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इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों के Ceasefire का आगाज

by Live India
इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों के Ceasefire का आगाज

Ceasefire: मिडिल ईस्ट वॉर की वजह से पूरी दुनिया पर असर पड़ रहा है. हालांकि, अब इस वॉर को लेकर शांति की एक नई किरण दिखाई दे रही है.

17 अप्रैल, 2026

मिडिल ईस्ट से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया को राहत की सांस लेने पर मजबूर कर दिया है. दरअसल, हफ्तों तक चली भीषण बमबारी, तबाही और चीख-पुकार के बाद आखिरकार शुक्रवार की आधी रात से इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों का सीजफायर लागू हो गया है. ये समझौता न सिर्फ इन दो देशों के लिए, बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को कम करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

घर वापसी की उम्मीद

जैसे ही घड़ी की सुइयों ने रात के 12 बजाए और सीजफायर का टाइम शुरू हुआ, लेबनान की राजधानी बेरूत का आसमान गोलियों की गूंज से थर्रा उठा. हालांकि, ये गोलियां हमले के लिए नहीं, बल्कि खुशी में चलाई गई थीं. लोग सड़कों पर उतर आए और इस छोटे से ही सही, पर सुकून के टाइम का जश्न मनाने लगे. कई परिवार जो वॉर की वजह से अपने घरों को छोड़कर सेफ ठिकानों पर चले गए थे, उन्होंने तुरंत साउथ लेबनान और बेरूत की तरफ लौटना शुरू कर दिया. हालांकि, प्रशासन ने अभी वॉर्निंग दी है कि जब तक ये क्लियर न हो जाए कि सीजफायर टिकेगा या नहीं, तब तक लोग सावधानी बरतें. इन सबके बावजूद लोगों में घर लौटने की बेताबी साफ नजर आ रही है.

नेतनयाहू की शर्त

इस समझौते पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू का रुख थोड़ा सख्त लेकिन डिप्लोमेटिक है. उन्होंने एक वीडियो मैसेज में कहा कि वो शांति प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए इस सीजफायर पर राजी हुए हैं. लेकिन साथ ही उन्होंने क्लियर कर दिया कि इजरायली सेना लेबनान के उन इलाकों से पीछे नहीं हटेगी जहां उसने सिक्योरिटी ज़ोन बनाया है. नेतनयाहू के मुताबिक, इजरायली सेना लेबनान के अंदर करीब 10 किलोमीटर तक अपनी पकड़ बनाए रखेगी. उन्होंने दो टूक कहा, हम जहां हैं, वहीं रहेंगे और वहां से जा नहीं रहे हैं. दूसरी तरफ, हिजबुल्लाह ने भी अपने तेवर ढीले नहीं किए हैं. उनका कहना है कि इजरायल का उनकी जमीन पर कब्जा करना लेबनान के लोगों को विरोध करने का हक देता है. हिजबुल्लाह का ये रुख आने वाले दिनों में समझौते पर सवाल खड़े कर सकता है.

ट्रंप की मैजिक

इस पूरे समझौते के पीछे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा हाथ माना जा रहा है. ट्रंप ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए सोशल मीडिया पर खुशी जाहिर की. उन्होंने लिखा, लेबनान के लिए ये एक ऐतिहासिक दिन हो सकता है. अच्छी चीजें हो रही हैं! ट्रंप की सक्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि समझौते से ठीक पहले वाशिंगटन में इजरायल और लेबनान के राजदूतों के बीच बैठक हुई. इसके बाद ट्रंप और मार्को रूबियो ने इजरायल और लेबनान के टॉप पॉलिटिशियन से फोन पर बात करके उन्हें एक मेज पर आने के लिए मनाया. दिलचस्प बात ये है कि ट्रंप ने इजरायल और लेबनान के नेताओं को व्हाइट हाउस आने का न्योता भी दे दिया है. साल 1983 के बाद ये पहला मौका होगा जब इन दोनों देशों के बीच इतनी हाई लेवल मीटिंग की उम्मीद जगी है. इसके अलावा ट्रंप ने यकीन दिलाया है कि दोनों पक्ष शांति चाहते हैं.

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पाकिस्तान का रोल

इस कहानी में पाकिस्तान का भी एक अहम रोल सामने आया है. खबरों की मानें तो पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर कलीबाफ से मुलाकात की है. पाकिस्तान इस टाइम अमेरिका और ईरान के बीच एक खास कड़ी के रूप में काम कर रहा है. व्हाइट हाउस ने भी हिंट दिए हैं कि ईरान के साथ फ्यूचर की बातचीत इस्लामाबाद में हो सकती है. हालांकि, ईरान के अंदर इस समझौते को लेकर एक राय नहीं है. जहां एक तरफ प्रगति की बात हो रही है, वहीं ईरान के कुछ मिलिट्री एडवाइज़र इस सीजफायर को आगे बढ़ाने के हक में नहीं हैं. ईरान ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका ने उन पर लगाए गए बैन नहीं हटाए, तो वो ट्रेड रोक सकते हैं.

बाजार का हाल

इस वॉर ने अब तक बहुत भारी कीमत वसूली है. आंकड़ों के मुताबिक, ईरान में 3000, लेबनान में 2100 और इजरायल में 23 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. इसके अलावा, लड़ाई की वजह से ग्लोबल मार्केट में भी काफी उथल-पुथल देखी गई. तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और समुद्री रास्तों के बंद होने से दुनिया भर की इकोनॉमी पर असर पड़ा है. लेकिन सीजफायर की खबर आते ही तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई और शेयर मार्केट ने एक बार फिर रिकॉर्ड हाई बनाया है.

आगे का हाल

फिलहाल ये 10 दिन एक टेस्ट की तरह हैं. क्या इजरायल और हिजबुल्लाह अपनी बंदूकों को शांत रख पाएंगे? क्या बेघर हुए 10 लाख लोग सेफ अपने घरों को लौट सकेंगे? इन सवालों के जवाब आने वाले टाइम में मिल जाएंगे. ट्रंप ने हिंट दिए हैं कि अगर चीजें सही रहीं, तो इस 10 दिनों की अवधि को आगे भी बढ़ाया जा सकता है. फिलहाल के लिए, बेरूत और यरुशलम की गलियां बमों के धमाकों के बजाय डिप्लोमेसी की मेज पर हो रही चर्चाओं की तरफ देख रही हैं. दुनिया बस यही उम्मीद कर रही है कि ये 10 दिन का सीजफायर एक लंबी शांति की नींव बने, न कि अगले बड़े हमले की तैयारी.

समाचार स्रोत: पीटीआई

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