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Middle East का हाल, हवाना में जश्न और सऊदी में मातम

by Live India
Middle East का हाल, हवाना में जश्न और सऊदी में मातम

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Middle East War Update: मिडिल ईस्ट में जारी जंग से राहत की खबर आती नज़र नहीं आ रही हैं. इसका असर अब पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. आप भी जानें वॉर का ताज़ा हाल.

28 मार्च, 2026

समंदर की लहरों और जंग के मैदान से जुड़ी बड़ी खबरें कुछ अच्छी नहीं हैं. आज की दुनिया में एक तरफ समंदर की लहरों के बीच जिंदगी बचाने की जद्दोजहद चल रही है, तो दूसरी तरफ रेगिस्तान की तपिश में बारूदी जंग तेज होती जा रही है. हाल ही में दो ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जिन्होंने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है. पहली खबर क्यूबा से है, जहां राहत सामग्री लेकर जा रहे जहाज लापता होने के बाद सुरक्षित मिल गए हैं. दूसरी खबर मिडिल ईस्ट से है, जहां ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है.

क्यूबा के लिए राहत

मैक्सिको से क्यूबा के लिए मदद लेकर निकले ‘नुएस्त्रा अमेरिका कॉन्यॉय’ के दो जहाज पिछले कुछ दिनों से लापता थे, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था. खराब मौसम की वजह से इन जहाजों का संपर्क टूट गया था और इनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही थी. हालांकि, अब राहत की खबर ये है कि मैक्सिकन नौसेना ने इन जहाजों को ढूंढ निकाला है और ये सेफ हवाना बंदरगाह पहुंच गए हैं. इन जहाजों पर कम से कम आठ लोग सवार थे. ये 20 मार्च को इस्ला मुजेरेस से रवाना हुए थे, लेकिन बीच रास्ते में ही इनका संपर्क कट गया. मैक्सिकन नौसेना के एक विमान ने हवाना से लगभग 80 समुद्री मील उत्तर-पश्चिम में इन जहाजों को देखा और फिर सुरक्षित बंदरगाह तक पहुंचाया. मिशन के को-ऑर्डिनेटर अदनान स्टुमो ने बताया कि खराब मौसम की वजह से रास्ता लंबा करना पड़ा, इसलिए देरी हुई, लेकिन क्रू मेंबर्स कभी भी गंभीर खतरे में नहीं थे. ये मिशन क्यूबा के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि वहां हालात काफी खराब हैं. अमेरिका के लगाए बैन की वजह से वहां बिजली की भारी कटौती और जरूरी सामानों की किल्लत हो गई है. ऐसे में इन जहाजों का वहां पहुंचना खाना और दवाइयों की उम्मीद लेकर आया है.

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मिडिल ईस्ट का हाल

दूसरी तरफ, सऊदी अरब में एक एयरबेस पर ईरानी हमले की खबर ने दुनिया को डरा दिया है. ईरान और अमेरिका के बीच चल रही इस जंग में घायल होने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या अब 300 के पार पहुंच गई है. शुक्रवार को ईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर 6 बैलिस्टिक मिसाइलें और 29 ड्रोन दागे. इस हमले में कम से कम 15 सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें से पांच की हालत गंभीर बताई जा रही है. इस हमले के बाद अमेरिका ने अपनी ताकत और बढ़ा दी है. जापान से लगभग 2,500 नौसैनिकों को लेकर एक अमेरिकी युद्धपोत ‘यूएसएस त्रिपोली’ मिडिल ईस्ट पहुंच चुका है. इसके अलावा, सैन डिएगो से ‘यूएसएस बॉक्सर’ और दो अन्य जहाजों को भी इस क्षेत्र में आने का आदेश दिया गया है. फिलहाल इस इलाके में अमेरिका की पिछले 20 सालों की सबसे बड़ी मिलिट्री तैनाती है, जिसमें दो विमानवाहक पोत और लगभग 50,000 सैनिक शामिल हैं.

इकोनॉमी पर असर

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो का कहना है कि वो बिना जमीनी सेना उतारे अपने लक्ष्य हासिल कर सकते हैं. हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हर सिचुएशन के लिए तैयार रहना होगा. वहीं, इस वॉर का असर अब आम लोगों की जेब पर भी पड़ने लगा है. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर अपना कंट्रोल मजबूत कर लिया है, जिससे तेल एक्सपोर्ट प्रभावित हुआ है और ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं. राष्ट्रपति ट्रंप पर इस संकट को खत्म करने का दबाव बढ़ रहा है. ट्रंप ने दावा किया था कि बातचीत अच्छी चल रही है, लेकिन हालिया हमलों ने स्थिति और बिगाड़ दी है. ट्रंप ने तेहरान को 6 अप्रैल तक का टाइम दिया है, जबकि ईरान का कहना है कि वो फिलहाल किसी बातचीत का हिस्सा नहीं है. अब देखना ये है कि आने वाले दिनों में ये वॉर किस दिशा में जाती है.

समाचार स्रोत: पीटीआई

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