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Sehore Drain Protest: मध्य प्रदेश में मानसून ने अभी ठीक से दस्तक भी नहीं दी है, लेकिन सरकारी दावों की पोल खुलनी शुरू हो गई है. मामला सूबे के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा के गृह नगर इछावर का है. जहां प्री-मानसून की पहली ही बारिश ने नगर परिषद के सफाई के दावों को बहा दिया. सडकों पर बदबूदार कचरा ऐसा पसरा कि जनता का जीना मुहाल हो गया और फिर क्या था, जनता की इस नाराजगी को लेकर विपक्ष आक्रामक हो गया. इछावर के पूर्व कांग्रेस विधायक शैलेंद्र पटेल खुद कार्यकर्ताओं के साथ नाले में उतर गए.
नाले में उतरे कांग्रेस पूर्व विधायक

ये तस्वीर राजधानी भोपाल के पड़ोसी जिले सीहोर के इछावर नगर परिषद की हैं. जहां घुटने तक गहरे काले, बदबूदार नाले के पानी में जो शख्स आपको फावड़ा चलाता दिख रहा है, वो कोई सफाईकर्मी नहीं, बल्कि इछावर के पूर्व कांग्रेस विधायक शैलेंद्र पटेल हैं. इछावर की बदहाल सफाई व्यवस्था और नगर परिषद की लापरवाही के खिलाफ कांग्रेस ने ये अनोखा और कड़ा विरोध प्रदर्शन किया है.
राजस्व मंत्री के क्षेत्र की खुली पोल
दरअसल, इछावर विधानसभा क्षेत्र डॉ. मोहन यादव सरकार के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का गढ़ है, जो यहां से 8 बार के विधायक हैं, लेकिन मंत्री जी के इसी गृह नगर में सालों से नालों की सफाई नहीं हुई है. वार्ड क्रमांक 15 के पार्षद जुनैद खान और जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती के नेतृत्व में जब कांग्रेसियों का गुस्सा फूटा तो कार्यकर्ताओं ने नाले से कचरा निकाला, उसे गाड़ी में भरा और सीधे नगर परिषद कार्यालय के गेट पर ले जाकर डंप कर दिया. कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सीएमओ ध्यान से सुन लें, वे जनता के टैक्स के पैसे से वेतन पाने वाले शासकीय सेवक हैं. नगर के अधूरे निर्माण कार्य तुरंत पूरे हों और नालों की नियमित सफाई हो. उन्होंने कहा अगर ये नरक जैसी स्थिति नहीं सुधरी तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी. ये तो सिर्फ ट्रेलर था, आंदोलन और उग्र होगा.
ज्ञापन देने के बावजूद नहीं हुई सुनवाई
स्थानीय पार्षद जुनैद खान का आरोप है कि नगर परिषद को कई बार ज्ञापन दिए गए, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी. नतीजा ये है कि हल्की सी प्री-मानसून बारिश में ही नालियों का गंदा और बदबूदार पानी लोगों के घरों और दुकानों में घुस रहा है. अब देखना ये होगा कि 8 बार के विधायक और सूबे के कद्दावर राजस्व मंत्री के गृह नगर में हुए इस नाला पॉलिटिक्स के बाद सोई हुई नगर परिषद जागती है या जनता को इस मानसून में भी इसी नरक में रहने को मजबूर होना पड़ेगा.
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