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अमेरिका-ईरान युद्ध: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव एक फिर चरम पर पहुंच गया है. अमेरिका ने ईरान पर नौवीं बार ईरान पर हमला किया. इसी बीच ईरान ने भी पलटवार करते हुए खाड़ी देशों पर चौतरफा हमला हमले किए हैं. अब युद्ध का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. अमेरिकी सैनिक की मौत के बाद सोमवार की तड़के अमेरिका ने ईरान को निशाना बनाते हुए हवाई हमलों का एक नया दौर शुरू किया. इन हमलों में उत्तर-पश्चिम के एक शहर को निशाना बनाया गया. यहां पर अमेरिका को जमीन के नीचे मिसाइलों का बेस होने का शक था. इसके जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत पर हमला किया. इन हमलों के बाद साफ होता जा रहा है कि अमेरिका और ईरान धीरे-धीरे पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं. बता दें कि लड़ाई को खत्म करने के लिए पिछले महीने हुई अंतरिम डील भी लगभग टूट गई है और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही काफी हद तक बंद हो गई है.
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ईरान के कई इलाकों को बनाया गया निशाना
नए तरीके से शुरू हुई लड़ाई में दोनों पक्षों ने बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है. लड़ाई बढ़ने से तेल की कीमतें भी बढ़ गई हैं. सोमवार को बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गईं और अमेरिका में आम गैसोलीन की कीमत 4 डॉलर प्रति गैलन हो गई है. इसका बोझ अब सीधा अमेरिकियों की जेब पड़ रहा है. वहीं, युद्ध को लेकर अमेरिकी सेना ने बताया कि शनिवार को इराक में एक ईरानी ड्रोन को गिराने के दौरान वह सैनिक मारा गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि आज रात हमने उन पर फिर से ज़ोरदार हमला किया और ये हमारे शहीद सैनिकों के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया है. दूसरी तरफ अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने सोमवार तड़के हमला किया. इसमें ईरान सैन्य कमांड सेंटरों, एयर डिफेंस और तटीय निगरानी साइटों, समुद्री क्षमताओं, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइटों और संचार नेटवर्क को निशाना बनाया गया. वहीं, ईरान की न्यूज एजेंसी एजेंसी IRNA ने बताया कि अमेरिकी हमलों में राजधानी तेहरान से लगभग 520 किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिमी शहर तबरीज के पास एक व्यक्ति की मौत हो गई. इसके अलावा अमेरिका ने खुज़ेस्तान प्रांत में बंदर इमाम खोमेनी, होर्मोजगन प्रांत में सिरिक और जास्क, बलूचिस्तान प्रांत में कोनारक और चाबहार को भी निशाना बनाया है.

ओमान तट पर लगी एक जहाज में भीषण आग
ब्रिटिश सेना के यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स सेंटर (UKMTO) ने बताया कि जैसे ही हमले शुरू हुए ओमान के तट के पास एक जहाज पर प्रोजेक्टाइल लगने से उसमें आग लग गई. UKMTO ने आगे कहा कि चालक दल ने जहाज छोड़ दिया और उसके बाद जहाज में भीषण आग लग गई. ओमान के आसपास से गुजरने वाले रास्ते का इस्तेमाल करने के लिए अमेरिकी सेना जहाजों को प्रोत्साहित करती रही है, ताकि वे ईरान के नियंत्रण से बच सकें. इसके जवाब में ईरान ने मध्य पूर्व में अमेरिका के सहयोगी देशों पर कार्रवाई की. बहरीन ने सोमवार सुबह मिसाइल अलर्ट सायरन बजाए और कुवैत ने कहा कि उसका एयर डिफेंस ईरान की ओर से आ रहे हमलों का जवाब दे रहा था. जंग के बीच दुनिया के एनर्जी मार्केट के लिए एक नई मुश्किल खड़ी हो सकती है और दूसरी तरफ यमन के हूती विद्रोहियों ने सोमवार को सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया है. हूतियों की तरफ से यह कदम पिछले हफ्ते सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले के जवाब में उठाया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने की स्थिति मेंम सऊदी अरब अब लाल सागर के रास्ते तेल भेजने के लिए एक पाइपलाइन पर निर्भर है.
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क्या होर्मुज को खोल पाएगा अमेरिका?
जंग के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के पावर स्टेशनों और पुलों को निशाना बनाने की धमकी दी है. इसेक माध्यम से तेहरान को होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ ढीली करने के लिए मजबूर किया जा सके. युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया की एनर्जी सप्लाई का पांचवां हिस्सा यही से सप्लाई हो रहा था. बीते कुछ दिनों से अमेरिकी हमलों से पता चलता है कि वह लगातार होर्मुज को खुलवाने के लिए संघर्ष कर रहा है. पिछले हफ्ते अमेरिका ने ईरान के कच्चे तेल की शिपमेंट रोकने के लिए उसके बंदरगाहों पर फिर से नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी. सेना ने शनिवार को दावा किया कि उसने 6 जहाजों का रास्ता बदल दिया और एक को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया. इसी बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका अभी भी ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन बातचीत वास्तविक होनी चाहिए. रुबियो ने आगे कहा कि हम जवाब देना जारी रखेंगे. अगर कूटनीति के लिए रास्ता खुलता है तो यह बहुत सकारात्मक बात होगी. दुर्भाग्य से आज रात स्थिति ऐसी नहीं है. कुछ घंटों के बाद ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने माना कि मध्यस्थों के जरिए हमें प्रस्ताव मिले हैं. हालांकि, उन्होंने उनके बारे में विस्तार से बताने से इनकार कर दिया. दूसरी तरफ ईरान के पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चल रहे मतभेदों के बीच यह अंतरिम समझौता कभी नहीं टिक सकता है.

जरीफ ने अपने एक लेख में लिखा कि जैसा कि मौजूदा संघर्ष से साफ है, वाशिंगटन ईरान की सरकार को खत्म नहीं कर सकता है. साथ ही जरीफ ने देश के नेतृत्व को चेताया कि अगर ईरान बार-बार समुद्री यातायात को धमकाता है, तो दुनिया का एक बड़ा हिस्सा उसके खिलाफ हो सकता है. वहीं, ईरान के अधिकारियों ने रविवार को कहा कि अमेरिका के हाली के हमलों में कम से कम 50 लोग मारे गए हैं और 517 घायल हुए हैं.
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यमन में भी हुई लड़ाई तेज
यमन में ईरान के समर्थन वाले हूती विद्रोहियों ने सोमवार को घोषणा की कि वे सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू कर रहे हैं. इससे ग्लोबल शिपिंग के लिए एक और अहम समुद्री रास्ते पर खतरा पैदा हो गया है और फिर से संघर्ष शुरू होने की आशंका बढ़ गई है. हूती मिलिट्री के प्रवक्ता याह्या सरी ने एक वीडियो मैसेज में कहा कि सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री प्रतिबंध तुरंत लागू होगा. उन्होंने इसे ‘जैसे को तैसा’ वाली कार्रवाई बताया है. हूथी मीडिया ऑफिस के डिप्टी हेड नसरुद्दीन आमेर ने एक्स पर कहा कि बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य (strait) को बंद कर दिया जाएगा. उन्होंने इसे सऊदी अरब द्वारा 10 साल से ज्यादा समय से यमन के लोगों पर लगाई गई अन्यायपूर्ण नाकेबंदी बताया. अरब के दक्षिणी सिरे पर स्थित बाब अल-मंदेब, लाल सागर का प्रवेश द्वार है, जिससे होकर दुनिया का लगभग 12 प्रतिशत व्यापार होता है. दुनिया का एक-चौथाई कंटेनर व्यापार 32 किलोमीटर चौड़े इस जलडमरूमध्य से होकर स्वेज नहर तक जाता है. हूती पहले भी वहां पर शिपिंग के आने-जाने में रोक लगा चुके हैं. गाजा में इजरायल-हमास युद्ध के दौरान उन्होंने महीनों तक जहाजों को निशाना बनाया था. इस दौरान हूतियों ने 100 से ज्यादा जहाजों को निशाना बनाया था. फिलहाल यह अभी साफ नहीं हो पाया है कि हूती सऊदी अरब के खिलाफ भी उसी स्तर के हमले फिर से शुरू करेंगे या नहीं.

सऊदी अरब ने तोड़ा समझौता : हूती
दूसरी तरफ सऊदी अरब की तरफ से इस मामले में तुरंत कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. सऊदी अरब पहले से ही दबाव का सामना कर रहा है क्योंकि वह लाल सागर तक अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य के विकल्प के तौर पर करता है. होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण है, जो उसने 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमले के बाद स्थापित किया था. सऊदी अरब इस पाइपलाइन के जरिए हर दिन लाखों बैरल कच्चा तेल भेज रहा है. सऊदी अरब ने हूतियों के खिलाफ एक गठबंधन का नेतृत्व किया और 2015 में यमन पर हवाई और समुद्री नाकाबंदी लगा दी. मन में गृह युद्ध 2014 में तब शुरू हुआ जब विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया सरकार को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया. इसके बाद 2022 में एक युद्धविराम समझौता हुआ था. हाल के दिनों में उस युद्धविराम पर खतरा मंडराने लगा है, क्योंकि हूतियों का कहना है कि सऊदी अरब ने सना एयरपोर्ट पर हमला किया. यह हमला ईरान से लौट रहे हूती नेताओं को ले जा रही एक फ्लाइट को प्रभावित करने की कोशिश थी. उस वक्त ये नेता ईरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने गए थे. हमले के बाद फ्लाइट ने उस वक्त अपना रास्ता बदल दिया और फिर दूसरे एयरपोर्ट पर उसकी सुरक्षित लैंडिंग करवाई गई. इसके बाद हूतियों ने सऊदी अरब के आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मिसाइलें और ड्रोन दागे, जो पिछले कुछ सालों में सबसे बड़ी लड़ाई साबित हुई.

हूतियों ने कहा कि हम नाकाबंदी का जवाब नाकाबंदी करके ही देंगे. उन्होंने आगे कहा कि हूती लापरवाह सऊदी दुश्मन की किसी भी मूर्खतापूर्ण हरकत का जवाब व्यापक कार्रवाई करके दिया जाएगा. हूती ईरान के एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस का हिस्सा है, जिसमें लेबनान, इराक और फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों के चरमपंथी समूह भी शामिल हैं. विद्रोहियों के पास ड्रोन का बड़ा भंडार था, लेकिन कई हूती सदस्यों ने कहा था कि इज़राइल-हमास युद्ध के दौरान हुए हमलों के बाद यह भंडार कम हो रहा है.
