Home Latest News & Updates जानें भारत रत्न की अनसुनी कहानी

जानें भारत रत्न की अनसुनी कहानी

by Live India
Bharat Ratna

भारत रत्न निलंबन: भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है. यह पुरस्कार उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने साइंस, आर्ट, लिटरेचर, पब्लिक सर्विस और देश के लिए उत्कृष्ट योगदान दिया है. यह लाखों भारतीयों के लिए गर्व की बात है. हालांकि, बहुत कम ही लोग जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब इस अवॉर्ड को खत्म कर दिया गया था. करीब 49 साल पहले लिए गए इस फैसले ने देश भर में एक बड़ी बहस छेड़ दी थी. तत्कालीन प्रधानमंत्री ने उस समय में ऐसे बयान दिये थे, जिन्होंने राजनीति में हंगामा खड़ा कर दिया था.

इस स्टोरी में, हम जानेंगे कि भारत रत्न कब शुरू हुआ, किन हालात में इसे बंद कर दिया गया और आखिर में यह फिर से देश के सबसे बड़े सिविलियन सम्मान के तौर पर कैसे वापस आया. यह भारत रत्न की दिलचस्प और कम चर्चित कहानी है, जिसे हर भारतीय को जरूर जानना चाहिए.

क्यों बंद हुआ था भारत रत्न

1977 में इमरजेंसी खत्म होने के बाद देश की राजनीति अस्थिर हो गई थी. आम चुनाव हुए तो कांग्रेस बुरी तरह हार गई. पहली बार केंद्र में गैर-कांग्रेसी सरकार बनी, जिसका नेतृत्व जनता पार्टी ने किया. मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री बने. सत्ता में आने के बाद 13 जुलाई, 1977 को नई सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया और भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री समेत सभी नागरिक पुरस्कारों को खत्म कर दिया. मोरारजी देसाई का मानना ​​था कि नागरिकों को सम्मान देने वाली कोई भी सरकार पूरी तरह से निष्पक्ष नहीं हो सकती और उस पर भेदभाव या राजनीतिक असर पड़ सकता है. ऐसे पुरस्कार लोकतांत्रिक शासन में व्यक्तिपूजा को बढ़ावा देते हैं.

सरकार ने तर्क दिया कि लोग इन अवॉर्ड्स को अपने नाम के साथ टाइटल के तौर पर इस्तेमाल करते हैं, जो बराबरी के अधिकार का उल्लंघन करता है और समाज में भेदभाव पैदा करता है. उनका मानना ​​था कि जनता खुद किसी व्यक्ति के काम का सम्मान करती है, इसलिए सरकारी अवॉर्ड की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए.

इंदिरा गांधी ने फिर शुरू किया अवार्ड

इस फैसले का नतीजा यह हुआ कि किसी को भी कोई भी नागरिक सम्मान देना बंद कर दिया गया. यह भारतीय इतिहास का एक अनोखा दौर था, जब देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान देने की परंपरा कुछ सालों के लिए पूरी तरह से रुक गई थी. हालांकि, यह स्थिति ज्यादा समय तक नहीं रही. जनवरी 1980 में आम चुनावों के बाद, इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार सत्ता में वापस आई. नई सरकार का मानना ​​था कि देश के लिए असाधारण योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित करना जरूरी है. इससे समाज को बेहतरीन काम करने की प्रेरणा मिलेगी और अपने महान लोगों के योगदान को औपचारिक रूप से मान्यता मिलेगी. इसी सोच को ध्यान में रखते हुए, 25 जनवरी, 1980 को सरकार ने भारत रत्न और दूसरे सिविलियन सम्मान को देना फिर से शुरू कर दिया. इन अवॉर्ड की परंपरा फिर से शुरू हुई. हालांकि कुछ सालों तक किसी को भी भारत रत्न नहीं दिया गया, लेकिन यह अवॉर्ड कभी पूरी तरह से बंद नहीं हुआ.

दोबारा हुआ विवाद

1992 के मध्य में इस पुरस्कार को फिर से रोक दिया गया, जब दो जनहित याचिकाएं दायर की गईं, एक केरल उच्च न्यायालय में और दूसरी मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में, पुरस्कारों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई. तर्क दिया गया कि ये अवॉर्ड्स भारतीय संविधान के आर्टिकल 18(1) का उल्लंघन करते हैं. संविधान का यह आर्टिकल “टाइटल्स को खत्म करने” का प्रावधान है, जो सरकार को मिलिट्री और एजुकेशनल क्षेत्रों को छोड़कर किसी भी नागरिक को कोई खास टाइटल देने से रोकता है. मुकदमा खत्म होने के बाद दिसंबर 1995 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पुरस्कारों की वैधता को बरकरार रखा गया और तब से यह बिना रुके जारी हैं.

कब हुई थी शुरुआत

भारत रत्न 2 जनवरी, 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा शुरु किया गया था. शुरुआत में यह अवॉर्ड सिर्फ कला, साहित्य, विज्ञान और पब्लिक सर्विस में शानदार योगदान के लिए दिया जाता था. बाद में, इसका दायरा बढ़ाकर इसमें इंसानियत के किसी भी क्षेत्र में असाधारण कामयाबी हासिल करने वाले लोगों को शामिल किया गया. भारत रत्न किसी प्रोफेशन तक सीमित नहीं है. इसे साइंटिस्ट, टीचर, कलाकार, खिलाड़ी, सोशल वर्कर, राजनेता और दूसरे क्षेत्रों में शानदार योगदान देने वालों को दिया जा सकता है.

पुरस्कार पाने वालों को राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित एक सनद (प्रमाणपत्र) और एक पवित्र अंजीर के पत्ते के आकार का पदक मिलता है. भारत रत्न पाने वालों को वरीयता के भारतीय क्रम में सातवां स्थान मिलता है. यह पुरस्कार गैर-भारतीयों को भी मिल सकता है. 1992 में नेल्सन मंडेला जैसे विदेशी नागरिक को भी यह अवॉर्ड दिया गया, जिससे यह साफ हो गया कि भारत भी उन विदेशी हस्तियों को सम्मानित कर सकता है जिन्होंने इंसानियत के लिए शानदार योगदान दिया है. भारत के प्रधानमंत्री भारत रत्न के लिए राष्ट्रपति को नामों की सिफारिश करते हैं. एक साल में केवल तीन व्यक्तियों को ही भारत रत्न से सम्मानित किया जा सकता है.

भारत रत्न से सम्मानित व्यक्ति को मिलती हैं ये सुविधाएं

भारत रत्न से सम्मानित व्यक्ति को राष्ट्रपति एक खास सर्टिफिकेट (सनद) और पीपल के पत्ते के आकार का एक तांबे, कांसे और प्लैटिनम से बना पदक देते हैं. पदक के पीछे की तरफ चांदी या कांसे का बना अशोक स्तंभ होता है और उसके नीचे ‘सत्यमेव जयते’ लिखा होता है. इस सम्मान का इस्तेमाल नाम के पहले या बाद में टाइटल के तौर पर नहीं किया जा सकता. कई लोगों को लगता है कि भारत रत्न मिलने वाले को कैश प्राइज भी मिलता है, लेकिन ऐसा नहीं है. भारत रत्न और पद्म पुरस्कार से सम्मानित व्यक्ति को कोई भी कैश प्राइज नहीं मिलता है. बल्कि उन्हें देश के सबसे बड़े VVIPs जैसी सुविधाएं जीवनभर के लिए मिलती हैं.

उन्हें एयर इंडिया की फ्लाइट्स में लाइफटाइम फ्री एग्जीक्यूटिव क्लास ट्रैवल, इंडियन रेलवे में फ्री AC-1 ट्रैवल और एयरपोर्ट्स पर सिक्योरिटी चेक से छूट मिलती है. उन्हें देश के ऑफिशियल सरकारी प्रोटोकॉल (टेबल ऑफ प्रिसिडेंस) में 7A रैंक दिया गया है, जो उन्हें चीफ जस्टिस और पूर्व राष्ट्रपति के ठीक बाद रखता है. इसके अलावा उन्हें पार्लियामेंट मीटिंग्स और रिपब्लिक डे जैसे नेशनल सेरेमनी में स्पेशल गेस्ट के तौर पर सबसे आगे की लाइन में सीट भी दी जाती है. अवॉर्ड पाने वालों को मैरून रंग के डिप्लोमैटिक पासपोर्ट दिए जाते हैं, जिससे उन्हें विदेश यात्रा के दौरान इंडियन एम्बेसी से VIP मदद मिलती है. भारत के किसी भी राज्य में ट्रैवल करने पर, उन्हें राज्य सरकार द्वारा “स्टेट गेस्ट” का स्टेटस दिया जाता है, जिसके तहत राज्य सरकार उनके रहने, खाने और सिक्योरिटी का पूरा खर्च उठाती है. इसके अलावा, उन्हें खतरे या जरूरत के आधार पर, गृह मंत्रालय सले Z या Z प्लास कैटेगरी की सुरक्षा दी जाती है.

अब तक 53 लोगों को मिला भारत रत्न

भारत सरकार ने अब तक 53 लोगों को भारत रत्न से सम्मानित किया है.

वर्ष प्राप्तकर्ता मुख्य पद / क्षेत्र
1954 सी. राजगोपालाचारी भारत के अंतिम गवर्नर-जनरल और स्वतंत्रता सेनानी
1954 डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और द्वितीय राष्ट्रपति
1954 डॉ. सी. वी. रमन नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक वैज्ञानिक (रमन प्रभाव)
1955 डॉ. भगवान दास प्रसिद्ध दार्शनिक, शिक्षाविद् और स्वतंत्रता सेनानी
1955 डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया महान सिविल इंजीनियर और मैसूर के दीवान
1955 जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमंत्री
1957 गोविंद वल्लभ पंत स्वतंत्रता सेनानी और उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री
1958 डॉ. धोंडो केशव कर्व महान समाज सुधारक (महिला कल्याण और शिक्षा)
1961 डॉ. बिधान चंद्र रॉय विख्यात चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री
1961 पुरुषोत्तम दास टंडन स्वतंत्रता सेनानी और हिंदी भाषा के प्रमुख समर्थक
1962 डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति
1963 डॉ. जाकिर हुसैन भारत के तीसरे राष्ट्रपति और शिक्षाविद्
1963 डॉ. पांडुरंग वामन काणे विख्यात भारतविद् (Indologist) और संस्कृत विद्वान
1966 लाल बहादुर शास्त्री (मरणोपरांत) भारत के दूसरे प्रधानमंत्री
1971 इंदिरा गांधी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री
1975 वी. वी. गिरि भारत के चौथे राष्ट्रपति
1976 के. कामराज (मरणोपरांत) स्वतंत्रता सेनानी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री
1980 मदर टेरेसा नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और समाज सेविका
1983 आचार्य विनोबा भावे (मरणोपरांत) भूदान आंदोलन के प्रणेता और स्वतंत्रता सेनानी
1987 खान अब्दुल गफ्फार खान स्वतंत्रता सेनानी (प्रथम गैर-भारतीय / “फ्रंटियर गांधी”)
1988 एम. जी. रामचंद्रन (मरणोपरांत) अभिनेता और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री
1990 डॉ. बी. आर. अंबेडकर (मरणोपरांत) भारतीय संविधान के निर्माता और समाज सुधारक
1990 नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति और रंगभेद विरोधी नेता
1991 राजीव गांधी (मरणोपरांत) भारत के पूर्व प्रधानमंत्री
1991 सरदार वल्लभभाई पटेल (मरणोपरांत) भारत के प्रथम गृह मंत्री (लौह पुरुष)
1991 मोरारजी देसाई भारत के पूर्व प्रधानमंत्री
1992 जे. आर. डी. टाटा विख्यात उद्योगपति और परोपकारी
1992 सत्यजीत रे विश्व प्रसिद्ध फिल्म निर्माता और निर्देशक
1992 मौलाना अबुल कलाम आज़ाद (मरणोपरांत) भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री और स्वतंत्रता सेनानी
1997 गुलजारीलाल नंदा (मरणोपरांत) भारत के पूर्व कार्यवाहक प्रधानमंत्री
1997 अरुणा आसफ़ अली (मरणोपरांत) स्वतंत्रता सेनानी और प्रसिद्ध राष्ट्रवादी नेता
1997 डॉ. ए. पी.एस. जे.एस. अब्दुल कलाम महान वैज्ञानिक (“मिसाइल मैन”) और 11वें राष्ट्रपति
1998 एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी प्रसिद्ध कर्नाटक शास्त्रीय संगीत गायक
1998 चिदंबरम सुब्रमण्यम पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री (हरित क्रांति के राजनीतिक प्रणेता)
1999 जयप्रकाश नारायण (मरणोपरांत) स्वतंत्रता सेनानी और संपूर्ण क्रांति के समाजवादी नेता
1999 प्रो अमर्त्य सेन नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री
1999 पंडित रविशंकर विश्व प्रसिद्ध सितार वादक और संगीतकार
1999 गोपीनाथ बोरदोलोई (मरणोपरांत) असम के प्रथम मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी
2001 लता मंगेशकर भारत की स्वर कोकिला और पार्श्व गायिका
2001 उस्ताद बिस्मिल्लाह खान विश्व प्रसिद्ध शहनाई वादक
2009 पंडित भीमसेन जोशी महान भारतीय शास्त्रीय संगीत गायक
2014 सचिन तेंदुलकर महान भारतीय क्रिकेटर (सबसे युवा प्राप्तकर्ता)
2014 प्रो. सी. एन. आर. राव विख्यात वैज्ञानिक (रसायन विज्ञान)
2015 अटल बिहारी वाजपेयी भारत के पूर्व प्रधानमंत्री
2015 पंडित मदन मोहन मालवीय (मरणोपरांत) महान शिक्षाविद् एवं बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संस्थापक
2019 प्रणब मुखर्जी भारत के 13वें राष्ट्रपति
2019 नानाजी देशमुख (मरणोपरांत) प्रसिद्ध समाज सुधारक और जनसंघ नेता
2019 भूपेन हजारिका (मरणोपरांत) विख्यात गीतकार, संगीतकार और गायक
2024 जननायक कर्पूरी ठाकुर (मरणोपरांत) बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी नेता
2024 लालकृष्ण आडवाणी भारत के पूर्व उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री
2024 चौधरी चरण सिंह (मरणोपरांत) भारत के 5वें प्रधानमंत्री और किसान नेता
2024 पी.एस. वी.एस. नरसिम्हा राव (मरणोपरांत) भारत के 9वें प्रधानमंत्री (आर्थिक सुधारों के जनक)
2024 डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन (मरणोपरांत) महान कृषि वैज्ञानिक (भारत में हरित क्रांति के जनक)

Related Articles