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कोर्ट ने AAP नेता के खिलाफ दिए जांच के आदेश

by Live India
Delhi court orders Ashish Sood defamation charge against AAP

Delhi Court : शिक्षा मंत्री आशीष सूद द्वारा AAP नेता पर मानहानि का केस दर्ज करने के बाद कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है. अदालत ने कहा कि पुलिस को इस मामले में निष्पक्ष जांच करनी चाहिए.

दिल्ली कोर्ट: आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता परवीन कुमार के खिलाफ दिल्ली सरकार में मंत्री आशीष सूद ने मानहानि का केस दर्ज कराया. इस पर दिल्ली की एक अदालत ने आरोपों की जांच का निर्देश दिया है. बताया जा रहा है कि परवीन ने 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान सोशल मीडिया पर झूठी, गुमराह करने वाली और मानहानिकारक जानकारी फैलाई थी. फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट हरजोत सिंह औजला ने इस मामले की सुनवाई कर रहे थे और उन्होंने कहा कि पुलिस जांच के बिना इन पहलुओं पर प्रभावी ढंग बातचीत नहीं की जा सकती है.

सामग्री पर दिए जांच के आदेश

अदालत ने 6 फरवरी को अपने देश में कहा कि आरोपों की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए मैसेज के सोर्स की पहचान, डिजिटल कंटेंट का वेरिफिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच, सर्कुलेशन का पता लगाना और अन्य अज्ञात व्यक्तियों की खास भूमिका तय को करना है. यही वजह है कि पुलिस की जांच किए बिना सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा नहीं की जा सकती है. अदालत ने यह भी कहा कि शिकायत चुनाव प्रक्रिया के दौरान सोशल मीडिया के माध्यम से गलत सूचना और झूठे प्रचार से संबंधित आदेश दिए हैं.

पुलिस की जांच की जरूरत : कोर्ट

मजिस्ट्रेट ने आगे कहा कि ये आरोप चुनावी निष्पक्षता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में कथित दखलअंदाजी से जुड़े है. इसके गंभीर नतीजे भी देखने को मिल सकते हैं. साथ ही शिकायतकर्ता (आशीष सूद) से यह कतई उम्मीद नहीं की जा सकती है कि वह खुद ही तकनीकी और डिजिटल सबूत इकट्ठा करें. यही वजह है कि निष्पक्ष और प्रभावी जांच के लिए पुलिस की मदद की सबसे ज्यादा जरूरत है. शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने आरोप लगाया कि परवीन कुमार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनके और उनके परिवार के खिलाफ अपमानजनक कंटेंट फैलाया है.

इसके अलावा कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस ने एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) फाइल की है, जिसमें BNS की धारा 175 (चुनाव के संबंध में झूठा बयान) के तहत पहली नजर में ही अपराध बनता है. इसके बाद कोर्ट ने पुलिस को इस मामले में निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दे दिए और 21 अप्रैल, 2026 तक कोर्ट के सामने स्टेटस रिपोर्ट फाइल जमा करने का भी आदेश दिया है.

समाचार स्रोत: पीटीआई

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