सपना टूटने के बाद अब भारत के फुटबॉल प्रेमियों की नजर इन भारतीय मूल के चार खिलाड़ियों पर टिकी हुई हैं. आपको बताते चलें कि 2006 में फ्रांस की ओर से फीफा विश्व कप खेलने वाले विकाश धोरासू भारतीय मूल के पहले खिलाड़ी थे. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर उनका असर ज्यादा खास नहीं रहा था और वह काफी लंबे समय तक टीम का हिस्सा भी नहीं रहे थे. वहीं, बीस साल के बाद भारतीय मूल के सरप्रीत सिंह (न्यूज़ीलैंड), निशान वेलुपिल्लै (ऑस्ट्रेलिया), तहसीन मोहम्मद जमशेद (क़तर) और सैमुअल मूटुस्सामी (डीआर कांगो) इस बार टूर्नामेंट में खेल रहे हैं और हर कोई उनकी तरफ टकटकी लगाकर देख रहा है. इसके अलावा इन चार खिलाड़ियों पर अपनी-अपनी टीमों को काफी उम्मीदें हैं. भले ही ये चारों भारतीय टीम की तरफ से नहीं खेल रहे हैं लेकिन इस बात का सुकून हैं कि भारतीय कहीं भी हो वह अपनी अलग पहचान बना लेते हैं. इसी कड़ी में आपको बताएंगे कि ये खिलाड़ी किस टीम से खेल रहे हैं और इनका अभी तक फुटबॉल में कैसा रिकॉर्ड रहा है.

न्यूजीलैंड के सरप्रीत सिंह

ऑकलैंड में 1999 में जन्मे सरप्रीत सिंह न्यूजीलैंड की फुटबॉल टीम में मिडफील्डर की भूमिका में हैं. उनके पिता मूलरूप से भारत के पंजाब राज्य के रहने वाले हैं. साथ ही उनका एक बड़ा भाई और एक सिस्टर भी हैं. वह एक मध्यम परिवार से आते हैं और उनका परिवार न्यूजीलैंड में एक परचून की दुकान चलाता था. वहीं, बचपन में सरप्रीत कई खेल खेला करते थे, लेकिन फुटबॉल में वह काफी रुचि लेते थे. उन्होंने 16 साल की उम्र में 2016 में वेलिंगटन फ़ीनिक्स फ़ुटबॉल क्लब से सीनियर डेब्यू कर लिया था. इसके अलावा साल 2018 में मुंबई में हुए इंटरकॉन्टिनेंटल कप में न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बन गए थे और इतनी कम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल कर सरप्रीत ने हर किसी को हैरान कर दिया था. उस टूर्नामेंट में कीवी टीम ने सुनील छेत्री की नेतृत्व वाली भारतीय टीम को 2-1 से हरा दिया था. इस दौरान दोनों में सरप्रीत ने ही असिस्ट किया था.

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वहीं, एक साल के बाद ही उन्होंने अंडर-20 विश्व कप में शानदार प्रदर्शन करके सबको हैरान कर दिया था. इस दौरान फुटबॉलर ने सबसे ज्यादा ध्यान जर्मनी के बायर्न म्यूनिख के स्काउट्स का ध्यान खींचा था. इसके कुछ समय बाद ही उन्हें जर्मनी की शीर्ष फ़ुटबॉल लीग बुंडेसलीगा में बायर्न म्यूनिख की ओर से खेलना का मौका मिला. सरप्रीत बुंडेसलीगा में खेलने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने. इसके बाद वह यूरोपीय फुटबॉल लीग की तरफ से भी कुछ मैच खेले. उन्होंने बहुत कम्र में अच्छा अनुभव प्राप्त कर लिया. दूसरी तरफ 27 साल की उम्र में सरप्रीत ने न्यूजीलैंड के लिए 24 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं. उनके फुटबॉल में उनके नाम अभी तक 34 गोल हैं.

कतर से खेलते हैं तहसीन मोहम्मद जमशेद

कतर की ओर से तहसीन मोहम्मद जमशेद इस साल विश्व कप में खेल रहे हैं. वह इस टूर्नामेंट में विंगर की भूमिका में है. तहसीन के पिता जमशेद मूलरूप से केरल के कून्नूर के रहने वाले हैं. परिवार 2006 में कतर में शिफ्ट हो गया था. इससे पहले जमशेद कालीकट यूनिवर्सिटी की तरफ से भी खेल चुके हैं और शुरुआत में उन्होंने ही अपने बेटे को ट्रेनिंग दी थी. वहीं, प्रोफेशनल फुटबॉल की ट्रेनिंग तहसीन ने क़तर की एस्पायर एकेडमी में ली. इसके बाद उन्हें अल-दुहैल स्पोर्ट्स क्लब में शामिल कर लिया गया था. साथ ही वह अपने मेहनत के दम कम समय में कतर की राष्ट्रीय टीम में भी जगह बनाने में शामिल रहे.

आपको बताते चलें कि तहसीन ने विश्व कप 2026 में अफगानिस्तान के खिलाफ डेब्यू किया. इसके अलावा 2026 में दोहा में भारत के खिलाफ वर्ल्ड कप क्वालीफायर में भी वह मैदान पर थे. उस मैच में कतर ने भारत को 2-1 से हराया था. लेकिन उस वक्त रेफरी के फैसले की काफी आलोचना हुई थी और वह मैच काफी विवादों में आ गया था. हालांकि, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई गोल नहीं किया है. लेकिन इस विश्व कप में इस युवा खिलाड़ी से काफी उम्मीदें हैं.

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ऑस्ट्रेलिया के निशान वेलुपिल्लै

निशान वेलुपिल्लै भारतीय मूल के हैं और उनकी मां एंग्लो इंडियन हैं. साथ ही पिता श्रीलंकाई तमिल मूल के मलेशियन हैं. निशान का जन्म ऑस्ट्रेलिया में हुआ है और वह मेलबर्न में पले बड़े हैं. क्लब फुटबॉल में वो मेलबर्न विक्टरी के लिए खेलते हैं. इसके अलावा वह ऑस्ट्रेलियाई टीम के आक्रामक खिलाड़ी हैं. 2024 में उन्हें चीन के खिलाफ विश्व कप क्वालीफायर में पदार्पण का मौका मिला और उसी मैच में उन्होंने पहला इंटरनेशनल गोल भी किया था. अब वह सात अंतरराष्ट्रीय मैचों में तीन गोल कर चुके हैं.

बता दें कि निशान को विश्व कप 2026 में ऑस्ट्रेलिया की 26 सदस्यों की टीम में शामिल किया गया है. साथ ही उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की तरफ से खेलते हुए विश्व कप में भी डेब्यू किया. इससे पहले उन्होंने चीन के खिलाफ अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था और इस गोल के साथ ही उन्होंने फुटबॉल प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा था. इसके अलावा निशान का इस विश्व कप में तुर्की के खिलाफ डेब्यू हुआ है. 61वें मिनट में उन्हें मैदान पर उतरने का मिला. इस मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया को 2-0 से जीत मिली और 24 साल के बाद तुर्किए की जीत में रंग में भंग डालने का काम किया. इस जीत का श्रेय गोलकीपर पैट्रिक बीच को दिया गया, क्योंकि उन्होंने इस मुकाबले में विरोधी टीम के करीब 8 गोल रोकने का काम किया.

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कांगो के प्लेयर सैमुअल मूटुस्सामी

कांगो की तरफ से खेलते हुए भले ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक भी गोल नहीं किया हो, लेकिन वह एक शानदार खिलाड़ी हैं. हमेशा अपनी टीम का हौसला बढ़ाते हुए नजर आते हैं. बता दें कि सैमुअल मौटौसामी ने ने एएस मेउडॉन के साथ अपने फुटबॉल करियर की शुरुआत की थी. इसके बाद वह ओलम्पिक लियोनैस से रिलीज किए जाने के बाद 2016 में एफसी नैनटेस में शामिल हो गए.

फीफा विश्व कप 2026 सैमुअल माउटौसामी

जानें इस खेल का इतिहास

फीफा विश्व दुनिया का सबसे पॉपुलर फुटबॉल टूर्नामेंट है. इसका आयोजन हर चार साल में होता है और इसमें दुनिया की सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय फुटबॉल टीम हिस्सा लेती हैं. साथ ही अगर हम इसके इतिहास के बारे में जाने तो वह करीब एक सदीं पुराना है और इसमें खेल, रोमांच, रिकार्ड तथा महान खिलाड़ियों की अनगिनत कहानियां जुड़ी हुई हैं. फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था FIFA ने 1930 में पहले विश्व कप का आयोजन कराया था. इस दौरान पहला 13 देशों की टीमों में हिस्सा लिया था. मेजबान उरुग्वे ने फाइनल में अर्जेटिना को हराकर पहला खिताब जीता था.

इसके बाद 1930, 1934 और 1938 के बाद विश्व कप का आयोजन रुक गया. इस दौरान द्वितीय युद्ध शुरू गया था और पूरी दुनिया इस वार से प्रभावित हुई थी. 1942 और 1946 में विश्व कप नहीं सका. इसके बाद इस टूर्नामेंट की वापसी 1950 में हुई. बता दें कि ब्राजील विश्व कप इतिहास की सबसे शानदार टीम मानी जाती है और ब्राजील ने अभी तक पांच बार इस खिताब को अपना नाम किया है. दूसरी तरफ ब्राजील के महान खिलाड़ी पेले विश्व कप के इतिहास के सबसे प्रसिद्ध खिलाड़ी माने जाते हैं. वह तीन विश्व कप जीतने के बाद एकमात्र खिलाड़ी हैं.

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