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असम बाढ़: असम में भीषण बाढ़ से हालात गंभीर हैं. राज्य के बाढ़ प्रभावित इलाकों के करीब 13,000 घरों में अंधेरा छाया है. वहां अभी भी बिजली कनेक्शन नहीं है, जबकि कई ज़िलों में चारों तरफ फैले कीचड़ से संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा पैदा हो गया है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि प्रशासन ऊपरी असम में बाढ़ की स्थिति का लगातार जायज़ा ले रहा है और उसी के अनुसार घरों में बिजली कनेक्शन बहाल करने के लिए फ़ैसले ले रहा है. उन्होंने कहा कि बिना बिजली वाले उपभोक्ताओं की संख्या में 30 प्रतिशत की और कमी आई है. जैसे-जैसे पानी का स्तर कम हो रहा है, हम लगातार सुरक्षा स्थितियों का आकलन कर रहे हैं और जहां भी सुरक्षित होगा, वहां ग्रिड में और ट्रांसफ़ॉर्मर बहाल करेंगे.
भारी बारिश से तबाही
असम पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (APDCL) ने कहा कि कुल 12,756 उपभोक्ता अभी भी प्रभावित हैं या बिना बिजली के हैं. इसमें कहा गया है कि प्रभावित क्षेत्रों में गौरीसागर, शिवसागर, नज़ीरा, अमगुरी और डेमो शामिल हैं. 24 जुलाई को सरमा ने कहा था कि लगभग 40,000 घरों में बिजली की आपूर्ति नहीं थी, हालांकि 75 प्रतिशत कनेक्शनों में बिजली बहाल कर दी गई थी. नागालैंड और ऊपरी असम के ज़िलों में भारी बारिश ने 19 जुलाई की सुबह से ही तीन ज़िलों में तबाही मचा दी थी.
गुरुवार को असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी रही, भले ही राज्य के ज़्यादातर हिस्सों से पानी कम हो गया था. मरने वालों की संख्या बढ़कर 78 हो गई और तीन लाख से ज़्यादा लोग अभी भी बाढ़ से जूझ रहे हैं. हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले तीन दिनों में राज्य और पड़ोसी अरुणाचल प्रदेश व नागालैंड में कुछ जगहों पर आंधी-तूफ़ान के साथ भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान लगाया है, जिससे इन दो राज्यों की सीमा से लगे ज़िलों के लिए चिंताएं बढ़ गई हैं.
उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहा गंगा का जलस्तर
उधर, उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी के स्तर के करीब पहुंच गया है, जिससे नदी के किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है. अधिकारियों का कहना है कि अगर बारिश जारी रही, तो जलस्तर तेज़ी से बढ़ सकता है, जिससे हरिद्वार के निचले इलाकों और उत्तर प्रदेश में नदी के किनारे बसे क्षेत्रों में बाढ़ आ सकती है. उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग और हरिद्वार ज़िला प्रशासन गंगा के जलस्तर पर नज़र रखे हुए हैं और नदी के किनारे बनाए गए बाढ़ निगरानी केंद्रों को अलर्ट पर रखा गया है.
हरिद्वार के कई हिस्सों में जलभराव
यूपी सिंचाई विभाग (हेडवर्क्स) के SDO भरत भूषण ने बताया कि गुरुवार दोपहर में हरिद्वार में गंगा का जलस्तर 292.55 मीटर मापा गया, जो 293 मीटर के चेतावनी स्तर से सिर्फ़ 45 सेंटीमीटर कम है. खतरे का निशान 294 मीटर है. उन्होंने आगे बताया कि नदी में अभी 144,000 क्यूसेक पानी बह रहा है. गुरुवार सुबह से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण हरिद्वार के कई हिस्सों में जलभराव हो गया है, जिससे ट्रैफ़िक और लोगों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है. मुख्य इलाकों, रिहायशी कॉलोनियों और बाज़ारों में पानी जमा होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं.
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समाचार स्रोत: पीटीआई
