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KGMU Lucknow: लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) परिसर में मौजूद अवैध मजारों (मज़ारों/दरगाहों) को हटाने का विवाद अब नया मोड़ ले चुका है.
केजीएमयू लखनऊ: लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) परिसर में मौजूद अवैध मजारों (मज़ारों/दरगाहों) को हटाने का विवाद अब नया मोड़ ले चुका है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने रमजान के पवित्र महीने की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए पहले निर्धारित अंतिम तिथि 28 फरवरी को आगे बढ़ाकर 4 अप्रैल कर दिया है. प्रशासन की कोशिश है कि रमजान के पाक महीने में सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने से रोकने को लेकर यह कदम उठाया गया है. रमजान महीने के दौरान कोई भी कार्रवाई नहीं की जाएगी और मामले पर अंतिम सुनवाई 4 अप्रैल को दोपहर 2 से 4 बजे के बीच होगी. KGMU के प्रवक्ता प्रोफेसर केके सिंह ने कहा कि हमने यह निर्णय लिया है कि सौहार्दपूर्ण तरीके से यदि कोई निष्कर्ष निकाला जा सकता है तो उसे देखते हुए रमजान की संवेदनशीलता को समझते हुए समय सीमा विस्तारित की गई है. अब कागजात जमा करने और सुनवाई की अंतिम तिथि 4 अप्रैल है.
KGMU परिसर में कुल 5-6 मजारें मौजूद
रमजान के दौरान कोई कार्रवाई नहीं होगी, और फैसला रमजान के बाद ही लिया जाएगा. KGMU परिसर में कुल 5-6 मजारें मौजूद हैं, जिन्हें विश्वविद्यालय प्रशासन ने अतिक्रमण और बिना अनुमति के निर्माण बताया है. ये 1947 के बाद बनी बताई जा रही हैं और परिसर में आवागमन में बाधा डाल रही हैं. जनवरी 2026 में पहले नोटिस जारी किए गए थे, जिसमें 15 दिनों के अंदर इन्हें हटाने या वैधता साबित करने को कहा गया था. फरवरी में दूसरा नोटिस जारी किया गया और अंतिम समय सीमा 28 फरवरी तय की गई थी. हालांकि, समय सीमा बीतने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब रमजान शुरू होने के कारण प्रशासन ने संवेदनशीलता बरतते हुए कार्रवाई स्थगित कर दी है.
मजार प्रबंधन को दी गई मोहलत
मजार में नमाज अदा करने के बाद एक मुस्लिम युवक ने कहा कि रमजान में इसे नहीं हटाया जा रहा है, ये अच्छी बात है. कभी भी नहीं हटाना चाहिए क्योंकि यहां बहुत लोग नमाज अदा करते हैं और इफ्तारी भी करते हैं. वहीं, KGMU के एक रेजिडेंट डॉक्टर ने कहा कि अभी नहीं हटा रहे हैं, ये अच्छी बात है, लेकिन इन्हें हटाया जाना चाहिए. यह फैसला सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है, लेकिन कुछ लोग इसे नियमों में ढील के रूप में देख रहे हैं. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रमजान के बाद मजारों को परिसर से बाहर स्थानांतरित करने के लिए 15 दिनों का समय दिया जाएगा अन्यथा आगे की कानूनी कार्रवाई होगी. यह मामला अब 4 अप्रैल की सुनवाई पर निर्भर है, जहां मजार प्रबंधन को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी. उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
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