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Rangbhari Ekadashi सुहागनों के लिए बेहद खास है रंगभरी एकादशी

by Live India
Rangbhari Ekadashi सुहागनों के लिए बेहद खास है रंगभरी एकादशी

Rangbhari Ekadashi: रंगभरी एकादशी के दिन सुहागन महिलाएं व्रत रखती हैं और अपने खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं. चलिए जानते हैं रंगभरी एकादशी का शुभ मुहूर्त कब है और पूजा विधि क्या है.

20 फरवरी, 2026

सनातन धर्म में एकादशी को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. हर महीने में दो एकादशी आती है यानी साल में कुल 24 होती हैं. हर एकादशी का अपना अलग महत्व होता है. एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है, लेकिन अगली एकादशी भगवान शिव और माता पार्वती के प्रेम को समर्पित है. अगली एकादशी का व्रत 27 फरवरी को रखा जाएगा, जो है आमलकी एकादशी. आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है. रंगभरी एकादशी सुहागनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और अपने खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं. चलिए जानते हैं आमलकी एकादशी का शुभ मुहूर्त कब है और पूजा विधि क्या है.

rangbhari ekadashi

रंगभरी एकादशी का महत्व

फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को रंगभरी एकादशी का व्रत रखा जाता है. यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम और मिलन को समर्पित है. माना जाता है कि रंगभरी एकादशी के दिन ही भगवान शिव माता पार्वती का गौना कराकर उन्हें काशी लेकर आए थे. इसलिए इस दिन सुहागन महिलाएं शिव-पार्वती की पूजा करती हैं. महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन और पति के स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करती हैं. इस दिन काशी के लोग भगवान शिव के आगमन पर उन्हें गुलाल अर्पित करते हैं. रंगभरी एकादशी के दिन से काशी में होली की शुरुआत हो जाती है.

रंगभरी एकादशी का शुभ मुहूर्त

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 27 फरवरी 2026, सुबह 12:33 बजे से.
  • एकादशी तिथि समाप्त: 27 फरवरी 2026, रात 10:32 बजे तक.
  • पूजा के लिए शुभ मुहूर्त: सुबह 6: 48 बजे से 11: 08 बजे तक रहेगा.
  • व्रत पारण का समय (अगले दिन): 28 फरवरी, 2026 को सुबह 06:47 AM से 09:06 AM के बीच.
  • व्रत की तिथि: उदया तिथि के अनुसार, 27 फरवरी 2026, शुक्रवार को ही यह व्रत रखा जाएगा.

पूजा विधि

Aamlaki Ekadashi

आमलकी का मतलब होता है आंवला. आंवले में औषधीय गुण पाए जाते हैं. इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने का महत्व है. माना जाता है कि आंवले में भगवान विष्णु का वास होता है. आमलकी एकादशी के दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए. पूजा के बाद पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें और उसकी परिक्रमा करें. पूजा के बाद आंवले का दान करें. साथ ही प्रसाद के रूप में आंवले बांटे और खाएं. इस एकादशी को रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है, इसलिए इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की विधि-विधान से पूजा करके उन्हें गुलाल अर्पित करना चाहिए.

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