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West Bengal News : पश्चिम बंगाल फतह करने के लिए BJP ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. सूत्रों की मानें तो BJP इस बार ‘बेरोजगारी भत्ता’ नहीं, बल्कि ‘युवा भत्ता’ का दांव चलने वाली है.
पश्चिम बंगाल समाचार: पश्चिम बंगाल की सत्ता का रास्ता क्या युवाओं की जेब और महिलाओं के भरोसे से होकर गुजरेगा? 2026 की चुनावी बिसात बिछ चुकी है और इस बार बीजेपी ने ममता बनर्जी के ‘ममता कार्ड’ को मात देने के लिए एक बड़ा दांव खेलने की तैयारी कर ली है. 170 सीटों का लक्ष्य लेकर युवाओं-महिलाओं के लिए घोषणाओं का पिटारा BJP खोलने की तैयारी में है. ऐसे में बड़ा सवाल है क्या BJP का यह ‘मास्टरस्ट्रोक’ दीदी के ‘लक्ष्मी भंडार’ पर भारी पड़ेगा?
BJP ने रणनीति में किया बदलाव
पश्चिम बंगाल फतह करने के लिए BJP ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. सूत्रों की मानें तो BJP इस बार ‘बेरोजगारी भत्ता’ नहीं, बल्कि ‘युवा भत्ता’ का दांव चलने वाली है. वहीं, महिलाओं को अपने पाले में लाने के लिए बिहार के पैटर्न पर एकमुश्त बड़ी राशि देने की घोषणा संकल्प पत्र में की जा सकती है. BJP के रणनीतिकारों का मानना है कि ममता सरकार की ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना जिसकी राशि 1000 से बढ़ाकर 1500 की गई है, का मुकाबला करने के लिए कुछ ‘बड़ा’ और ‘ठोस’ करना होगा. इधर भाजपा नेताओं ने पश्चिम बंगाल में उद्योगों के हिसाब से पिछड़ेपन को आधार बनाना शुरु कर दिया है. योजनाओं के साथ-साथ विकास को भी भाजपा आधार बनाने जा रही है.
BJP सिर्फ योजनाओं का लालच नहीं दे रही, बल्कि ममता सरकार को आंकड़ों के जाल में घेरने की तैयारी भी की है. BJP कार्यकर्ता घर-घर जाकर महिला सुरक्षा को लेकर ममता राज में हुए अत्याचार, बलात्कार और हत्याओं के आंकड़े दे रहे है तो वहीं, मुस्लिम तुष्टीकरण के मुद्दे को लेकर युवाओं के बीच यह संदेश देने में लगे हैं कि कैसे ममता सरकार हिंदू युवाओं की जगह एक मुस्लिम नौजवानों को तरजीह दे रही है. साथ ही शिक्षा और नौकरियों में धांधली को मुद्दा बनाकर युवाओं को लामबंद करने में लग गई है. भाजपा का आरोप प्रदेश की स्थानीय मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिये ममता अब धरने दे रही हैं.
14 मार्च को प्रधानमंत्री की कोलकाता में रैली
14 तारीख को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेगा रैली होने वाली है. इस रैली के बाद बीजेपी का ‘जनसंपर्क अभियान’ और तेज हो जाएगा. BJP का लक्ष्य स्पष्ट है. हर घर, हर महिला और हर युवा तक सीधे पहुंचना. BJP ने अपनी रणनीति में महिला कल्याण को सबसे ऊपर रखा है और बिहार के पैटर्न पर एकमुश्त बड़ी सहायता राशि देने का वचन देने वाली है. युवा भत्ता और रोजगार का नया मॉडल नवजवानों में पेश कर रही है तो सुरक्षा, भ्रष्टाचार और तुष्टीकरण का विरोध भी करने में BJP के नेता और कार्यकर्ता लग गए है.
पार्टी 2019 और 2021 में मिले राजनीतिक विस्तार को और मजबूत करने की रणनीति बना रही है, लेकिन इस बार हालात पहले से अलग हैं. एक तरफ वोटर लिस्ट में संशोधन को लेकर विवाद गरमाया हुआ है, तो दूसरी तरफ राज्य की राजनीति में अल्पसंख्यक वोट बड़ा फैक्टर बना हुआ है. बीजेपी की कोशिश है कि वह विकास और कल्याण योजनाओं के बड़े पैकेज का वादा कर ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार की नकद सहायता योजनाओं को चुनौती दे सके.
महिलाओं को देगी आर्थिक सहायता
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में महिलाओं को दी गई आर्थिक सहायता के उदाहरण लोगों के सामने हैं और इससे भरोसा बनता है कि BJP अपने वादे पूरे करती है. हालांकि इस बार पार्टी हर सीट पर पूरी ताकत झोंकने के बजाय ज्यादा रणनीतिक तरीके से चुनाव लड़ने की तैयारी में है. BJP मानती है कि राज्य में अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच तृणमूल कांग्रेस को बढ़त मिलती है, इसलिए पार्टी का फोकस उन इलाकों पर रहेगा जहां हिंदू वोटर निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
दीदी के पास ‘सबुज साथी’ और ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी जमीन पर उतरी योजनाएं हैं, तो बीजेपी के पास सत्ता विरोधी लहर और नई घोषणाओं की ताकत. मुकाबला कांटे का है. देखना होगा कि 14 तारीख की मोदी रैली के बाद बंगाल की राजनीति ऊंट किस करवट बैठता है.
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