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NCERT Book Publishing Process: कैसे छपती हैं किताबें?

by Live India
NCERT Book Publishing Process: कैसे छपती हैं किताबें?

NCERT Book Publishing Process: NCERT किताबें कौन लिखता है. कैसे विषय चुने जाते हैं. कैसे इसे पब्लिश किया जाता है. इस लेख में आप जानेंगे NCERT किताब छपने तक की पूरी प्रक्रिया.

27 फरवरी, 2026

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र (NCERT) इन दिनों चर्चा में है. दरअसल, NCERT ने क्लास 8 के लिए नई सामाजिक विज्ञान की किताब प्रकाशित की थी, जिसमें ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ चैप्टर को जोड़ा था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने NCERT को फटकार लगाई और वह चैप्टर हटाने का निर्देश दिया. अब NCERT को दोबारा सभी किताबों को लिखवानी होगी और दोबारा किताबों को प्रकाशित करना होगा. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि आखिर NCERT किताबें कौन लिखता है. कैसे विषय चुने जाते हैं. कैसे इसे पब्लिश किया जाता है. इस लेख में बच्चों के बस्ते तक किताबें पहुंचने का पूरा प्रोसेस जानेंगे.

क्या है NCERT

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र (NCERT) भारत सरकार द्वारा स्थापित एक सरकारी संस्था है, जो क्लास 1 से लेकर 12 तक छात्रों को सिलेबस और किताबें तैयार करती है. NCERT ही तय करती है कि बच्चों के सिलेबस में क्या बदलाव करना चाहिए और समय समय पर सिलेबस को अपडेट और अपग्रेड किया जाता है . कुल मिलाकर सिलेबस का कंटेंट तैयार करने से लेकर किताब छापने तक की पूरी जिम्मेदारी NCERT की होती है. समय-म CBSE और कई अन्य राज्य बोर्ड NCERT किताबें ही पढ़ाते हैं. क्लास 1 से लेकर 8 तक स्कूलों से ही बच्चों को किताबें दी जाती है. क्लास 9 के बाद बच्चे बाहर से किताब खरीदते हैं.

पहले चुने जाते हैं विषय

दरअसल, NCERT अपनी किताबें नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) के आधार पर लिखता है. इस फ्रेमवर्क में विषय की जरूरत और सीखने के फायदे और नई जमाने की जरूरतों को ध्यान में रखकर विषय चुने जाते हैं. विषय चुनने से लेकर किताब लिखने और चेक करने तक का काम एक-दो लोग नहीं, बल्कि एक्सपर्ट की एक पूरी कमेटी करती है. इस कमेटी का नाम है National Syllabus and Teaching-Learning Material Committee (NSTC). इस कमेटी में यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर, सब्जेक्ट एक्सपर्ट, स्कूल टीचर और अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े एक्सपर्ट शामिल होते हैं.

कौन लिखता है किताब

NSTC द्वारा विषय और ढांचा तैयार करने के बाद Textbook Development Committees (TDC) किताब लिखना शुरू करती है. हर क्लास और विषय के राइटर की कमेटियां बनाई जाती हैं. इन कमेटियों में भी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर, स्कूल टीचर्स, रिसर्चर और सब्जेक्ट एक्सपर्ट शामिल होते हैं. यह कमेटी किताब का पूरा ड्राफ्ट तैयार करती है. इसके बाद ड्राफ्ट को NCERT की समीक्षा समितियों के पास भेजा जाता है, जहां किताब की चेकिंग होती है. एक्सपर्ट्स सिलेबस की क्वालिटी, भाषा और तथ्यों की गलतियों की जांच करते हैं. बारिकी से चेकिंग करने के बाद जरूरत पड़ने पर ड्राफ्ट को वापस सुधार के लिए भेजा जाता है. गलतियां सुधारन के बाद ड्राफ्ट को शिक्षकों और अन्य एक्सपर्ट के पास फीडबैक के लिए भेजा जाता है. फाइनल ड्राफ्ट को NSTC के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता है. मंजूरी मिलने के बाद किताब को प्रिंटिंग के लिए भेज दिया जाता है. पब्लिश होने के इन्हें स्कूलों और मार्केट में भेज दिया जाता है.

जोड़ा या हटाया कैसे जाता है चैप्टर

अगर किसी चैप्टर, कंटेंट या टॉपिक के बारे में कोई सुझाव या आपत्ति मिलती है, तो किताब को अपडेट किया जाता है. जैसा कि हाल के मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने “ज्यूडिशियरी करप्शन” चैप्टर पर आपत्ति जताई है. NCERT एक नई कमिटी फिर से बनाता है. पुराने और नए TDC को चैप्टर की जांच करने का काम सौंपता है है. कमिटी की सिफारिश के बाद, NCERT चैप्टर हटाता या जोड़ता है। उसके बाद ही नई किताब पब्लिश होती है.

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