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Stock Market Update: मंगलवार की सुबह शेयर मार्केट इन्वेस्टर्स के लिए काफी उठापटक वाली रही. आज सुबह IT सेक्टर में अच्छी खासी गिरावट दिखी. हालांकि, इन्वेस्टर्स अभी भी मार्केट से आस लगाए हुए हैं.
17 मार्च, 2026
शेयर मार्केट में आज सुबह की शुरुआत आईटी कंपनियों के लिए किसी बुरे सपने जैसी रही. जब पूरा बाजार सुस्त चाल चल रहा था, तब आईटी स्टॉक्स में ऐसी भगदड़ मची कि निफ्टी आईटी इंडेक्स धड़ाम से 2 प्रतिशत नीचे गिर गया. ये गिरावट इतनी थी कि इंडेक्स अपने तीन साल के सबसे लो लेवल के करीब पहुंच गया. ऐसे में अगर आप सोच रहे हैं कि आपके पोर्टफोलियो में लाल रंग क्यों दिख रहा है, तो समझ लीजिए कि आज विप्रो, इंफोसिस और टीसीएस जैसे दिग्गजों ने इन्वेस्टर्स को काफी ज्यादा मायूस किया है.
बिकवाली का प्रेशर
मंगलवार की सुबह जैसे ही शेयर मार्केट खुली, आईटी शेयरों पर बिकवाली का भारी दबाव देखा गया. सेंसेक्स और निफ्टी में तो मामूली हलचल थी, लेकिन आईटी सेक्टर अकेले ही गोता लगा रहा था. सुबह करीब 9:30 बजे सेंसेक्स 93 अंक गिरकर 75,410 पर था. वहीं, निफ्टी 32 अंकों की गिरावट के साथ 23,377 पर कारोबार कर रहा था. हैरानी की बात ये है कि बाजार में बढ़त बनाने वाले शेयरों की संख्या गिरने वालों से ज्यादा थी. इसके बाद भी आईटी की मंदी ने माहौल बिगाड़ दिया.
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इन शेयर्स का बुरा हाल
विप्रो के शेयरों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई, जिससे ये निफ्टी का सबसे बड़ा लूजर बन गया. इसके पीछे-पीछे इंफोसिस 2.2 प्रतिशत और एचसीएल टेक 2.1 प्रतिशत गिर गए. टीसीएस और टेक महिंद्रा भी इस गिरावट से बच नहीं पाए और टॉप लूजर्स की लिस्ट में अपनी जगह बना ली. मिडकैप सेगमेंट में तो कोफोर्ज ने 5 प्रतिशत की डुबकी लगाकर सबको चौंका दिया. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये गिरावट किसी एक कंपनी की वजह से नहीं, बल्कि पूरे सेक्टर पर बने ग्लोबल प्रेशर का नतीजा है. अमेरिका जैसी बड़ी मार्केट में डिमांड को लेकर अनिश्चितता और दुनिया भर में चल रहे तनाव ने इन्वेस्टर्स को डरा दिया है. इसके अलावा, फॉरेन इन्वेस्टर्स (FII) लगातार भारत से अपना पैसा निकाल रहे हैं. यानी जब तक ये बिकवाली जारी रहेगी, तब तक मजबूत स्टॉक्स पर भी दबाव बना रहेगा.
रुपये का हाल
दूसरी तरफ, भारतीय रुपया भी आज डॉलर के मुकाबले कमजोर दिखा. रुपया 14 पैसे गिरकर 92.42 के लेवल पर पहुंच गया. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मिडिल ईस्ट में जारी वॉर ने रुपये की कमर तोड़ दी है. डॉलर इंडेक्स की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आने वाले फैसले ने इन्वेस्टर्स को इंतजार करने पर मजबूर कर दिया है. यानी आईटी सेक्टर के लिए फिलहाल रास्ता आसान नहीं दिख रहा है.
समाचार स्रोत: पीटीआई
