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Amazon-Flipkart के साथ Meesho को लगा वॉकी-टॉकी का झटका

by Live India
Amazon-Flipkart के साथ Meesho को लगा वॉकी-टॉकी का झटका, CCPA ने ठोका भारी जुर्माना, जानिए क्या है पूरा मामला

Illegal Walkie-Talkie Sales: अगर आप भी जी भरकर ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं, तो ये खबर आपकी आंखें खोल देगी. दरअसल, कई बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर CCPA ने भारी जुर्माना ठोका है. आप भी जानें वजह.

16 जनवरी, 2026

अवैध वॉकी-टॉकी बिक्री: अगर आप भी ऑनलाइन शॉपिंग के शौकीन हैं और डिस्काउंट देखकर कुछ भी ऑर्डर कर देते हैं, तो ये खबर आपके लिए है. दरअसल, भारत में ई-कॉमर्स की दुनिया के बड़े धुरंधर, जैसे- अमेजन, फ्लिपकार्ट, मीशो और मेटा (फेसबुक मार्केटप्लेस) पर सरकार ने तगड़ा जुर्माना लगाया है. मामला किसी खराब प्रोडक्ट का नहीं, बल्कि ‘अवैध वॉकी-टॉकी’ की बिक्री का है. यही वजह है कि सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने इन कंपनियों पर नियमों की धज्जियां उड़ाने के लिए 10-10 लाख रुपये का जुर्माना ठोका है.

क्यों फंसीं बड़ी कंपनियां?

वॉकी-टॉकी जैसे उपकरण रेडियो फ्रीक्वेंसी पर काम करते हैं. भारत के टेली कम्यूनिकेशन लॉ के मुताबिक, हर वॉकी-टॉकी को बेचने या इस्तेमाल करने की आजादी नहीं है. सिर्फ वही गैजेट लाइसेंस फ्री होते हैं जो एक खास फ्रीक्वेंसी बैंड (446.0-446.2 MHz) में काम करते हैं. हालांकि, जांच में पता चला कि इन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर धड़ल्ले से ऐसे वॉकी-टॉकी बेचे जा रहे थे जो इस दायरे से बाहर थे. साथ ही इनके पास जरूरी सरकारी सर्टिफिकेट (ETA) भी नहीं था.

फ्लिपकार्ट सबसे आगे

CCPA ने अपनी जांच में पाया कि करीब 16,970 ऐसे प्रोडक्ट लिस्टेड थे जो नियमों का उल्लंघन कर रहे थे. फ्लिपकार्ट पर तो 65,000 से ज्यादा ऐसे यूनिट्स बेचे गए जिनमें फ्रीक्वेंसी की जानकारी ही नहीं थी. अमेजन और मीशो का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा. फेसबुक मार्केटप्लेस पर भी बिना किसी लाइसेंस और जानकारी के धड़ल्ले से ये डिवाइस बिक रहे थे.

होगी जेब ढीली

कंज्यूमर अफेयर्स सेक्रेटरी निधि खरे के मुताबिक, सीसीपीए ने 13 कंपनियों को नोटिस जारी किया था. इनमें से मीशो, मेटा, फ्लिपकार्ट और अमेजन को 10-10 लाख रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया है. वहीं जियोमार्ट, चिमिया, टॉक प्रो और मास्कमैन टॉयज जैसी कंपनियों पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगा है. खबर है कि मीशो, मेटा और जियोमार्ट जैसी कंपनियों ने तो अपना जुर्माना भर भी दिया है, जबकि बाकियों की पेमेंट का इंतजार है.

बहाना पड़ा भारी

जब इन प्लेटफॉर्म्स से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह पल्ला झाड़ने की कोशिश की. उनका तर्क था कि वो तो सिर्फ एक जरिया हैं और सामान तो थर्ड पार्टी सेलर्स बेच रहे हैं. हालांकि, सीसीपीए ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया. अथॉरिटी का कहना है कि जब आप किसी प्रोडक्ट को प्रमोट करते हैं और उसे अपने प्लेटफॉर्म पर होस्ट करते हैं, तो आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप उसकी कानूनी जांच करें. आप अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते.

सुरक्षा का खतरा

अब आप सोच रहे होंगे कि एक छोटे से वॉकी-टॉकी पर इतना हंगामा क्यों? असल में ये मामला सीधे तौर पर देश की सुरक्षा से जुड़ा है. अवैध रेडियो फ्रीक्वेंसी वाले ये डिवाइस पुलिस, डिजास्टर मैनेजमेट और इमरजेंसी सेवाओं के कम्युनिकेशन नेटवर्क में अड़चन डाल सकते हैं. अगर ये डिवाइस गलत हाथों में पड़ जाएं या क्रिटिकल नेटवर्क को जाम कर दें, तो पब्लिक ऑर्डर और नेशनल सिक्योरिटी के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है.

नए नियमों ने कसी कमर

इस घटना के बाद सरकार ने ‘प्रिवेंशन एंड रेगुलेशन ऑफ इलीगल लिस्टिंग ऑफ रेडियो इक्विपमेंट, 2025’ के तहत नई गाइडलाइन्स जारी कर दी हैं. अब ई-कॉमर्स साइट्स को किसी भी ऐसे गेजेट को लिस्ट करने से पहले उसकी फ्रीक्वेंसी और सरकारी सर्टिफिकेट (ETA) की जांच करनी ही होगी. साथ ही, सरकार ने इन कंपनियों को सेल्फ ऑडिट करने का आदेश दिया है. अब उन्हें खुद जांच करके सर्टिफिकेट ऑनलाइन पब्लिश करना होगा कि उनके प्लेटफॉर्म पर कोई भी अवैध इलेक्ट्रॉनिक सामान नहीं बिक रहा है.

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