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अंबाजी मंदिर के भंडार में हुई थी चोरी?

by Live India
Theft occurred Ambaji Temple storehouse

अम्बाजी मंदिर: गुजरात के प्रसिद्ध शक्तिपीठ अंबाजी मंदिर से जुड़ा एक नया खुलासा सामने आया है, जिसने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब तक माना जा रहा था कि मंदिर के भंडार यानी दानपात्र से चोरी की घटना केवल 5 मई 2026 को हुई थी. इसमें लगभग 1 लाख 4 हजार रुपये चोरी होने का मामला सामने आया था. लेकिन अब सामने आए 21 अप्रैल 2026 के कथित सीसीटीवी फुटेज ने इस पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है. सामने आए कथित सीसीटीवी फुटेज में दावा किया गया है कि 21 अप्रैल को भी मंदिर के भंडार से नकदी चोरी की गई थी.

एक दिन का नहीं है चोरी का मामला

यदि जांच में यह फुटेज सही साबित होती है, तो यह मामला केवल एक दिन की चोरी तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि लंबे समय से चल रही कथित अनियमितताओं की ओर भी इशारा करेगा. फुटेज में कथित तौर पर दिखाई देता है कि एक व्यक्ति पहले नोटों का बंडल अपने पैर के नीचे दबाकर छिपाता है. इसके बाद आसपास मौजूद लोगों की गतिविधियों पर नजर रखते हुए मौका मिलते ही वह नोटों को अपने कपड़ों में रख लेता है. इस पूरी घटना के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या मंदिर के दानपात्र से लगातार चोरी की जा रही थी और यदि ऐसा था तो यह सिलसिला कब से चल रहा था?

सीसीटीवी कैमरे बताए गए थे बंद

इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आया है कि 5 मई को जब चोरी हुई थी, उस समय मंदिर परिसर के सीसीटीवी कैमरे बंद बताए गए थे. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी महत्वपूर्ण जगह के कैमरे उसी समय बंद क्यों थे? क्या यह केवल तकनीकी खराबी थी या फिर इसके पीछे कोई बड़ी लापरवाही अथवा साजिश छिपी हुई थी? अब अप्रैल का फुटेज सामने आने के बाद इन सभी पहलुओं की गहन जांच की मांग तेज हो गई है.

चंदा लोगों की श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक

श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर में चढ़ाया गया दान केवल धनराशि नहीं, बल्कि लोगों की श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक होता है. यदि उसी दान में सेंध लगाई जाती है तो यह सिर्फ चोरी का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने वाली घटना है. लोगों का मानना है कि मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो. जानकारी के अनुसार, इस मामले में मुख्य आरोपी के रूप में चिराग ठाकोर का नाम सामने आया था. नए फुटेज में भी कथित तौर पर उसी की गतिविधियां दिखाई देने का दावा किया जा रहा है. हालांकि, इस पूरे मामले की अंतिम पुष्टि जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी. जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा.

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CCTV रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की जाए

अब मांग उठ रही है कि केवल अप्रैल और मई के फुटेज तक सीमित रहने के बजाय पिछले एक वर्ष के सभी सीसीटीवी रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की जाए. यदि लंबे समय के फुटेज की निष्पक्ष जांच होती है तो संभव है कि इस मामले से जुड़े और भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आएं. फिलहाल इस मामले के आरोपी जमानत पर बाहर हैं. इसे लेकर भी लोगों में नाराजगी देखी जा रही है. श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि लगातार चोरी की आशंका थी तो इतनी गंभीर घटना के बावजूद कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या जांच केवल एक घटना तक सीमित रही या फिर अन्य संभावित घटनाओं की भी पड़ताल की गई?

जांच से सामने आएंगे बड़े खुलासे

अप्रैल और मई में सामने आए कथित सीसीटीवी फुटेज अब कई नए सवाल खड़े कर रहे हैं. क्या मंदिर के भंडार से चोरी का सिलसिला इससे भी पहले से चल रहा था? क्या पिछले कई महीनों या एक साल के सीसीटीवी फुटेज की जांच से और बड़े खुलासे सामने आएंगे? इन सभी सवालों के जवाब अब जांच एजेंसियों को देने होंगे, क्योंकि यह मामला केवल पैसों की चोरी का नहीं, बल्कि देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा हुआ है.

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