4
मुजफ्फरनगर के मजदूरों को बचाया गया: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक फैक्ट्री में बंधुआ मजदूरी कराई जा रही थी. काम करने वाले बंधुआ मजदूरों में से एक की कथित तौर पर टॉर्चर के कारण मौत हो गई और बाद में उसकी बॉडी को एक बैग में पैक करके फेंक दिया गया. सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) संजय कुमार ने बताया कि तितावी पुलिस स्टेशन एरिया के मंडी गांव में फैक्ट्री में रेड के बाद बंधुआ मजदूरी का खुलासा हुआ. 22 जून को एडमिनिस्ट्रेशन और पुलिस द्वारा मारे गए रेड के बाद जिले में एक पेपर प्लेट बनाने वाली फैक्ट्री से नाबालिगों समेत 12 बंधुआ मजदूरों को बचाया गया.
एक मजदूर की मौत
कुमार के अनुसार, अर्जुन नाम के एक मजदूर की नवंबर 2025 में फैक्ट्री में कथित तौर पर टॉर्चर के बाद मौत हो गई थी. उसकी बॉडी को एक बैग में पैक करके फेंक दिया गया था. उस मामले की जांच में पुलिस ने रेड मारी और इस फैक्ट्री का पता चला. पुलिस ने फैक्ट्री मालिक अंकित बालियान और शिवा त्यागी के खिलाफ नया केस दर्ज किया है. त्यागी को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन मुख्य आरोपी फैक्ट्री मालिक अंकित बालियान अभी भी फरार है. कुमार ने कहा कि उसे गिरफ्तार करने के लिए दो पुलिस टीमें बनाई गई हैं. उन्होंने कहा कि मामले की जांच करने और सबूत इकट्ठा करने के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) भी बनाई गई है.
यूपी के मुजफ्फरनगर में चौंकाने वाला बंधुआ मजदूरी मामला.
12-13 श्रमिकों को कथित तौर पर महीनों तक बंधक बनाए रखने, यातना देने और बुनियादी अधिकारों से वंचित करने के बाद एक कारखाने से बचाया गया। रिपोर्टों में कहा गया है कि कुछ पीड़ितों की मृत्यु दुर्व्यवहार के कारण हुई।
सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है।’ pic.twitter.com/gJUbjmxUdv
– रूपोक अचार्जी (@RupokAcharjee) 25 जून, 2026
एक साल से कैद में रखा
बचाए गए सभी 12 मजदूरों का मेडिकल टेस्ट किया गया है और उनका इलाज चल रहा है. पीड़ितों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और उनके बयान दर्ज किए गए. जिला अधिकारी, लेबर डिपार्टमेंट के साथ मिलकर, सरकारी मदद स्कीमों के तहत बचाए गए मजदूरों के पुनर्वास पर काम कर रहे हैं. उनके बैंक अकाउंट खोलने और उन्हें उनके परिवारों से मिलाने की भी कोशिश की जा रही है. कथित तौर पर उन्हें एक साल से ज़्यादा समय तक फैक्ट्री के अंदर कैद रखा गया और अमानवीय हालात में काम करने के लिए मजबूर किया गया. अधिकारियों ने कहा कि चार मजदूरों के परिवारों से संपर्क हो गया है, जबकि बाकी मजदूरों के रिश्तेदारों का अभी पता नहीं चला है.
12,000 की सैलरी पर नौकरी पर रखा था
मजदूरों को कथित तौर पर अलग-अलग राज्यों से 12,000 रुपये महीने की सैलरी का वादा करके लाया गया था, लेकिन उन्हें न तो वेतन दिया गया और न ही जगह छोड़ने दिया गया. बचाए गए कई मजदूरों के शरीर पर चोट के निशान थे और टॉर्चर के निशान थे. मजदूरों ने बताया कि जब भी उन्होंने फैक्ट्री छोड़ने की कोशिश की, तो उन पर हमला किया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें पीटा गया, भालों से मारा गया, कोड़े मारे गए, कुत्तों से कटवाया गया और जानवरों का चारा खिलाया गया.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मजदूरों के खिलाफ कथित ज़ुल्म को “इंसानी गरिमा पर हमला” बताया था और पीड़ितों के लिए न्याय और जिम्मेदार लोगों के लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग की.
2000 कॉल्स और 238 घंटे की प्लानिंग, मर्डर से पहले कैफे में मिले थे कातिल, केतन हत्याकांड में हुए बड़े खुलासे
समाचार स्रोत: पीटीआई
