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गोवा कोई विकास क्षेत्र नहीं: गोवा का नाम लेते ही समुद्र का किनारा, बीच, प्राकृतिक खूबसूरती के साथ वहां छुट्टियां मनाने और घूमने का मन करता है. वाकई में गोवा नेचर की सुंदरता का एक शानदार उदाहरण है. इस बीच गोवा की सरकार ने प्रदेश की इस खूबसूरती को बनाए रखने में मदद के लिए एक बड़ा कदम उठाया है.
न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, गोवा सरकार के द्वारा प्रदेश में करीब 1.03 करोड़ वर्ग मीटर जमीन नो डेवलपमेंट जोन घोषित किया गया है. मतलब कि यहां पर कोई भी निर्माण व विकास कार्य नहीं होंगे. आइए जानते हैं कि सरकार का यह पूरा फैसला क्या है और इसके पीछे की वजह क्या है.
मंत्री ने क्या बताई वजह?
न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा के मंत्री विश्वजीत राणे ने कहा है कि गोवा सरकार ने क्षेत्रीय योजना के तहत 1.03 करोड़ वर्ग मीटर इकोलॉजिकली (पारिस्थितिक रूप से) संवेदनशील भूमि को विकास निषेध क्षेत्र (एनडीजेड) घोषित किया है. ये जमीन दक्षिण गोवा के सालसेट तालुका में हैं.
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीसीपी) मंत्री ने शुक्रवार को कहा कि अधिसूचित क्षेत्र में सालसेट तालुका के अंतर्गत आने वाले सात गांवों में फैले नमक के खेत, धान के खेत और अन्य पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील भूमि शामिल है.
मंत्री ने बताया कि इस फैसले का उद्देश्य गोवा के नाजुक पारिस्थितिक तंत्रों (Fragile Ecosystems) की रक्षा करते हुए पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना है.
इन गांवों में 103.78 लाख वर्ग मीटर जमीन
मंत्री राणे के अनुसार, अधिसूचित भूमि का सबसे बड़ा हिस्सा तलौलिम गांव में है, जो 29.13 लाख वर्ग मीटर में फैला हुआ है. इसके बाद माजोर्डा में 17.64 लाख वर्ग मीटर, सेराउलिम में 16.81 लाख वर्ग मीटर, लोटोलिम में 16.71 लाख वर्ग मीटर और उतोर्डा 9.92 लाख वर्ग मीटर जमीन है. वहीं, ओरलिम में 9.49 लाख वर्ग मीटर और कलाटा में 4.08 लाख वर्ग मीटर की जमीन आती है. इन जमीनों का कुल क्षेत्रफल 103.78 लाख वर्ग मीटर है.
इस महीने की शुरुआत से प्रक्रिया हुई शुरू
बताया गया कि यह अधिसूचना राज्य सरकार द्वारा क्षेत्रीय योजना के तहत विकासात्मक गतिविधियों से पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने और उनकी सुरक्षा करने के लिए चलाए जा रहे निरंतर प्रयासों का हिस्सा है.
मालूम हो कि इस महीने की शुरुआत में, टीसीपी विभाग ने तटीय राज्य में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील भूमि के बड़े हिस्सों को एनडीजेड के रूप में अधिसूचित करने की प्रक्रिया शुरू की, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक परिदृश्यों और कृषि विरासत को संरक्षित करना है.
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समाचार स्रोत: पीटीआई
