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बिजली कटौती से तंग विधायक ने अफसरों के घरों के तार काटे

by Live India
Haridwar Electricity Cut

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Haridwar Electricity Cut: हरिद्वार में बिजली कटौती से परेशान विधायक वीरेंद्र जाति ने बदला लेने के लिए बिजली अधिकारियों के घरों की लाइट काट दी.

25 दिसंबर, 2025

हरिद्वार बिजली कटौती: हरिद्वार में बिजली कटौती से परेशान विधायक वीरेंद्र जाति ने बिजली अधिकारियों से अनोखा बदला लिया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. हरिद्वार जिले के झबरेड़ा से कांग्रेस विधायक वीरेंद्र जाति बिजली के खंभों पर चढ़ गए और डिपार्टमेंट के तीन अधिकारियों के घरों की बिजली काट दी, जिसमें बिजली विभाग के चीफ इंजीनियर भी शामिल थे. बिजली विभाग ने बिजली कटौती को लेकर विधायक के खिलाफ रुड़की सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है.

सीढ़ी-औजार लेकर पहुंचे विधायक

मंगलवार को वीरेंद्र जाति अपने समर्थकों, एक सीढ़ी और कुछ काटने के औजारों के साथ रुड़की आए. उन्होंने सबसे पहले बोट क्लब में सुपरिटेंडिंग इंजीनियर विवेक राजपूत के सरकारी आवास के बाहर एक बिजली के खंभे पर चढ़कर उनके घर का बिजली कनेक्शन काट दिया. इसके बाद, विधायक अपने काफिले के साथ चीफ इंजीनियर अनुपम सिंह और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर विनोद पांडे के सरकारी आवासों पर पहुंचे और उनके घरों के भी बिजली कनेक्शन काट दिए. विधायक के मुताबिक, उन्होंने अधिकारियों को भी वही परेशानी देने के लिए ऐसा किया, जो बिजली चले जाने पर आम लोगों को होती है.

रोजाना आठ घंटे तक कटती थी बिजली

जाति ने आरोप लगाया कि उनके इलाके में रोजाना पांच से आठ घंटे तक बिना बताए बिजली कटौती हो रही है, जिससे जनता को बहुत परेशानी हो रही है और कारोबार में भी काफी नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा कि वह 10 दिनों से डिपार्टमेंट के साथ बिजली कटौती का मुद्दा उठा रहे थे, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया. जाति ने कहा कि अधिकारी सिर्फ एक घंटे की बिजली कटौती से ही परेशान हो गए, जबकि जनता रोजाना घंटों बिना बिजली के परेशान रहती है. विधायक ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इसका वीडियो भी पोस्ट किया है.

अधिकारियों ने विधायक के खिलाफ की शिकायत

बिजली अधिकारियों ने रुड़की सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में विधायक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. अधिकारियों का कहना है कि जाति ने बिना प्रॉपर शटडाउन के बिजली की लाइनें काट दी, जिससे कोई बड़ा हादसा हो सकता था. इसमें आरोप लगाया गया कि यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन था, बल्कि सरकारी काम में सीधा दखल भी था.

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