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Mahashivratri Shubh Muhurat: कब है महाशिवरात्रि?

by Live India
Mahashivratri Shubh Muhurat: कब है महाशिवरात्रि?

Mahashivratri Shubh Muhurat: शिवभक्तों को महाशिवरात्रि का इंतजार रहता है. यहां आपको महाशिवरात्रि की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा नियम के बारे में बताया गया है.

3 फरवरी, 2026

फाल्गुन महीने की शुरुआत हो चुकी है. फाल्गुन हिंदू कैलेंडर का सबसे आखिरी महीना होता है, जिसको धार्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. इस महीने महाशिवरात्री और होली का त्योहार आता है. महाशिवरात्रि पर पवित्र स्नान के साथ ही माघ मेले का समापन होता है. शिव भक्तों को महाशिवरात्रि का इंतजार रहता है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. महाशिवरात्रि पर शिव भक्त व्रत रखते हैं और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं. यहां आपको महाशिवरात्रि की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा मंत्केर बारे में बताया गया है.

कब है महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि का त्योहार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. महाशिवरात्रि 15 फरवरी, रविवार के दिन शाम को 5 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 16 फरवरी, सोमवार को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर खत्म होगी. अगर पूजा शुभ मुहूर्त में की जाए तो यह और भी फलदायी होती है. तो आइए जानते हैं महाशिवरात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और साथ जलाभिषेक कब करना चाहिए.

महा शिवरात्रि 4 प्रहर पूजा का समय

  • प्रथम प्रहर पूजा का समय: शाम 06:39 बजे से रात 09:45 बजे तक
  • द्वितीय प्रहर पूजा का समय: रात्रि 09:45 बजे से रात्रि 12:52 बजे तक
  • तृतीय प्रहर पूजा का समय: प्रातः 12:52 बजे से प्रातः 03:59 बजे तक
  • चतुर्थ प्रहर पूजा का समय: प्रातः 03:59 बजे से प्रातः 07:06 बजे तक

मुख्य जलाभिषेक समय

महाशिवरात्रि के दिन सभी भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. महादेव को दूध, भांग और धतूरा चढ़ाया जाता है. यहां जलाभिषेक के मुहूर्त बताए गए हैं.

  • ब्रह्म मुहूर्त/सुबह: सुबह 06:47 से सुबह 09:42 तक
  • दोपहर: सुबह 11:06 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक
  • शाम: दोपहर 03:25 से शाम 06:08 तक
  • रात: रात 08:53 से 12:01 मिनट तक

पूजा मंत्र

  1. ॐ नमः शिवाय
  2. ॐ हम आपको त्र्यंबकम, सुगंधित और पोषण बढ़ाने वाला प्रदान करते हैं। उर्वारुक की भाँति मृत्यु के बंधन से मुक्त होकर मुझे अमृत से मुक्त न होने दीजिये।
  3. ॐ हौं जूं सः मृत्युंजय नमः॥
  4. ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। रूद्र हमसे प्रार्थना करें।

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